Friday, 27 May, 2022
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पंजाब में स्टार पावर की तलाश ने BJP को पूर्व क्रिकेटर दिनेश मोंगिया तक पहुंचाया, जो कभी ‘फिक्सिंग के आरोपी’ थे

मोंगिया 2003 विश्व कप में भारत के लिए खेले, लेकिन मैच-फिक्सिंग के आरोपों ने उनके करियर को दाग़दार कर दिया. दो कांग्रेस विधायक फतेह सिंह बाजवा, और बलविंदर सिंह लड्डी भी बीजेपी में शामिल हो गए.

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नई दिल्ली: भारत के लिए अपना आख़िरी मैच खेलने के 13 साल बाद, पूर्व क्रिकेटर दिनेश मोंगिया, जो एक समय फिक्सिंग घोटाले में अपनी कथित संलिप्तता को लेकर जांच के घेरे में आए थे, अब राजनीति में एक नई पारी खेलने को तैयार हैं.

मंगलवार को मोंगिया भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए, और संभावना है कि अगले वर्ष की शुरुआत में पंजाब विधानसभा चुनावों के साथ वो अपनी सियासी पारी की शुरुआत कर सकते हैं.

मोंगिया को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता गजेंद्र सिंह शेखावत और पार्टी महासचिव दुष्यंत गौतम की मौजूदगी में पार्टी में शामिल किया गया.

मोंगिया के अलावा, दो कांग्रेस विधायक- कादियान से फतेह जंग बाजवा तथा श्री हरगोविंदपुर से बलविंदर सिंह लड्डी, अकाली नेता और तीन बार के विधायक गुरतेज सिंह धुरियाना, और पूर्व सांसद राजदेव सिंह खालसा भी मंगलवार को बीजेपी में शामिल हो गए.

फतेह सिंह बाजवा का शामिल होना ख़ासतौर से अहमियत रखता है, ये देखते हुए कि वो पूर्व पंजाब कांग्रेस प्रमुख और वर्तमान विधायक परताप सिंह बाजवा के छोटे भाई हैं.

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इस घटनाक्रम से एक दिन पहले ही पार्टी ने 117 सदस्यीय असेम्बली चुनावों के लिए पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की पंजाब लोक कांग्रेस और सुखदेव सिंह ढींढसा के शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के साथ गठबंधन का ऐलान किया था.

पंजाब के लिए बीजेपी महासचिव सुभाष शर्मा ने दिप्रिंट को बताया, ‘पंजाब में हमें एक अच्छा उम्मीदवार चाहिए, ताकि कम से कम 70 सीटों पर हम एक अच्छी टक्कर दे सकें. बीजेपी बहुत बड़ी पार्टी है. यहां हर किसी के लिए गुंजाइश है’.

पार्टी के पंजाब प्रभारी शेखावत ने मंगलवार को मीडिया को बताया कि ‘पंजाब में बीजेपी के पदचिन्ह फैल रहे हैं’.

उन्होंने आगे कहा, ‘यही कारण है कि सत्तारूढ़ पार्टी के सिटिंग विधायक बीजेपी में शामिल हो रहे हैं. ये सब देश के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों का ही नतीजा है’.


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स्टार पावर

बीजेपी सूत्रों ने कहा कि चंडीगढ़ में जन्मे मोंगिया आगामी चुनाव लड़ सकते हैं. एक पार्टी सूत्र ने कहा, ‘कृषि क़ानूनों की वापसी और अमरिंदर के साथ गठबंधन के ऐलान के बाद बीजेपी पंजाब चुनावों में एक बड़ी भूमिका निभाना चाहती है’. उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी दूसरी पार्टियों के साथ साथ सेलिब्रिटीज़ और क्रिकेटर्स पर भी नज़रें गड़ाए हुए है.

बीजेपी ने अक्सर मशहूर लोगों को चुनावी मैदान में उतारा है, जिनमें गुरदासपुर से अभिनेता विनोद खन्ना और सनी देओल, बीकानेर से धर्मेंद्र, मथुरा से हेमा मालिनी, पूर्वी दिल्ली से क्रिकेटर गौतम गंभीर और उत्तर पश्चिमी दिल्ली से गायक हंस राज ‘हंस’ शामिल हैं.

कुछ सप्ताह पहले, पूर्व पंजाब पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सर्बदीप सिंह विर्क भी बीजेपी में शामिल हो गए थे. इक़बाल सिंह लालपुरा के बाद जो 2012 में शामिल हुए थे, विर्क ऐसा करने वाले दूसरे आईपीएस अधिकारी हैं. व्यवसायी हरचरण सिंह रनौता भी कुछ हफ्ता पहले पार्टी में शामिल हुए थे.

पंजाब कांग्रेस प्रमुख और पूर्व अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू किसी समय पंजाब में बीजेपी का एक प्रमुख चेहरा थे. लेकिन उनके पार्टी छोड़कर जाने के बाद, पार्टी ‘स्टार अपील’ वाले उम्मीदवारों की तलाश में थी.

क्रिकेट में छोटा करिअर और एक घोटाला

44 वर्षीय मोंगिया ने 2001 में अपना पहला एक-दिवसीय मैच देखा था. भारत की ओर से वो कुल 57 ओडीआई और एक टेस्ट मैच खेले. ओडीआईज़ में इस खब्बू बल्लेबाज़ ने 27.95 के औसत से कुल 1,230 रन बनाए. उन्होंने अपना आख़िरी मैच बांग्लादेश के खिलाफ 12 मई 2007 को खेला. दक्षिण अफ्रीका में 2003 विश्व कप के लिए भी वो भारतीय टीम का हिस्सा थे. टीम फाइनल में पहुंची लेकिन ऑस्ट्रेलिया से हार गई.

क्रिकेट में उनके लिए यादगार क्षण वो थे, जब उन्होंने मार्च 2002 में ज़िम्बाब्वे के खिलाफ गुवाहाटी में 159 रन बनाए. विश्व कप में वो 11 मैचों में खेले लेकिन केवल छह मैचों में उन्हें बल्लेबाज़ी करने का मौक़ा मिला. मोंगिया ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पंजाब का प्रतिनिधित्व किया, जिसमें उन्होंने 121 मैच खेले और 21 शतक लगाए.

बाद में 2007 में उन्होंने अब रद्द हो चुकी इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) में हिस्सा लिया, और ‘चंडीगढ़ लायंस’ का प्रतिनिधित्व किया. लेकिन, उनके करिअर पर उस समय दाग़ लग गया, जब न्यूज़ीलैंड ओपनर लू विंसेंट ने- जो चंडीगढ़ लायंस के लिए ही खेलते थे- लंदन कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान, उन पर एक मैच फिक्स करने का आरोप लगाया. मोंगिया ने विंसेंट के आरोपों का खंडन किया था.

हालांकि मोंगिया को कथित रूप से सुबूतों के अभाव में छोड़ दिया गया, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने न तो उन पर पाबंदी लगाई, और न ही कोई आरोप लगाए. लेकिन इन आरोपों से उनके करिअर पर बुरा असर पड़ा, और बीसीसीआई ने कथित रूप से घरेलू गतिविधियों के लिए उन्हें हरी झंडी नहीं दिखाई. मोंगिया अपने रुख़ पर क़ायम रहे कि उनके खिलाफ ‘कोई सबूत नहीं थे’.

2020 में क्रिकेटर ने रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया.

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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