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Tuesday, 26 May, 2026
होमराजनीति'केरल बंगाल नहीं': विवादों के बीच सीएम सतीशन ने केलकर की नियुक्ति का किया बचाव

‘केरल बंगाल नहीं’: विवादों के बीच सीएम सतीशन ने केलकर की नियुक्ति का किया बचाव

CEO के अपॉइंटमेंट की CPI(M) और BJP ने आलोचना की है, ठीक वैसे ही जैसे राहुल ने हाल के विधानसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल के CEO को वहां चीफ सेक्रेटरी के तौर पर अपॉइंटमेंट की आलोचना की थी.

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तिरुवनंतपुरम: विपक्ष की बढ़ती आलोचना का सामना करते हुए, केरल के नए मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने सोमवार को राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) रतन यू. केलकर को अपना सचिव बनाए जाने का बचाव किया.

मीडिया से बात करते हुए सतीशन ने पश्चिम बंगाल से की जा रही तुलना पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वहां तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के जरिए बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर राज्य के CEO पर गंभीर आरोप लगाए थे.

सतीशन ने पूछा, “क्या यहां किसी ने हमारे मुख्य चुनाव अधिकारी के खिलाफ ऐसी शिकायत की? क्या अब इस पर बोल रही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कोई शिकायत की थी? क्या CPI(M) ने की थी?” उन्होंने कहा कि केरल में चुनाव आयोग के खिलाफ सिर्फ उनके अपने दफ्तर की तरफ से शिकायतें की गई थीं, जब वह विपक्ष के नेता (LoP) थे, और वे शिकायतें चुनाव से जुड़ी थीं, व्यक्तिगत नहीं.

2003 बैच के केरल कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी केलकर को शनिवार को सतीशन का सचिव नियुक्त किया गया. इस नियुक्ति की CPI(M) और BJP ने आलोचना की. ठीक वैसे ही जैसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद वहां के CEO को मुख्य सचिव बनाए जाने की आलोचना की थी.

पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान मतदाता सूची से 90 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए थे, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोगों के बताए गए. वहां BJP के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल को बंगाल का नया मुख्य सचिव बनाया गया. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल ने इस कदम की कड़ी आलोचना की थी और कहा था कि इससे चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पार्टी के बीच करीबी रिश्ते का संकेत मिलता है.

केरल में भी विधानसभा चुनाव से पहले विवाद हुआ था, जब राजनीतिक दलों को भेजे गए चुनाव आयोग के एक आधिकारिक पत्र पर BJP की केरल इकाई की मुहर दिखाई दी थी. हालांकि बाद में आयोग ने इसे “क्लेरिकल गलती” बताया था.

इसी तरह, राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया था कि केरल में SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने का फायदा उनके राजनीतिक विरोधियों को पहुंचाने के लिए किया गया. अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, केरल में कुल मतदाताओं की संख्या पिछले आंकड़े की तुलना में लगभग 14 लाख कम हो गई.

सतीशन ने कहा कि कोई भी यह आरोप नहीं लगा सकता कि राज्य में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की जीत चुनाव आयोग की वजह से हुई. उन्होंने कहा, “क्या वही थे जिन्होंने UDF को 102 सीटें जिताईं? क्या यह कोई मजाक है? केरल में कैसी कॉमेडी चल रही है? पैनल तो पिनराई सरकार ने दिया था. उसी पैनल में से चुनाव आयोग ने उन्हें मुख्य चुनाव अधिकारी बनाया. तो क्या वे कह रहे हैं कि पिनराई सरकार ने उन्हें इसलिए पैनल में रखा था ताकि वह चुनाव में गड़बड़ी कर UDF को 102 सीटें जिता दें?”

सतीशन की प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद CPI(M) नेता एम.वी. जयराजन ने कहा कि उनकी पार्टी ने अधिकारी के खिलाफ आधिकारिक शिकायतें दी थीं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अब उसी CEO के कामों का बचाव कर रहे हैं, जिनकी SIR प्रक्रिया को लेकर वह खुद विपक्ष के नेता रहते हुए कड़ी आलोचना करते थे. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय में की जाने वाली नियुक्तियां राजनीतिक रूप से संवेदनशील फैसले होते हैं, इसलिए यह फैसला राजनीतिक रूप से उचित नहीं था.

उन्होंने कहा, “जब वह विपक्ष के नेता थे तब मुख्य चुनाव अधिकारी के खिलाफ जो आलोचनाएं उन्होंने खुद की थीं, अब उन्हें कैसे भूल सकते हैं? अगर यह व्यक्ति मुख्यमंत्री कार्यालय में आता है, तो मुख्यमंत्री को दो फायदे मिलते हैं. पहला, उस व्यक्ति को इनाम देना जिसने इस विधानसभा चुनाव में UDF को फर्जी वोट जोड़ने में मदद की. दूसरा, उसे मुख्यमंत्री कार्यालय में लाकर BJP को भी खुश किया जा सकता है.”

पूर्व BJP प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने पहले कांग्रेस पर इस नियुक्ति को लेकर “दोहरा रवैया” अपनाने और “चुनिंदा नाराजगी” दिखाने का आरोप लगाया था. सुरेंद्रन ने पूछा था, “तो राहुल जी, केरल में जो हुआ, क्या वह अभी भी ‘चोरी का इनाम’ है या अब अचानक लोकतंत्र की खूबसूरती बन गया?”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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