scorecardresearch
Saturday, 14 February, 2026
होमराजनीतिपंजाब में BJP की रणनीति में हरियाणा CM सैनी की अहम भूमिका: पगड़ी राजनीति से ‘ऑपरेशन लोटस’ तक चर्चा

पंजाब में BJP की रणनीति में हरियाणा CM सैनी की अहम भूमिका: पगड़ी राजनीति से ‘ऑपरेशन लोटस’ तक चर्चा

2027 पंजाब चुनाव से पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री सैनी पंजाब के लगातार दौरे कर रहे हैं, गुरुद्वारों में जा रहे हैं और गैर-जाट सिख व ओबीसी मतदाताओं तक पहुंच बना रहे हैं, जिससे बीजेपी की पंजाब रणनीति में उनकी भूमिका बढ़ रही है.

Text Size:

गुरुग्राम: आम आदमी पार्टी (AAP) ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि वह 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले उसकी संगरूर विधायक नरिंद्र कौर भराज को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहे हैं.

भराज ने दावा किया कि सैनी के कार्यालय ने उनसे “बंद कमरे में बैठक” के लिए संपर्क किया और उनके क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की ओर से टिकट देने की पेशकश की, साथ ही उनकी “हर मांग पूरी करने” का वादा किया.

यह आरोप गुरुवार को AAP पंजाब के प्रवक्ता बलतेज पन्नू के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाया गया, जिसे सैनी ने पूरी तरह खारिज कर दिया.

उन्होंने कहा, “कौन भराज? मुझे तो उनका नाम भी नहीं पता.”

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को “बेबुनियाद” और “राजनीति से प्रेरित” बताया और कहा कि पंजाब की जनता 2027 में अपना फैसला देगी.

उन्होंने कहा, “अगर बीजेपी की सरकार बनती है, तो गैंगस्टरवाद खत्म हो जाएगा.”

लेकिन इस विवाद ने एक ऐसी बात पर और ज्यादा ध्यान खींचा है, जो कई महीनों से बन रही थी—पंजाब की राजनीति में सैनी की बढ़ती सक्रियता.

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का पंजाब संपर्क अभियान | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का पंजाब संपर्क अभियान | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

पगड़ी और राजनीतिक यात्रा

2025 के मध्य से हरियाणा के मुख्यमंत्री लगभग हर हफ्ते पंजाब जा रहे हैं और इस साल जनवरी से तो और ज्यादा.

हरियाणा के एक वरिष्ठ बीजेपी नेता, जिन्होंने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट से बात की, उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने सैनी से कहा है कि चुनाव से पहले हर हफ्ते कम से कम दो दिन पंजाब में बिताएं.

उन्हें अमृतसर के गोल्डन टेंपल से लेकर आनंदपुर साहिब, फतेहगढ़ साहिब और माछीवाड़ा तक गुरुद्वारों में देखा गया है.

वह लगभग हर हफ्ते पंजाब में जनसभाएं कर रहे हैं. हर जगह उनके सिर पर केसरिया पगड़ी होती है. वह पंजाबी में बोलते हैं, ज़रूरत पड़ने पर हरियाणवी लहज़े वाली हिंदी भी बोलते हैं और “अच्छे शासन” और “हरियाणा मॉडल” की बात करते हैं.

बीजेपी के अंदरूनी लोग इसे एक सोची-समझी रणनीति बता रहे हैं.

सैनी, जो एक ओबीसी नेता हैं और जिनकी मां कुलवंत कौर सिख हैं, उन्हें पार्टी पंजाब के गैर-जाट सिख और ओबीसी समुदाय, खासकर सैनी समुदाय तक पहुंच बनाने वाले चेहरे के रूप में पेश कर रही है.

सैनी के मीडिया समन्वयक अशोक छाबड़ा ने दिप्रिंट को बताया कि मुख्यमंत्री अंबाला जिले के मिर्जापुर माजरा गांव से हैं और पंजाब से लगते सीमावर्ती इलाकों की संस्कृति पंजाब जैसी ही है.

उन्होंने कहा कि इस इलाके में कई परिवार ऐसे हैं, जहां एक बेटा सिख धर्म अपनाता है.

छाबड़ा ने कहा कि वह खुद भी युवावस्था में पगड़ी पहनते थे.

डेरा बस्सी, राजपुरा और ग्रामीण पटियाला का सैनी इलाका छोटा है, लेकिन चुनावी रूप से महत्वपूर्ण है. पार्टी नेताओं का कहना है कि सैनी की पंजाबी बोलने की क्षमता उन्हें ‘बाहरी’ कहे जाने से बचाती है.

