नई दिल्ली: इंदौर की एक कॉलोनी में सीवर मिला दूषित पानी पीने से हुई कई लोगों की मौतों ने न सिर्फ विपक्ष, बल्कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेताओं की भी आलोचना को जन्म दिया है.
मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने शुक्रवार को इन मौतों पर नाराज़गी जताई और मामले को संभालने में नाकामी को लेकर राज्य नेतृत्व पर सवाल उठाए.
भारती ने कहा कि इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में सैकड़ों लोगों को बीमार करने वाली यह घटना राज्य के लिए “शर्म” की बात है और मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व की एक बड़ी परीक्षा है.
उन्होंने एक्स पर सिलसिलेवार पोस्ट में कहा, “साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारा प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं.”
केंद्रीय मंत्री रह चुकी उमा भारती ने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत रैंकिंग में इंदौर को देश का सबसे साफ शहर बताया जाता है. उन्होंने लिखा, “प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवार्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी, जहर मिला पानी जो कितनी जिंदगियों को निगल गया और निगलता जा रहा है, मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है…”
इसके अलावा, बीजेपी नेता ने संदिग्ध दूषित पानी से मरे लोगों के परिवारों को 2 लाख रुपये मुआवजा देने की राज्य सरकार की घोषणा की भी आलोचना की.
उन्होंने कहा, “इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा, पीडितजनों से माफी मांगनी होगी और नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी अपराधी हैं उन्हें अधिकतम दंड देना होगा. यह मोहन यादव जी की परीक्षा की घड़ी है.”
1. साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारा प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं।
2. प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवार्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी, जहर मिला पानी जो कितनी जिंदगियों को निगल गया और…— Uma Bharti (@umasribharti) January 2, 2026
एक अन्य पोस्ट में भारती ने कहा कि “सिर्फ इंदौर के मेयर नहीं, मध्य प्रदेश का शासन एवं प्रशासन, इस महापाप के सभी जिम्मेवार लोग जनता के प्रति अपराध के कटघरे में खड़े हैं.”
उमा भारती का अपनी ही पार्टी की एमपी सरकार की आलोचना करना नया नहीं है. पिछले साल जुलाई में उन्होंने एमपी क्राइम ब्रांच पर सवाल उठाए थे कि उनका नाम “व्यापम” घोटाले से कैसे जोड़ा गया. इससे कुछ महीने पहले उन्होंने आबकारी नीति को लेकर भी अपनी ही सरकार को घेरा था.
शुक्रवार को बीजेपी के भीतर कुछ और नेताओं ने भी भारती की चिंता से सहमति जताई, हालांकि, उन्होंने सार्वजनिक रूप से पार्टी के खिलाफ कुछ नहीं कहा.
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमने इस पूरे मामले को पूरी तरह गलत तरीके से संभाला है. हमें पीड़ितों और उनके परिवारों को राहत और सुविधाएं देने में सबसे आगे होना चाहिए था. हर दूसरे दिन एमपी खबरों में रहता है, लेकिन गलत वजहों से. शासन व्यवस्था पूरी तरह ढह गई है.”
पार्टी के एक अन्य पदाधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार को शासन पर ध्यान देने और योजनाओं को सही व तेजी से लागू करने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा, “ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों पर कार्रवाई हो. वही लोग जनता से जुड़े होते हैं.”
संदिग्ध दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर राज्य सरकार लगातार आलोचनाओं का सामना कर रही है.
इस हफ्ते की शुरुआत में राज्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय विवाद में घिर गए थे, जब इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी मिलने के सवाल पर उन्होंने कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया. वे उस समय इलाके के दौरे पर थे.
इंदौर-1 विधानसभा क्षेत्र से विधायक विजयवर्गीय ने बाद में एक्स पर लिखा कि उनकी टीम लगातार समस्या के समाधान के लिए काम कर रही है. उन्होंने लिखा, “… इस गहरे दु:ख की अवस्था में मीडिया के एक प्रश्न पर मेरे शब्द गलत निकल गए.”
मैं और मेरी टीम पिछले दो दिनों से बिना सोए प्रभावित क्षेत्र में लगातार स्थिति सुधारने में जुटी हुई है। दूषित पानी से मेरे लोग पीड़ित हैं और कुछ हमें छोड़कर चले गए, इस गहरे दु:ख की अवस्था में मीडिया के एक प्रश्न पर मेरे शब्द गलत निकल गए। इसके लिए मैं खेद प्रकट करता हूँ।
लेकिन जब…
— Kailash Vijayvargiya (@KailashOnline) December 31, 2025
अब तक उल्टी, दस्त, डिहाइड्रेशन और तेज़ बुखार जैसे लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती नौ लोगों की मौत हो चुकी है. इंदौर अधिकारियों ने कहा है कि पीने के पानी की पाइपलाइन में सीवर के रिसाव से पानी दूषित हो गया था.
गुरुवार तक करीब 200 लोग अस्पताल में भर्ती थे, जिनमें से दो दर्जन से अधिक आईसीयू में थे.
इस बीच, इंदौर जिला प्रशासन ने भागीरथपुरा में घर-घर जाकर मेडिकल जांच के लिए टीमें तैनात की हैं और टैंकरों से पानी सप्लाई किया जा रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अस्पताल जाकर डॉक्टरों और भर्ती मरीजों से मुलाकात की.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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