Monday, 27 June, 2022
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महंगाई के रिकॉर्ड तोड़ने के बीच मोदी सरकार चुनाव से पहले बना रही आलोचनाओं से निपटने की रणनीति

खुदरा मुद्रास्फीति जहां अप्रैल में 8 साल के उच्च स्तर 7.8% पर पहुंच गई, वहीं उसी महीने खाद्य एवं ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण थोक मुद्रास्फीति 9 साल के उच्च स्तर 15.08% पर पहुंच गई.

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नई दिल्ली: खाद्य तेलों और बेस मेटल पर आयात शुल्क में संभावित कटौती, गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध और तमाम चीजों के दाम बढ़ने की अनदेखी कर गरीब समर्थक नीतियों को रेखांकित करने का अभियान—ये सब वो हथियार हैं जिन्हें नरेंद्र मोदी सरकार बाहर निकालने की तैयारी कर रही है ताकि केंद्र की सत्ता में आने की अपनी आठवीं सालगिरह पर लगातार बढ़ती मुद्रास्फीति को लेकर जारी दबाव और आलोचनाओं का मुकाबला कर सके.

चुनावी लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले इस मुद्दे पर अपनी रणनीति को आगे बढ़ाना सरकार की तात्कालिक जरूरत भी है, क्योंकि इसी साल के आखिर में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव होने हैं, और बढ़ती महंगाई निश्चित तौर पर दोनों राज्यों में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ विरोधी दलों का एक बड़ा मुद्दा होगी.

कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने 14 मई को एक संवाददाता सम्मेलन में महंगाई का ग्राफ लगातार बढ़ने और देश से बाहर पूंजी प्रवाह रोक पाने में नाकाम रहने के लिए मोदी सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को जिम्मेदार ठहराया था.

उन्होंने आगे कहा था कि सरकार खुदरा और थोक मुद्रास्फीति बढ़ने को सही ठहराने के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध का तर्क नहीं दे सकती है.

वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में 8 साल के उच्च स्तर 7.8 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि थोक मुद्रास्फीति उसी महीने खाद्य और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण 9 साल के उच्च स्तर 15.08 प्रतिशत पर पहुंच गई.

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वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने संकेत दिया कि सरकार महंगाई पर काबू पाने के लिए कई विकल्पों पर एक साथ काम कर रही है, जिसमें अप्रैल में मुद्रास्फीति में वृद्धि का एक बड़ा कारण रहे खाद्य तेलों के आयात पर टैक्स में कटौती और पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क घटाना शामिल है.

इस बीच, भाजपा ने कहा कि बेस मेटल जैसी वस्तुओं पर आयात शुल्क से संबंधित एक योजना है. वहीं, नेताओं ने केंद्र और राज्यों में पार्टी की सरकारों की तरफ से लागू की गई ‘गरीब समर्थक नीतियों’ को रेखांकित करने के प्रयासों के बारे में भी बताया.

2014 के आम चुनावों में भाजपा की जबर्दस्त जीत के बाद मोदी ने उसी साल 26 मई को पहली बार प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी. उनका दूसरा कार्यकाल 30 मई 2019 को लोकसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार जीत के बाद शुरू हुआ था.


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महंगाई पर लगाम कसने के सरकार के प्रयास

आर्थिक मामलों पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने दिप्रिंट को बताया कि केंद्र बेस मेटल जैसी वस्तुओं पर आयात शुल्क को तर्कसंगत बनाने पर विचार कर रहा है ताकि विनिर्माण क्षेत्र के लिए इनपुट कास्ट को घटाया जा सके.

उन्होंने आगे कहा कि 12 हफ्ते से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध एक बार खत्म हो जाए तो ‘निकट भविष्य’ में वैश्विक ईंधन की कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है.

उन्होंने कहा, ‘ईंधन की कीमतों पर, हमारी उम्मीद यही है कि सरकार के सौर ऊर्जा और नई हाइड्रोजन ऊर्जा के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करने से जीवाश्म ईंधन की कीमतों में कमी आएगी. और एक बार रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त हो जाने पर, निकट भविष्य में वैश्विक ईंधन की कीमतों में भी और गिरावट आएगी. अंतत: इससे अर्थव्यवस्था को मुद्रास्फीति पर काबू पाने में मदद मिलेगी.’

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल द्वारा तैयार डेटा के मुताबिक, भारत की क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत मंगलवार को बढ़कर सात सप्ताह के उच्च स्तर 112.21 डॉलर प्रति बैरल हो गई.

अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने पूर्व में गरीबों के कल्याण के कदम उठाए हैं, जिससे लोगों को उच्च मुद्रास्फीति से निपटने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा, ‘हमारी सरकार ने कम आय वाले और गरीबी रेखा से नीचे वाले लोगों की सीधे मदद के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं. 90 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न वितरण को तो विश्व बैंक ने भी सबसे प्रभावी कल्याणकारी योजनाओं में से एक बताया है.’

उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने कहा है कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि पीएम आवास योजना (सस्ते आवास), आयुष्मान भारत (स्वास्थ्य बीमा), पीएम किसान सम्मान निधि (किसानों को नकद सहायता), उज्ज्वला योजना (मुफ्त गैस सिलेंडर और स्टोव वितरण) और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी जैसी सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ हमारी 100 फीसदी आबादी को मिले.’

अग्रवाल ने कहा कि इन कदमों से ‘गरीब लोगों को महंगाई की मार से बचाने और उन्हें सशक्त बनाने में मदद मिलेगी.’

14 मई को जारी एक अधिसूचना के मुताबिक, केंद्र ने गेहूं के कम उत्पादन और यूक्रेन पर रूसी हमले के कारण इसकी वैश्विक कीमतों में आई तेजी जैसे फैक्टर ध्यान में रखकर गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है.

खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने पिछले शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अनियंत्रित निर्यात के कारण पिछले एक साल में गेहूं की घरेलू कीमतों में 19 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है, जबकि उत्पादन में मामूली गिरावट आई है.

वहीं, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट को बताया कि सरकार मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए कई संभावित उपायों पर विचार कर रही है, इसमें दो मुख्य विकल्प हैं—’खाद्य तेलों पर आयात शुल्क घटाना और पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती.’

राष्ट्रीय राजधानी में फिलहाल पेट्रोल 105.41 रुपये प्रति लीटर और डीजल 96.67 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है.

कच्चे खाद्य तेलों के आयात पर प्रभावी शुल्क 5.5 प्रतिशत है. खाद्य तेल संबंधी सारे कच्चे माल पर मूल सीमा शुल्क शून्य है. लेकिन इस पर असल में दो तरह के उपकर लगते हैं—कृषि इंफ्रास्ट्रकचर विकास उपकर, और सामाजिक कल्याण उपकर.

भाजपा गरीब समर्थक नीतिया हाईलाइट करेगी, महंगाई का मुद्दा नजरअंदाज करेगी

मोदी सरकार के आठ साल पूरे होने के मौके पर दिप्रिंट ने जिन भाजपा नेताओं से बातचीत की, उनका कहना है कि 30 मई से पार्टी सरकार की उन नीतियों की सूची तैयार करेगी जिनका ‘गरीबों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है.’

उन्होंने कहा कि हालांकि, मुद्रास्फीति के मुद्दे पर पार्टी के नेताओं से कहा गया है कि वे इसमें आगे चलकर कमी आने की उम्मीदों के बारे में लोगों को बताएं.

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट को बताया, ‘विचार यह है कि सरकार ने जो कुछ किया है और हम कहां तक पहुंच गए हैं, इस बात को प्रमुखता से उजागर किया जाए. बहुत सारी गरीब समर्थक नीतियां लागू की गई हैं, और उन पर अमल होना भी काफी महत्वपूर्ण रहा है.’

उक्त नेता ने कहा, ‘जहां तक कीमतें बढ़ने और ईंधन की कीमतों का सवाल है, ये सभी वैश्विक घटनाक्रम से संबंधित हैं. हमें उम्मीद है कि आने वाले कुछ महीनों में हालात सुधरेंगे और (हिमाचल और गुजरात) विधानसभा चुनाव में काफी समय है.’

नेता ने आगे कहा, सभी राज्यों को एक पुस्तिका के रूप में एक व्यापक ‘रिपोर्ट कार्ड’ तैयार करने और जनता को इस बात से अवगत कराने को कहा गया है कि क्या वादे किए गए थे और सरकार ने क्या-क्या किया है.

भाजपा नेता ने कहा, ‘जहां तक समाज के गरीब तबकों का संबंध है, केंद्र के साथ ही भाजपा नीत राज्य सरकारों ने भी कई कल्याणकारी उपाय किए हैं. लोग समझते हैं कि रूस-यूक्रेन युद्ध का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ा है और कुछ ही महीनों की बात है, फिर स्थिति सुधर जाएगी.’

उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव ‘ब्रांड मोदी’ और केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से किए गए कार्यों के आधार पर लड़ा जाएगा, और ईंधन की कीमतों में वृद्धि जैसे ‘अस्थायी’ मुद्दों का कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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