नई दिल्ली: मंगलवार शाम को असम के नगांव से दो बार सांसद रहे और तरुण गोगोई सरकार में पूर्व मंत्री रहे प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे को लेकर चले ज़ोरदार ड्रामे के बाद, बुधवार को बोरदोलोई ने असम के अहम चुनावों से पहले औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल हो गए.
बोरदोलोई ने मंगलवार शाम को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना इस्तीफा सौंपा था. वह असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और BJP असम के प्रमुख दिलीप सैकिया की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हुए.
नगांव से लोकसभा सांसद ने कांग्रेस नेतृत्व पर उन्हें किनारे करने का आरोप लगाया था और असम कांग्रेस के प्रमुख गौरव गोगोई पर भी निशाना साधा था.
मंगलवार देर रात मीडिया को संबोधित करते हुए बोरदोलोई ने कहा: “आज, मैंने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक को छोड़ दिया है, और मैं इससे खुश नहीं हूं. हालांकि, मैंने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि कांग्रेस पार्टी के भीतर से, खासकर असम कांग्रेस में, जो भी मुझसे मिलता था, वह कई मुद्दों पर मेरा अपमान कर रहा था. यहां तक कि कांग्रेस नेतृत्व भी मेरे प्रति कोई सहानुभूति नहीं दिखा रहा था.”
उन्होंने आगे कहा, “मैं बहुत अकेला महसूस कर रहा हूं क्योंकि मैं पूरी ज़िंदगी कांग्रेस से जुड़ा रहा हूं. लेकिन हाल के दिनों में, मुझे वहां टिके रहने में बहुत मुश्किल हो रही थी, इसलिए मुझे यह फैसला लेना पड़ा. हां, मैंने अपना इस्तीफा AICC अध्यक्ष को सौंप दिया है.”
बोरदोलोई के शामिल होने की पुष्टि करते हुए सरमा ने कहा, “आदरणीय मोदी जी के भारत के लिए विज़न से प्रेरित होकर, नगांव से माननीय सांसद और अन्य गणमान्य व्यक्ति आज हमारे बीजेपी परिवार में शामिल हुए हैं.”
इससे पहले दिन में, बोरदोलोई के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इसे “बहुत दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और कहा कि यह टिकट बँटवारे से जुड़ा मामला था.
“मुझे लगता है कि वह एक टिकट के बंटवारे को लेकर नाराज़ थे, और हमारी इच्छा थी कि हमें इस बारे में उनसे बातचीत करने का मौका मिलता,” उन्होंने मीडिया से कहा.
इससे पहले गौरव गोगोई ने कहा था कि उन्होंने कांग्रेस महासचिव जितेंद्र सिंह के साथ मिलकर बोरदोलोई से मुलाकात की थी, ताकि आने वाले चुनावों की तैयारियों पर चर्चा की जा सके. जैसे-जैसे मंगलवार और बुधवार को यह ड्रामा चलता रहा, कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि खासकर चुनावों से पहले, इस तरह की भ्रम की स्थिति को खत्म करने की ज़रूरत है. “असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने कहा कि उन्होंने इस्तीफ़ा नहीं दिया है. अभी असमंजस की स्थिति है. मैं असम कांग्रेस के नेताओं से अपील करता हूं कि चुनाव का समय पार्टी के साथ खड़े होने का समय होता है. मतभेदों को सुलझाने का सबसे अच्छा तरीका बातचीत है. मुझे उम्मीद है कि सब ठीक हो जाएगा,” उन्होंने बोरदोलोई के BJP में शामिल होने से कुछ घंटे पहले कहा.
बोरदोलोई के अलावा, नवज्योति तालुकदार ने भी असम कांग्रेस के उपाध्यक्ष पद से, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य के तौर पर, और कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया. मीडिया से बात करते हुए, तालुकदार ने सरमा को एक “गतिशील” नेता बताया. “आज, हमारे सांसद प्रद्युत बोरदोलोई बीजेपी में शामिल हो रहे हैं. असम के मुख्यमंत्री, हिमंत बिस्वा सरमा, एक बहुत ही गतिशील नेता हैं. हमने असम के मुख्यमंत्री से बात की है,” उन्होंने कहा.
मंगलवार को राज्य में राजनीतिक माहौल और तेज़ हो गया, जब कांग्रेस सांसद और असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि सीएम सरमा एक “सुनियोजित मीडिया नैरेटिव” के ज़रिए बोरदोलोई की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं.
मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए, असम कांग्रेस प्रमुख ने आरोप लगाया कि बोरदोलोई के इस्तीफे की खबरें असम चुनावों से पहले कांग्रेस को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की एक सोची-समझी कोशिश थीं. देर रात तक, गोगोई ने कहा कि इस्तीफे की ‘अफवाह’ गलत जानकारी थी.
बोरदोलोई, जिन्हें पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का करीबी माना जाता था, ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखे अपने पत्र में कहा: “आज भारी मन से, मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा देता हूं.”
कांग्रेस के लिए उनका जाना एक बड़ा झटका है, क्योंकि यह असम कांग्रेस के पूर्व प्रमुख भूपेन कुमार बोराह के इस्तीफे के कुछ महीनों बाद हुआ है, जो पिछले महीने बीजेपी में शामिल हो गए थे. बोराह ने राज्य नेतृत्व के साथ मतभेदों के चलते पार्टी छोड़ी थी और गोगोई के कामकाज पर भी सवाल उठाए थे.
बोरदोलोई के जाने से, कांग्रेस ने असम से अपने तीन लोकसभा सांसदों में से एक को खो दिया है. बोरदोलोई ने अतीत में 1998 से 2016 तक चार बार असम में मार्घेरिटा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है. उन्होंने 2001 और 2015 के बीच असम सरकार में मंत्री के रूप में भी कार्य किया है.
असम चुनावों से कुछ दिन पहले बोरदोलोई के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए, राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे चिंता का विषय बताया.
“यह चिंता का विषय है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं को बार-बार तोड़ा जा रहा है और भारतीय जनता पार्टी में लाया जा रहा है, यहां तक कि चुने हुए प्रतिनिधि भी पाला बदल रहे हैं,” उन्होंने मीडिया से कहा.
बोरदोलोई 1998 में एक उपचुनाव में मार्घेरिटा से असम विधानसभा के लिए चुने गए थे और 2001, 2006 और 2011 में फिर से चुने गए. वह 2019 और 2024 में लोकसभा के लिए चुने गए थे.
“मेरे लिए, टिकट मिलना जीवन-मरण का प्रश्न नहीं था. कई मुद्दे थे. मेरे लिए जो महत्वपूर्ण था, वह था अपना सिर ऊंचा रखना. कांग्रेस ने मुझे बहुत कुछ दिया है,” बोरदोलोई ने मीडिया से कहा था.
असम में विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को होंगे, और वोटों की गिनती 4 मई को होगी. बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन, कांग्रेस के नेतृत्व वाले गुट के मुकाबले खड़ा है, और बीजेपी वापसी की उम्मीद कर रही है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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