बेंगलुरु: केरल, जिसे आम तौर पर ‘God’s own country’ कहा जाता है, उसका नाम बदलकर केरलम कर दिया गया है—यह कदम उसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को दिखाने के लिए उठाया गया है. मंगलवार को केंद्र सरकार की कैबिनेट ने दक्षिणी राज्य का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी.
‘केरलम’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है—‘केरा’ का मतलब मलयालम में नारियल होता है, जबकि ‘आलम’ या ‘इलम’ का मतलब मूल स्थान या ज़मीन होता है. दोनों शब्दों का मतलब मिलाकर होता है ‘नारियल की ज़मीन’.
केरल यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर शाजी ए. ने दिप्रिंट को बताया कि ‘केरल’ औपनिवेशिक दौर की स्पेलिंग है, जो सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा बन गई, जबकि ‘केरलम’ राज्य के नाम का स्थानीय भाषा में उच्चारण है.
उन्होंने कहा, “ब्रिटिश लोग उन नामों का सही उच्चारण नहीं कर पाते थे जो ‘m’ या ‘n’ पर खत्म होते थे और उन्होंने अपनी सुविधा के अनुसार इसे बदल दिया, लेकिन मलयालम में यह हमेशा केरलम ही रहा है.” उन्होंने यह भी कहा कि नाम अलग है, लेकिन मतलब वही है.
केरल काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च से जुड़े इतिहासकार डॉ. के.एन. गणेश ने कहा, “इसका मतलब यह है कि हम इस शब्द को ब्रिटिश औपनिवेशिक अर्थ से मलयालम भाषाई अर्थ में बदल रहे हैं.”
हालांकि, ज्यादातर एक्सपर्ट्स का कहना है कि विजयन सरकार के नाम बदलने के फैसले पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन कांग्रेस के शशि थरूर ने एक्स पर एक सवाल उठाया.
उन्होंने लिखा, “यह अच्छा है, इसमें कोई शक नहीं, लेकिन अंग्रेज़ी बोलने वालों के लिए एक छोटा भाषाई सवाल है: अब नए ‘केरलम’ के लोगों के लिए ‘Keralite’ और ‘Keralan’ शब्दों का क्या होगा? ‘Keralamite’ किसी माइक्रोब जैसा लगता है और ‘Keralamian’ किसी खनिज जैसा…! @CMOKerala शायद नए शब्दों के लिए एक प्रतियोगिता शुरू करना चाहें.”
केंद्र की मंजूरी डेढ़ साल बाद आई है, जब पिनराई विजयन सरकार ने 24 जून 2024 को राज्य का नाम ‘केरल’ से ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव पास किया था.
सरकार के बयान में कहा गया, “केंद्र कैबिनेट की मंजूरी के बाद, भारत के राष्ट्रपति ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ को संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत केरल विधानसभा के पास उनकी राय के लिए भेजेंगे. केरल विधानसभा की राय मिलने के बाद, भारत सरकार आगे की कार्रवाई करेगी और संसद में इस विधेयक को पेश करने के लिए राष्ट्रपति की सिफारिश ली जाएगी.”
अपने 2024 के प्रस्ताव में केरल सरकार ने कहा था कि राज्य का गठन 1 नवंबर 1956 को हुआ था और केरल पिरावी दिवस भी हर साल 1 नवंबर को मनाया जाता है.
सरकार ने कहा, “राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही मलयालम बोलने वाले लोगों के लिए एक संयुक्त केरल बनाने की मांग थी, लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में हमारे राज्य का नाम ‘केरल’ दर्ज है. यह विधानसभा केंद्र सरकार से अपील करती है कि संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार राज्य का नाम ‘केरलम’ किया जाए.”
दक्षिणी राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले नाम बदलने की मंजूरी दी गई है.
ब्रिटिश नाम से भाषाई नाम तक
इससे पहले भारत के कई राज्यों ने अपने नाम बदले हैं, ताकि अंग्रेज़ी दौर के नाम हटाकर ऐतिहासिक पहचान को दिखाया जा सके. केरल का नाम बदलना भी इसी तरह का कदम है, जिसे सत्तारूढ़ वामपंथी सरकार ने प्रस्तावित किया और बीजेपी ने भी समर्थन किया.
उत्तरांचल का नाम 2007 में उत्तराखंड किया गया, जबकि उड़ीसा का नाम बदलकर ओडिशा किया गया. पहले मैसूर राज्य का नाम 1973 में कर्नाटक रखा गया. हालांकि, नाम बदलने के कारण अलग-अलग रहे हैं.
पिछले दशकों में कई शहरों के नाम भी बदले गए—बैंगलोर का नाम बेंगलुरु, मद्रास का नाम चेन्नई, मैसूर का नाम मैसूरु, बीजापुर का नाम विजयपुरा किया गया—ताकि स्थानीय उच्चारण अपनाया जा सके और औपनिवेशिक दौर के नाम हटाए जा सकें.
मोदी सरकार और बीजेपी शासित राज्यों में भी शहरों और जगहों के नाम बदले गए हैं, ताकि औपनिवेशिक या मुगल दौर के नाम हटाए जा सकें. उदाहरण के लिए, इलाहाबाद का नाम प्रयागराज और औरंगाबाद का नाम छत्रपति संभाजी नगर किया गया. राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन का नाम भी बदलकर अमृत उद्यान रखा गया.
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