नई दिल्ली: यह कहते हुए कि पड़ोसी देशों से विदेशियों की “घुसपैठ” भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने शुक्रवार को कहा कि इस मुद्दे को सांप्रदायिक नज़र से नहीं देखा जाना चाहिए.
खास तौर पर “बांग्लादेश से घुसपैठ” पर चिंता जताते हुए, आंबेकर ने दिप्रिंट को दिए एक विशेष इंटरव्यू में कहा कि ऐसी घुसपैठ भारत की राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा है और इससे संसाधनों पर भी दबाव पड़ता है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी “घुसपैठ” का मुद्दा उठा रही है.
आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख ने कहा, “बिलकुल, चिंता है कि अवैध घुसपैठिए हैं, खासकर बांग्लादेश से. उनकी संख्या लाखों में है…इसलिए यह हमारी राष्ट्रीय एकता, अखंडता, सुरक्षा और हमारे संसाधनों व आर्थिक सुविधाओं के लिए बहुत गंभीर खतरा है.”
जब उनसे बीजेपी द्वारा उठाए जा रहे “जनसांख्यिकीय असंतुलन” और “घुसपैठ” के मुद्दों पर पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “यह हम पर बोझ बना रहा है. साथ ही वे अवैध तरीके से वोटर बन रहे हैं और हमारी लोकतांत्रिक व चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं. इसलिए किसी भी देश के लिए यह बहुत गंभीर मुद्दा है. मेरा मानना है कि हमें इसे सांप्रदायिक तरीके से नहीं देखना चाहिए.”
आंबेकर ने कहा कि राष्ट्रीय हित में इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देना चाहिए.
उन्होंने कहा, “यह पूरे देश में हो रहा है क्योंकि घुसपैठिए असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों और यहां तक कि बंगाल जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में हो सकते हैं, लेकिन यह सिर्फ उन्हीं इलाकों तक सीमित नहीं है.”
अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले कहा था कि सरकार देश की जनसंख्या संरचना को बदलने की चुनौती से निपटने के लिए एक उच्च-स्तरीय मिशन बनाएगी, जिसे उन्होंने “सोची-समझी साजिश” बताया.
मोदी ने कहा, “मैं आज देश को एक चिंता और चुनौती के बारे में चेतावनी देना चाहता हूं. एक सोची-समझी साजिश के तहत देश की जनसंख्या संरचना बदली जा रही है. एक नई समस्या के बीज बोए जा रहे हैं.”
उन्होंने कहा, “ये घुसपैठिए इस देश के युवाओं की रोजी-रोटी छीन रहे हैं और मेरे देश की बहनों और बेटियों को निशाना बना रहे हैं. इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.”
आंबेकर ने चुनाव आयोग द्वारा की जा रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) का भी बचाव किया और कहा कि जिन लोगों के नाम छूट गए हैं लेकिन वे असली हैं, उनके नाम वोटर लिस्ट में जोड़े जाने चाहिए.
उन्होंने कहा, “एसआईआर एक सामान्य प्रक्रिया है. हर चुनाव में वोटर लिस्ट की समीक्षा होती है, और यह पहली बार नहीं हो रहा है. मेरा मानना है कि चुनाव आयोग ने सब कुछ समझा दिया है और आम जनता को कोई शिकायत नहीं है.”
“लव जिहाद” और “लैंड जिहाद” जैसे शब्दों के इस्तेमाल का बचाव करते हुए आंबेकर ने कहा कि ये शब्द मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नहीं बल्कि कुछ व्यक्तियों के लिए हैं.
उन्होंने कहा, “ ‘लव जिहाद’ जैसे शब्द एक सच्चाई को दिखाते हैं; एक अपराध हो रहा है. क्या आतंकवाद सच्चाई नहीं है? क्या इस्लामिक कट्टरपंथी आतंकवाद सच्चाई नहीं है? यह दुनिया भर में हो रहा है. ऐसे तत्व सिर्फ बंदूक वाले आतंकवाद तक सीमित नहीं हैं बल्कि इसमें पैसे, ताकत और अन्य गलत तरीकों का इस्तेमाल भी शामिल है. इसलिए यह मुस्लिम समुदाय या किसी के खिलाफ नहीं है.”
पश्चिम एशिया के संघर्षों पर मोदी सरकार की प्रतिक्रिया का बचाव करते हुए आंबेकर ने कहा कि यह अब सिर्फ उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी दुनिया से जुड़ा मुद्दा है.
उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि हमारी सरकार राष्ट्रीय हित में स्थिति संभालने में पूरी तरह सक्षम है. जब ऐसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दे सामने आते हैं, जिनसे हमें एक देश के रूप में निपटना होता है, तो हर नागरिक, हर राजनीतिक पार्टी और हर संगठन को सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए.”
विपक्षी पार्टियों की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए आंबेकर ने फिर कहा कि सभी को सरकार का समर्थन करना चाहिए.
उन्होंने कहा, “क्योंकि यह बहुत अहम समय है, और हमें अपने राष्ट्रीय हित, अपने लोगों और अपनी जरूरतों का ध्यान रखना है. मेरा मानना है कि सरकार इसे बहुत अच्छी तरह संभाल रही है, और हमें उनके साथ खड़ा होना चाहिए.”
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