scorecardresearch
Saturday, 11 April, 2026
होमराजनीतिहुमायूं कबीर के वीडियो से बंगाल चुनाव से पहले गठबंधन को झटका, 'बाबरी मस्जिद' पर भी उठे सवाल

हुमायूं कबीर के वीडियो से बंगाल चुनाव से पहले गठबंधन को झटका, ‘बाबरी मस्जिद’ पर भी उठे सवाल

एक वायरल क्लिप में पूर्व TMC विधायक हुमायूं कबीर यह कहते हुए दिखाई दिए कि BJP के साथ उनकी 1,000 करोड़ रुपये की डील हुई है. इस क्लिप के सामने आने के बाद AIMIM ने उनकी पार्टी के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया है.

Text Size:

मुर्शिदाबाद: तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक हुमायूं कबीर का एक कथित वीडियो सामने आया है, जिसमें वह कहते दिख रहे हैं कि भाजपा ने ममता बनर्जी को हराने के लिए उनसे 1000 करोड़ रुपये की डील की है और वह पश्चिम बंगाल में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में हैं. इस वीडियो के सामने आने से राज्य में चुनाव से सिर्फ 11 दिन पहले राजनीतिक बवाल मच गया है.

विवाद के बाद, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने, जिसने चुनाव से पहले कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ गठबंधन किया था, उससे अलग होने का फैसला कर लिया. इन घटनाओं ने न सिर्फ कबीर के राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया है बल्कि मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बन रही मस्जिद के भविष्य पर भी असर डाला है.

कबीर को दिसंबर 2025 में तृणमूल कांग्रेस से निकाल दिया गया था, जब उन्होंने घोषणा की थी कि वह मुस्लिम समुदाय से चंदा जुटाकर अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक मस्जिद बनाएंगे. इससे समुदाय में काफी चर्चा हुई थी.

मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बन रही बाबरी मस्जिद-शैली की मस्जिद पर चारदीवारी का काम शुरू हो गया है | मौसमी दास गुप्ता | दिप्रिंट

इसके एक महीने बाद, कबीर ने आम जनता उन्नयन पार्टी बनाई और घोषणा की कि उनकी पार्टी आने वाले विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेगी. ओवैसी के साथ गठबंधन बनने के बाद पार्टी को मजबूती मिली और दोनों पार्टियों ने 294 में से 192 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया. लेकिन वीडियो लीक के बाद यह व्यवस्था अब बिखर गई है.

एजूप-एआईएमआईएम गठबंधन ने खुद को बंगाल के मुसलमानों के लिए एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच के रूप में पेश किया था, जो 2011 में 34 साल के वाम शासन के खत्म होने के बाद ज्यादातर तृणमूल कांग्रेस और कुछ हद तक कांग्रेस की ओर चले गए थे. इस गठबंधन में बंगाल में मुस्लिम वोटों को बांटने की क्षमता थी.

बाबरी मस्जिद समिति का कार्यालय, बेलडांगा, मुर्शिदाबाद में मस्जिद स्थल के पास | मौसमी दास गुप्ता | दिप्रिंट

बाबरी मस्जिद का वादा

कबीर की बाबरी मस्जिद बनाने की घोषणा ने राज्य में दिलचस्पी पैदा कर दी है, जहां मुस्लिम आबादी करीब 27 प्रतिशत है.

उन्होंने पिछले हफ्ते द प्रिंट को मुर्शिदाबाद में बताया कि मस्जिद बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है. इस परियोजना को पूरा करने के लिए बनाए गए ट्रस्ट, वेस्ट बंगाल इस्लामिक फाउंडेशन ऑफ इंडिया, ने बेलडांगा में करीब 8 एकड़ निजी जमीन 13 करोड़ रुपये में खरीद ली है.

कबीर ने कहा कि पूरी मस्जिद बनाने की लागत करीब 86 करोड़ रुपये होगी.

मौके पर ‘बाबरी मस्जिद’ लिखे बोर्ड लगाए गए हैं. तैयारी का काम शुरू हो चुका है. जहां मस्जिद बनेगी वहां जमीन की खुदाई हो चुकी है और बाउंड्री वॉल बनाई जा रही है. रोजमर्रा के काम की देखरेख के लिए एक बाबरी मस्जिद कमेटी बनाई गई है. मस्जिद स्थल पर कमेटी का एक ऑफिस भी है.

कबीर ने कहा, “हम 2030 तक मस्जिद को पूरा करने की योजना बना रहे हैं. फिलहाल आचार संहिता के कारण हमने निर्माण कार्य रोक दिया है. 4 मई के बाद काम फिर से शुरू होगा. अभी तक जो भी काम हुआ है वह जनता के दान से हुआ है.”

मोनिरुल कबिराज, जो पड़ोसी नादिया जिले से मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में मस्जिद स्थल का दौरा करने आए थे | मौसमी दास गुप्ता | दिप्रिंट

मस्जिद का स्थल समुदाय के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है, जहां हर दिन बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. वहां एक टेंट लगाया गया है और हर दिन करीब 50 से 100 लोग, सिर्फ आसपास के जिलों से ही नहीं बल्कि असम जैसे राज्यों से भी, काम देखने के लिए आते हैं. वहां कई खाने के स्टॉल भी लग गए हैं और अच्छा कारोबार कर रहे हैं. पिछले हफ्ते जब दिप्रिंट वहां शाम को पहुंचा, तब करीब 100 लोग मौजूद थे.

नदिया जिले के रहने वाले मोनिरुल कबीराज भी वहां आए थे. वह अपने परिवार के साथ मस्जिद का स्थल देखने आए थे. “बाबरी मस्जिद हमारे लिए आस्था का विषय है. मैंने अपने दोस्तों से इसके बारे में सुना था. इसलिए मैं अपने परिवार के साथ यहां देखने आया.”

मुर्शिदाबाद के खड़ग्राम गांव के रहने वाले अमीनुल इस्लाम भी वहां आए थे. उन्होंने कहा कि वह एक शादी में बेलडांगा आए थे और इसी मौके पर मस्जिद का स्थल देखने आ गए.

कबीर ने दिप्रिंट को बताया कि वह आगे चलकर मस्जिद के पास 19 एकड़ जमीन और खरीदेंगे और वहां 500 बेड का अस्पताल और मुस्लिम समुदाय के लिए अन्य सुविधाएं बनाएंगे. “पूरी परियोजना की लागत करीब 500 करोड़ रुपये होगी. मस्जिद की तरह ही यह सब भी जनता के दान से बनाया जाएगा.”

लेकिन शुक्रवार की घटना के बाद अब इस परियोजना के भविष्य पर भी सवाल उठ गया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: नेपाल में बालेन की लहर कायम, क्या देश को मिलेगा अब तक का सबसे युवा प्रधानमंत्री


 

share & View comments