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Sunday, 8 February, 2026
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पत्नी को कांग्रेस से निकाले जाने के बाद नवजोत सिद्धू के सामने राजनीतिक असमंजस, भविष्य पर सवाल

नवजोत कौर सिद्धू शुक्रवार को पार्टी से निकाले जाने तक कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ लगातार हमला बोल रही थीं.

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नई दिल्ली: कांग्रेस से उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नवजोत कौर सिद्धू को निष्कासित किए जाने के बाद, क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू पार्टी में एक असहज स्थिति में फंस गए हैं.

नवजोत कौर सिद्धू, जो लंबे समय से कांग्रेस हाईकमान पर हमलावर थीं, ने राहुल गांधी को ‘पप्पू’ कहा. इसके एक दिन बाद ही पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया.

उन्होंने पोस्ट किया, “पप्पू ने आखिरकार अपने नाम पर मुहर लगा दी है. एक ऐसा नेता, जो खुद को ही एकमात्र ईमानदार और समझदार व्यक्ति मानता है, और जमीनी हकीकत से पूरी तरह अनजान है. उसके भीतर के करीबी लोग उसे अलग-थलग रखकर खुद ऐश की जिंदगी जीते हैं और उसके कोई फैसला लेने से बहुत पहले टिकट बेच देते हैं. वह किसी आपात कॉल पर प्रतिक्रिया देने में छह महीने से ज्यादा लगा देता है, तब तक नुकसान होना तय हो जाता है.”

करीब एक महीने तक कांग्रेस नेतृत्व के साथ तीखे टकराव के बाद, शुक्रवार को पार्टी ने नवजोत कौर सिद्धू की सदस्यता खत्म कर दी. यह टकराव राज्य अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग से लेकर पार्टी प्रमुख राहुल गांधी तक चला.

अब कांग्रेस में सिद्धू का भविष्य अनिश्चित नजर आ रहा है. पार्टी में बने रहने की उनकी संभावना लगातार कमजोर होती दिख रही है.

संपर्क करने पर, वारिंग ने दिप्रिंट से कहा कि इसका जवाब केवल पार्टी हाईकमान ही दे सकता है.

पिछले हफ्ते, जब नवजोत कौर सिद्धू ने वारिंग पर हमला करते हुए उन्हें सबसे भयावह, अक्षम और भ्रष्ट अध्यक्ष कहा था, तब वारिंग ने सुझाव दिया था कि उन्हें इलाज कराना चाहिए.

इसके जवाब में उन्होंने कहा, “राजा वारिंग, इलाज की जरूरत आपको है. मैं डॉक्टर हूं और जानती हूं कि आप मानसिक रूप से अस्थिर हैं.”

पंजाब में सिद्धू की स्थिति पार्टी के भीतर कभी भी सहज नहीं रही है. कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे सिद्धू, 2022 विधानसभा चुनावों से पहले कुछ समय के लिए राज्य कांग्रेस अध्यक्ष भी रहे. चुनावों में कांग्रेस की करारी हार के बाद पद से हटाए जाने के बाद से न तो उन्होंने राज्य नेतृत्व से सुलह की और न ही हाईकमान से सार्वजनिक तौर पर दूरी बनाई, जहां से उन्हें अपनी अधिकतर राजनीतिक ताकत मिलती रही है.

अब, पत्नी के खुले तौर पर राहुल गांधी पर हमले के बाद, पार्टी के भीतर सिद्धू की राजनीतिक हैसियत काफी कमजोर हो गई है.

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने दिप्रिंट से कहा कि कांग्रेस में सिद्धुओं का अध्याय “खत्म” होता दिख रहा है. एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “नवजोत सिंह सिद्धू ने कांग्रेस के खिलाफ अपनी पत्नी के तीखे सार्वजनिक बयानों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. इसका सीधा मतलब है कि वह पूरी तरह उनके समर्थन में हैं.”

पिछले महीने कांग्रेस पर हमले के दौरान, नवजोत कौर सिद्धू ने एक बड़ा आरोप लगाया था. उन्होंने कहा, “पंजाब में मुख्यमंत्री बनने के लिए 500 करोड़ रुपये से भरा एक अटैची देना पड़ता है.”

