नई दिल्ली: असम बीजेपी की सोशल मीडिया यूनिट द्वारा शेयर किए गए नफ़रत और हिंसा से भरे एक वीडियो ने भारी नाराज़गी पैदा कर दी है. आलोचकों का कहना है कि विधानसभा चुनावों से पहले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की भाषा लगातार ज़्यादा तीखी और विभाजनकारी होती जा रही है.
18 सेकंड का यह क्लिप 7 फ़रवरी को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर असम भारतीय जनता पार्टी के हैंडल से पोस्ट किया गया था और बाद में हटा दिया गया. वीडियो में सरमा को प्रतीकात्मक रूप से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई पर गोली चलाते दिखाया गया. गोगोई को स्कल कैप पहने दिखाया गया था, और उनके साथ एक और व्यक्ति था जिसकी दाढ़ी में मेंहदी लगी हुई थी. ये दोनों दृश्य संकेत आमतौर पर मुस्लिम समुदाय के एक हिस्से से जोड़े जाते हैं.
नाराज़गी बढ़ने के बाद कुछ घंटों में हटाए गए इस वीडियो के अंत में सरमा काउबॉय पोशाक में मुस्कुराते हुए दिखते हैं. वीडियो में ‘कोई दया नहीं’, ‘विदेशी-मुक्त असम’, ‘वह पाकिस्तान क्यों गया?’, और ‘बांग्लादेशियों के लिए कोई दया नहीं’ जैसे कैप्शन थे.
रविवार को कांग्रेस की सोशल मीडिया प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने X पर लिखा कि सिर्फ़ वीडियो हटाना काफ़ी नहीं है. उन्होंने लिखा, “यही बीजेपी की असली पहचान है: सामूहिक हत्यारे. यह ज़हर, नफ़रत और हिंसा आप पर है, श्री मोदी. क्या अदालतें और दूसरे संस्थान सो रहे हैं?”
कांग्रेस के संगठन प्रभारी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने इस विवादित वीडियो को लेकर बीजेपी पर हमला बोला. उन्होंने कहा, “यह किसी और चीज़ का नहीं, बल्कि नरसंहार की खुली अपील है, एक ऐसा सपना जिसे यह फ़ासीवादी शासन दशकों से पालता आ रहा है.”
An official BJP handle posted a video showing the targeted, ‘point-blank’ murder of minorities. This is nothing but a call to genocide – a dream this fascist regime has harboured since decades.
This is not an innocuous video to be ignored as troll content. It is poison spread… pic.twitter.com/8mHxo4UjZV
— K C Venugopal (@kcvenugopalmp) February 8, 2026
उन्होंने X पर लिखा, “यह कोई मासूम वीडियो नहीं है जिसे ट्रोल कंटेंट कहकर नज़रअंदाज़ किया जाए. यह ज़हर ऊपर से फैलाया जा रहा है और इसके परिणाम होने चाहिए.”
सरमा लगातार गोगोई और उनकी ब्रिटिश पत्नी एलिज़ाबेथ कोलबर्न पर हमलावर रहे हैं. एलिज़ाबेथ एक ब्रिटिश नागरिक हैं. सरमा उन पर पाकिस्तानी तंत्र से कथित रिश्तों का आरोप लगाते रहे हैं. राज्य सरकार ने इस मामले में भारत के आंतरिक मामलों में कथित हस्तक्षेप की जाँच के लिए एक विशेष जांच टीम यानी SIT भी बनाई थी.
शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सरमा ने घोषणा की कि असम सरकार ने यह मामला गृह मंत्रालय यानी MHA को सौंपने का फ़ैसला किया है. उन्होंने कहा कि एक स्तर के बाद राज्य स्तर की जाँच एजेंसियों के लिए जाँच को आगे बढ़ाना संभव नहीं है, क्योंकि “इंटरपोल की मदद चाहिए”.
गोगोई का कहना है कि सरमा 2013 में पाकिस्तान की एक निजी यात्रा को ग़लत तरीके से पेश कर रहे हैं. वे अपनी पत्नी के साथ उस यात्रा पर गए थे. गोगोई का आरोप है कि ऐसा बीजेपी नेता के परिवार से जुड़े कथित भ्रष्टाचार से ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है.
