scorecardresearch
Monday, 27 July, 2026
होमराजनीतिराम मंदिर दान चोरी: तुरंत मिलेगी डिजिटल रसीद, गहनों का भी रखा जाएगा अलग से रिकॉर्ड

राम मंदिर दान चोरी: तुरंत मिलेगी डिजिटल रसीद, गहनों का भी रखा जाएगा अलग से रिकॉर्ड

वेबसाइट से दान करने वालों को तुरंत रसीद मिलेगी, जबकि ऑफलाइन दान करने वालों को मांगने पर रसीद दी जाएगी. गहनों के दान का भी अलग रिकॉर्ड रखा जाएगा.

Text Size:

लखनऊ: अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान चोरी के मामले के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर की दान व्यवस्था में श्रद्धालुओं का भरोसा फिर से मजबूत करने के लिए नई पारदर्शिता व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव रखा है.

ट्रस्ट ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट के जरिए दान करने वाले श्रद्धालुओं को ‘तुरंत डिजिटल रसीद’ देना शुरू कर दिया है.

भुगतान पूरा होते ही रसीद तुरंत तैयार हो जाएगी और श्रद्धालु उसे तुरंत डाउनलोड कर सकेंगे. इससे हर ऑनलाइन दान का डिजिटल रिकॉर्ड दान करने वाले के पास रहेगा. मंदिर परिसर में रखे 30 दानपात्रों में ऑफलाइन दान करने वाले श्रद्धालुओं को, अगर वे चाहें, तो रसीद दी जाएगी.

अधिकारियों का कहना है कि इसे सभी के लिए अनिवार्य नहीं बनाया गया है, क्योंकि कम रकम दान करने वाले कई श्रद्धालु रसीद नहीं लेना चाहते. यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब मंदिर परिसर से कथित तौर पर दान चोरी के मामले को लेकर ट्रस्ट की कड़ी जांच हो रही है.

दिप्रिंट को जानकारी मिली है कि नई व्यवस्था लागू करने के लिए राम मंदिर ट्रस्ट ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट के डोनेशन सेक्शन को भी अपडेट किया है. अब ऑनलाइन दान करने के लिए श्रद्धालुओं को अपना नाम, दान का उद्देश्य, PAN नंबर, दान की तारीख, दान की राशि, पता, राज्य, जिला, देश, पिन कोड, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी देनी होगी.

भुगतान पूरा होने के बाद सिस्टम अपने आप एक डिजिटल रसीद तैयार करेगा, जिसे डाउनलोड करके भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सकेगा. ट्रस्ट ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी भी जारी की है, ताकि श्रद्धालु दान से जुड़ी किसी भी समस्या या सहायता के लिए आसानी से संपर्क कर सकें.

शिकायतों की वजह से यह सुधार हुआ

ट्रस्ट के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, यह फैसला दान चोरी के विवाद और कई भक्तों की शिकायत के बाद लिया गया कि उन्हें रसीदें तुरंत नहीं मिलीं.

एक और बड़े बदलाव में, मंदिर में दान की गई ज्वेलरी या दूसरी कीमती चीज़ों को भी ज़रूरी तौर पर रिकॉर्ड किया जाएगा, और अगर भक्त मांगते हैं तो उन्हें रसीद दी जाएगी. पहले, इस तरह के स्ट्रक्चर्ड डॉक्यूमेंटेशन सिस्टम का एक जैसा पालन नहीं किया जाता था.

एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “कीमती चढ़ावे को लेकर चिंताओं को दूर करने के लिए, ट्रस्ट ने एक नया डॉक्यूमेंटेशन सिस्टम भी शुरू किया है, जिसके तहत डोनर का नाम, पता और ज्वेलरी की डिटेल्स, जिसमें उसका टाइप और डिस्क्रिप्शन शामिल है, रसीद जारी करने से पहले तय स्टाफ द्वारा तुरंत रिकॉर्ड की जाएंगी.”

ट्रस्ट के अधिकारियों का मानना ​​है कि नए सिस्टम से ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी, लोगों का भरोसा वापस आएगा और भविष्य में दान के रिकॉर्ड का वेरिफिकेशन बहुत आसान हो जाएगा.

ट्रस्ट के सूत्रों ने कहा कि ये सुधार दान चोरी मामले के बाद फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी को बेहतर बनाने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा हैं. उम्मीद है कि ट्रस्ट अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर मिले दान, हुई इनकम और हुए खर्च के बारे में पूरी जानकारी रेगुलर पब्लिश करेगा.

ट्रस्ट अधिकारियों के मुताबिक, नए तरीकों का मकसद भविष्य में फाइनेंशियल झगड़ों की संभावना को कम करना और दान को संभालने में जवाबदेही को मजबूत करना है.

गहनों के दान में भारी गिरावट

इस विवाद का मंदिर में दान के पैटर्न पर भी साफ असर पड़ा है.

दान की गिनती में शामिल मंदिर के एक कर्मचारी ने दिप्रिंट को बताया, “जून महीने में कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद से सोने, चांदी और ज्वैलरी के दान में भारी गिरावट आई है. पहले, जब भी दान पेटी खोली जाती थी, तो सोने और चांदी के सिक्के, गहने और करेंसी नोटों के साथ ज्वैलरी मिलना आम बात थी. हालांकि, विवाद के बाद ऐसा चढ़ावा मिलना बहुत कम हो गया है.”

कर्मचारी ने कहा, “इस घटना ने भक्तों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भगवान राम को चढ़ाया गया चढ़ावा आखिरकार सुरक्षित रहता है.”

एक अन्य कर्मचारी ने कहा कि कुछ महीने पहले तक, इमोशनल होकर भक्त दर्शन के दौरान दान पेटी में अंगूठी, चेन, झुमके, पेंडेंट, चूड़ियां, कंगन और सोने या चांदी के सिक्के चढ़ाना आम बात थी.

गिनती के दौरान, ऐसी कीमती चीज़ों को रेगुलर तौर पर करेंसी नोटों से अलग करके सुरक्षित रखा जाता था. उन्होंने कहा कि भक्त दान करना जारी रखते हैं, लेकिन चोरी का मामला सामने आने के बाद वे काफी सावधान हो गए हैं. उन्होंने आगे कहा कि पिछले एक महीने से, एक भी दानदाता थोक में कीमती गहने दान करने के लिए आगे नहीं आया है.

ट्रस्ट ने पिछले दो महीनों में मिले दान का कोई आंकड़ा आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं किया है.

इस बीच, दान चोरी मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) और पुलिस की जांच जारी है. अब तक, आठ लोगों को न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है.

हाल ही में, योगी आदित्यनाथ सरकार ने आईजी किरण एस की अध्यक्षता में एक नई एसआईटी बनाई, जिसमें डीआईजी (अयोध्या) सोमेन वर्मा और एसएसपी (अयोध्या) डॉ. गौरव ग्रोवर सदस्य हैं. पहले की एसआईटी में लखनऊ कमिश्नर विजय विश्वास पंत और स्पेशल सेक्रेटरी (फाइनेंस) नील रतन कुमार के अलावा दूसरे अधिकारी शामिल थे.

यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 13 जुलाई की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को एक सीनियर आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में एक नई एसआईटी बनाने का निर्देश देने के बाद उठाया गया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

share & View comments