Saturday, 25 June, 2022
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‘मदरसा शब्द ही नहीं होना चाहिए, मुस्लिम मूल रूप से हिंदू’: RSS के कार्यक्रम में असम के CM सरमा ने कहा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ और शिक्षा में धर्म की भूमिका होनी चाहिए या नहीं पर विचार रखते हुए, मदरसों के अस्तित्व को खत्म करने और ‘फिर से धर्म परिवर्तन’ करने की बात कही और कांग्रेस की आलोचना भी की.

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नई दिल्ली: 22 मई को दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि मदरसों का अस्तित्व समाप्त हो जाना चाहिए.

उन्होंने असम में सरकार द्वारा संचालित या फंडेड मदरसों को बंद करने वाले कानून के बारे में बात करते हुए कहा, ‘मदरसा’ शब्द ही नहीं होना चाहिए. घर पर कुरान पढ़ाएं लेकिन बच्चों को स्कूल में विज्ञान और गणित ही पढ़ाया जाना चाहिए. जब हम (भारतीय जनता पार्टी) सत्ता में आए, तो महसूस किया कि राज्य का पैसा एक विशेष धर्म की धार्मिक शिक्षा पर खर्च नहीं किया जाना चाहिए.’

सरमा ने राज्य की मुस्लिम आबादी, कांग्रेस में उनके कार्यकाल और असम में उनके हालिया बुलडोजर ड्राइव के बारे में भी बात की. इस ड्राइव से राज्य ने 5,000-6,000 हेक्टेयर के अतिक्रमण को हटाने में सफलता प्राप्त की है.

हाल ही में यूके के एक कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ‘आइडिया ऑफ नेशन’ पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि भारत राज्यों का एक संघ है. इस पर सरमा कहते हैं, ‘फिर 5,000 साल पुरानी संस्कृति का क्या? रामायण, महाभारत, राम, कृष्ण, चाणक्य, शिवाजी के बारे में क्या? लेकिन मैं इसके लिए उन्हें दोष नहीं देता हूं. वह जरूर जेएनयू के किसी छात्र से मिले होंगे, जिसने उन्हें ये बातें सिखाई होंगी.’

यह बयान असम के मुख्यमंत्री द्वारा कांग्रेस पर किए गए तीखे हमले का हिस्सा था. उन्होंने कहा कि गांधी परिवार की बात न मानने या सहमत न का मतलब था कि आपकी नौकरी या काम खतरे में है: ‘गांधी परिवार से परे कोई पार्टी नहीं थी. अगर आप किसी एक व्यक्ति या परिवार से असहमत हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप देश की अवमानना कर रहे हैं.’

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असम में मुसलमान

सरमा के अनुसार, राज्य की 36 प्रतिशत मुस्लिम आबादी को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है- ‘स्वदेशी मुसलमान, जो समान संस्कृति और भाषा साझा करते हैं, धर्मांतरित या देसी मुसलमान और वो जो भारत में बाहर से आए हैं. ये विस्थापित मुसलमान एक अलग संस्कृति का पालन करते हैं और अपने आपको मियां कहते हैं.’

सीएम ने पहले कहा था कि मियां मुसलमान ‘बहुत सांप्रदायिक’ हैं और असम की संस्कृति को विकृत करने के लिए जिम्मेदार हैं. वह कहते हैं, ‘अब सवाल यह है कि मियां को ऐसा क्यों नहीं कहा जाना चाहिए जब वे खुद अपने आपको उस नाम से पहचानते हैं.’

उन्होंने यह भी कहा, ‘उनके मुताबिक एक मुसलमान मूल रूप से एक हिंदू है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘उसे ‘घर वापसी’, या ‘पुनर्परिवर्तन’ की एक प्रक्रिया से जोड़ना, जहां कोई व्यक्ति अपने मूल धर्म में वापस लौटता है, केवल एक विशेष वातावरण और उचित शिक्षा के जरिए ही संभव होगा.’

वह कहते हैं, ‘लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी को मंदिर जाना है या किसी देवता की पूजा करनी है. व्यक्ति को भारत को सबसे पहले रखना चाहिए और भारत के हितों के बारे में सोचना चाहिए.’

अपने भाषण के दौरान उन्होंने लचित बोरफुकोन जैसे ऐतिहासिक असमिया नायकों की भी प्रशंसा की. लचित तत्कालीन अहोम साम्राज्य में एक कमांडर थे, जो वर्तमान असम में स्थित है. उन्होंने कहा, ‘असम ने लचित बोरफुकोन जैसे नायकों की बहादुरी के कारण इस्लामी आक्रमणकारियों को इस क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने दिया. अगर दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र इस्लामी सभ्यताओं से अछूता रहा है, तो इसका श्रेय असम को दिया जाना चाहिए.’

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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