कांग्रेस नेता ने सरमा के आरोपों को “बेतुका और हास्यास्पद” बताया है. उन्होंने कहा कि ये आरोप “सी-ग्रेड सिनेमा” जैसे हैं.
I pity the journalists from Delhi and Assam who had to suffer the most flop press conference of the century. This was worse than a C grade cinema. Most mindless and bogus points offered by the so called political shrewd Chief Minister. This #SuperFlop is in contrast to our…
— Gaurav Gogoi (@GauravGogoiAsm) February 8, 2026
बांग्लादेश से घुसपैठ का मुद्दा बीजेपी का प्रमुख चुनावी मुद्दा बनकर उभरा है. यह खास तौर पर असम में ज़्यादा अहम है, जहाँ इसे लंबे समय से असमिया पहचान और संस्कृति के लिए ख़तरा माना जाता रहा है. असम की बांग्लादेश के साथ 260 किलोमीटर से ज़्यादा लंबी ज़मीन और नदी वाली सीमा लगती है.
2015 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद से सरमा की तीखी बयानबाज़ी में बांग्लादेशी घुसपैठ को उन्होंने अस्तित्व का संकट बताकर पेश किया है.
पिछले महीने के अंत में सरमा ने विवादित बयान दिया था कि “मिया” लोगों के लिए मुश्किलें पैदा करने की ज़रूरत है. “मिया” शब्द असम में बंगाली भाषी मुसलमानों के लिए अपमानजनक रूप में इस्तेमाल किया जाता है. उन्होंने आर्थिक बहिष्कार को दबाव का एक तरीका बताया था.
सरमा ने कहा, “अगले 30 साल तक अगर हमें ज़िंदा रहना है तो ध्रुवीकरण की राजनीति करनी होगी. लेकिन ध्रुवीकरण हिंदू और मुसलमान के बीच नहीं है. यह असमिया और बांग्लादेशी के बीच है. हम असमिया मुसलमानों से नहीं लड़ते. हम सिर्फ़ बांग्लादेशी मुसलमानों से लड़ते हैं.”
हालांकि सार्वजनिक बयानों में सरमा असमिया मुसलमानों और बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों के बीच फर्क बताने की कोशिश करते हैं, लेकिन बीजेपी की राजनीतिक भाषा में इसका ज़्यादा असर नहीं दिखता. पार्टी के सोशल मीडिया कंटेंट में ऐसे फर्क लगभग नदारद हैं.
उदाहरण के लिए, पिछले सितंबर में असम बीजेपी ने X पर AI से बने ऐसे दृश्य पोस्ट किए थे, जिनमें एक भविष्य दिखाया गया था जहाँ मुसलमानों ने राज्य पर क़ब्ज़ा कर लिया है. वीडियो में एक बुज़ुर्ग मुसलमान खुले में मांस काटता दिखता है. सार्वजनिक जगहों पर स्कल कैप पहने पुरुष और हिजाब पहनी महिलाएं दिखाई जाती हैं. सरकारी ज़मीन पर क़ब्ज़ा भी दिखाया गया था.
उसमें गोगोई और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भी मुसलमान दिखाया गया था, जिनके पाकिस्तान से रिश्ते बताए गए थे. गोगोई को असम बीजेपी के सोशल मीडिया पोस्ट में अक्सर “पैजान” और “मियाओं” का मसीहा कहा जाता है.
कांग्रेस की असम इकाई ने बीजेपी के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. आरोप लगाया गया था कि सत्तारूढ़ पार्टी ने बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल यानी BTC चुनावों से पहले सांप्रदायिक तनाव भड़काने के लिए AI से बना वीडियो इस्तेमाल किया.
2011 की जनगणना के मुताबिक, असम की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी 34 प्रतिशत है. जनगणना के अनुसार धुबरी, गोलपारा, बारपेटा, मोरीगांव, नागांव, करीमगंज, हैलाकांडी, बोंगाईगांव और दर्रांग ज़िलों में मुसलमान बहुसंख्यक हैं.
126 सदस्यीय असम विधानसभा के चुनाव इस साल मार्च-अप्रैल में होने की संभावना है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