उन्होंने यह भी कहा कि सिद्धू कांग्रेस के लिए सक्रिय राजनीति में तभी लौटेंगे, जब पार्टी उन्हें राज्य में मुख्यमंत्री का चेहरा बनाएगी. पार्टी के भीतर गुटबाजी पर अफसोस जताते हुए उन्होंने कहा कि “पहले से ही पांच मुख्यमंत्री (चेहरे) हैं, जो पार्टी को हराने में लगे हुए हैं.”

सिद्धू परिवार के करीबी सहयोगियों ने दिप्रिंट से कहा कि कांग्रेस में सिद्धू के बने रहने की संभावना लगभग न के बराबर है. एक सहयोगी ने कहा, “उन्हें शीर्ष पद के अलावा कोई भूमिका लेने में दिलचस्पी नहीं है. वह कई सालों के टीवी कॉन्ट्रैक्ट में बंधे हैं, जिन्हें वह छोड़ नहीं सकते. इसका मतलब है कि वह सक्रिय राजनीति से दूर ही रहना चाहते हैं.”

पार्टी के भीतर निजी तौर पर यह भी माना जा रहा है कि सिद्धू आखिरकार कांग्रेस छोड़ सकते हैं, क्योंकि कोई भी उन्हें मुख्य फैसले लेने वाले नेता या मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में आगे बढ़ाने को तैयार नहीं है.

डीएवी कॉलेज, सेक्टर 10, चंडीगढ़ के राजनीति विज्ञान विभाग की डॉ. कंवलप्रीत कौर ने कहा, “पंजाब कांग्रेस नेतृत्व भी सिद्धू की सक्रिय राजनीति में वापसी को लेकर ज्यादा उत्साह नहीं दिखा रहा है. वह टूटते गुट को समायोजित करने के बजाय राज्य इकाई के तहत एकता दिखाने को प्राथमिकता दे रहा है. 2022 में अमृतसर ईस्ट से आप की जीवन ज्योत कौर के हाथों विधानसभा सीट हारने के बाद से सिद्धू अग्रिम पंक्ति की चुनावी राजनीति से काफी हद तक दूर रहे हैं. यह हार उनकी कमजोर होती जमीनी पकड़ का प्रतीक थी.”

कांग्रेस के खिलाफ खुले विद्रोह के अलावा, नवजोत कौर सिद्धू भाजपा के करीब जाती दिख रही हैं. वह सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों की तारीफ कर रही हैं.

देखा जाए तो अभी भी कांग्रेस में रहते हुए, पत्नी के भाजपा के पक्ष में साफ रुख लेने के बाद सिद्धू का राजनीतिक भविष्य और ज्यादा अनिश्चित हो गया है.

इस महीने केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पंजाब दौरे की संभावना के बीच, नवजोत कौर सिद्धू के भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं.

डॉ. कंवलप्रीत ने कहा, “ज्यादा अहम सवाल यह है कि क्या भाजपा भी मिस्टर सिद्धू को साथ लेने के लिए तैयार है या नहीं. सिद्धू अब भी भावनात्मक अपील वाले पहचाने हुए नेता हैं, लेकिन फिलहाल उनके पास कोई साफ चुनावी आधार नहीं है.”

अगले विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक साल बाकी है. पार्टी में मजबूत स्थिति न होने और संस्थागत समर्थन लगभग असंभव दिखने के कारण, सिद्धू सक्रिय राजनीति से बाहर की ओर देखते नजर आ रहे हैं.

पूर्व में पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के समाजशास्त्र विभाग से जुड़े प्रोफेसर मनजीत सिंह ने कहा, “भाजपा पंजाब में अपना दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रही है. अगर सिद्धू को साफ मंच और संगठनात्मक समर्थन मिले, तो उनकी मौजूदगी अब भी ध्यान खींच सकती है. उनकी जनप्रियता, पहचान और मीडिया कवरेज को देखते हुए भाजपा उन्हें एक उपयोगी चेहरा मान सकती है. लेकिन असली सवाल यह है कि क्या वह पंजाब में वोट दिला सकते हैं.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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