सैनी ने कई बार कहा है, “पंजाब के लोग मुझे बुलाते हैं. मैं एक पार्टी कार्यकर्ता के रूप में जाता हूं.”

हाल की रैलियों में उन्होंने चंडीगढ़ में बीजेपी सरकार बनाने की खुलकर अपील की और कहा कि वह हरियाणा की योजनाओं को लागू करेंगे और पंजाब को “झूठ और खराब शासन” से बाहर निकालेंगे.

मोहाली की एमिटी यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान की सहायक प्रोफेसर और Centre for the Study of Developing Societies (CSDS) की पूर्व शोधकर्ता डॉ. ज्योति मिश्रा ने कहा कि पंजाब चुनाव में सैनी को आगे लाना सिर्फ सैनी समुदाय तक पहुंच बनाना नहीं है, बल्कि गैर-जाट सिख, ओबीसी और दलित समुदाय को एकजुट करना भी है.

उन्होंने कहा, “पंजाब में लगभग 31 प्रतिशत ओबीसी हैं, जिनमें कई सिख सैनी हैं. राज्य में 32-33 प्रतिशत दलित आबादी भी है, जो देश में सबसे ज्यादा में से एक है. अगर इस 60 प्रतिशत से ज्यादा आबादी को जाट सिखों के मुकाबले खड़ा किया जाए, तो बीजेपी वही कर सकती है जो उसने हरियाणा में किया था.”

उन्होंने कहा कि 1966 में हरियाणा बनने के बाद पंजाब के 13 मुख्यमंत्रियों में से सिर्फ दो—ज्ञानी जैल सिंह और चरणजीत सिंह चन्नी—जाट सिख नहीं थे.

AAP विधायक नरिंदर कौर भराज | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
AAP विधायक नरिंदर कौर भराज | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

AAP का जवाब: ‘डिपुटेशन CM’

AAP के लिए सैनी के दौरे पड़ोसी राज्य की दिलचस्पी नहीं, बल्कि ‘ऑपरेशन लोटस 2.0’ हैं.

पन्नू और भराज ने कहा कि सैनी की गतिविधियां एक फुल-टाइम जिम्मेदारी जैसी लगती हैं.

भराज ने कहा, “लगता है बीजेपी ने उन्हें पंजाब में डिपुटेशन पर भेज दिया है.”

उन्होंने कहा कि वह 2014 से AAP की समर्पित कार्यकर्ता हैं, जब 19 साल की उम्र में वह अपने गांव की पहली महिला पोलिंग एजेंट बनी थीं.

2022 में 27 साल की उम्र में पंजाब की सबसे युवा विधायक बनने वालीं भराज ने बताया कि उनसे एक स्थानीय व्यक्ति के जरिए संपर्क किया गया.

उन्होंने कहा, “उन्होंने कहा बीजेपी को हर सीट पर उम्मीदवार चाहिए. उन्होंने मुझे संगरूर से टिकट देने की पेशकश की और कहा मेरी हर मांग पूरी होगी.”

उन्होंने इसे ठुकरा दिया और कहा, “मुझे AAP और संगरूर की जनता ने विधायक बनाया है. मेरी राजनीति बिकाऊ नहीं है.”

यह पहली बार नहीं है जब AAP ने इस तरह के आरोप लगाए हैं.

2022 में सरकार बनने के बाद भी पार्टी ने डीजीपी से शिकायत की थी कि कम से कम 10 विधायकों को तोड़ने की कोशिश की गई.

सैनी क्यों? पंजाब में बीजेपी की रणनीति

मिश्रा ने कहा कि बीजेपी को पंजाब में लंबे समय से चुनावी सफलता नहीं मिली है और 2022 चुनाव में भी उसे ज्यादा सफलता नहीं मिली.

कृषि कानूनों के बाद अकाली दल के साथ उसका गठबंधन टूट गया और तब से पार्टी नए नेता जोड़ रही है, कार्यक्रम कर रही है और अब सैनी को प्रमुख चेहरा बना रही है.

उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा के बीच पानी विवाद, किसान मुद्दे और खुली सीमा जैसे कई समान मुद्दे हैं. इसलिए बीजेपी ने हरियाणा के मुख्यमंत्री को पंजाब में उतारा है.

उन्होंने कहा, “अगर बीजेपी पंजाब में अच्छा प्रदर्शन करती है, तो इससे हरियाणा के सीमावर्ती इलाकों में भी उसका ओबीसी और गैर-जाट वोट मजबूत होगा. सैनी, जिन्होंने पिछले साल हरियाणा में लगातार तीसरी जीत दिलाई, अब पंजाब में भी वही कर सकते हैं.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

share & View comments