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Monday, 30 March, 2026
होममत-विमतक्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट की तरह है ट्रांस अमेंडमेंट बिल: यह हिंसक परिवार में रहने के लिए मजबूर करता है

क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट की तरह है ट्रांस अमेंडमेंट बिल: यह हिंसक परिवार में रहने के लिए मजबूर करता है

एक चीज़ जो ट्रांस की खूबसूरती को ज़िंदा रखती है, वह है उनका समुदाय और अपनापन. लेकिन कानून बनाने वालों की नजर में, यह अपनापन ‘धोखा’, ‘लुभाना’ और ‘गलत असर डालना’ बन जाता है.

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ट्रांस लोग अपने बच्चों को खुद जन्म नहीं देते. वे उन पराए लोगों को आसरा देकर अपना समुदाय बनाते हैं, जो उनकी तरह सेक्स के नियमों का उल्लंघन करते हैं. सेक्स समाज में नियंत्रण करने और वंश को आगे बढ़ाने का माध्यम है, जाति और पितृसत्ता का गढ़ है. ट्रांसजेंडर्स ने इस नियंत्रण को नकार दिया है. उन्होंने उन नामों और किस्मत को छोड़ने की हिम्मत की है, जिनमें उन्हें जन्म से ही कैद किया जाता.

इस गढ़ को छोड़ने पर अक्सर परिवारों से उन्हें हिंसा मिलती है. जब भी कोई ट्रांस व्यक्ति सेक्स के नियमों के खिलाफ जाता है, तो उस पर निगरानी की जाती है और अक्सर उसे हेट्रोसेक्सुअल परिवार की सेवा में खुद को खत्म करने के लिए मजबूर किया जाता है.

ट्रांस लोगों के ये अलैहदा कदम सभी तरह की ‘अलग पहचान’ को एक ही छत्र के नीचे जोड़ते हैं. हिजड़ा, किन्नर, जोगती, ट्रांस पुरुष, एनबी, शिवशक्ति, कोती, जीएनसी, अरवानी, थिरुनंगई, नुपा मानबा, इंटरसेक्स (और भी कई हैं) ये विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक समुदाय हैं या ट्रांस लोगों के ढीले समूह हैं, जो एक साथ आते हैं, दोस्ती करते हैं और एक शत्रुतापूर्ण दुनिया में जीवित रहते हैं, जो केवल पारिवारिक जीवन के लिए बनाई गई है. ये रिश्ते, मार्जिनलाइजेशन के बावजूद जीने की चाह से बनते हैं.

चाहे वह हिजड़ा घराने हों जो शादी में बधाई लेने जाते हैं, ट्रांस पुरुष जो बॉडीबिल्डर बनते हैं, कोती जो झांकियों में नाचते हैं, नुपा मानबा जिन्होंने फुटबॉल टीम बनाई, या वे ट्रांस लोग जो स्ट्रीट रील बनाते हैं, ये सभी मिलकर अपने जेंडर के फैंटेसी को निभाते हैं, जो हेट्रोसेक्सुअल दुनिया से मेल भी खाता है और विरोध भी करता है. कई लोग ये पेशा नहीं अपनाते, लेकिन फिर भी उन लोगों के साथ रहते हैं जिन्हें वे अपना कहते हैं, प्यार और जरूरत से बंधे, क्योंकि अक्सर कहीं और जाने की जगह नहीं होती.

इन तरीकों से ट्रांसजेंडर लोग हेट्रोसेक्सुअल परिवारों के नियमों से परे और उसके खिलाफ जीने के वैकल्पिक तरीके बनाते हैं. भले ही वे इन कई अलग-अलग नामों से संबंधित हों, लेकिन जो एक चीज ट्रांस की अल्हड़ खूबसूरती को जीवित रखती है, वह है उनके रिश्ते और ‘अलग होने’ की उनकी साहसी पेशकश.

ट्रांसजेंडर पर्सन्स (राइट्स की सुरक्षा) अमेंडमेंट बिल, 2026 में, विधायकों ने इन रिश्तों को ‘धोखा’, ‘लुभाव’ और ‘अनुचित प्रभाव’ के रूप में पढ़ा, और इसे 10 साल तक कठोर कारावास की सजा वाला अपराध बना दिया. बिल की कल्पना में, किसी को ट्रांस बनाना—जो भी इसका मतलब हो—सजा योग्य कृत्य और पाप है.

ट्रांस समुदायों के खिलाफ फरमान

बिल के शुरुआती सेक्शन यह तय करते हैं कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति कौन होना चाहिए. अपराध और सजा वाले सेक्शन उससे ज़्यादा व्यापक परिभाषा अपनाते है ताकि अपराध बनाया जा सके. कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त ट्रांसजेंडर लोग केवल “किन्नर, हिजड़ा, अरवानी, या जोगता, और जन्म के समय भिन्नताएं रखने वाला व्यक्ति” हैं. ये परिभाषाएं इतनी व्यापक हैं कि उन लोगों को भी शामिल कर सकती हैं जो “बाहर से खुद को ट्रांसजेंडर व्यक्ति के रूप में पेश करते हैं.”

साड़ी, चेस्ट बाइंडर, हार्मोन, लिपस्टिक, सर्जरी—ये सब संकेत हैं. सरकार के लिए, जो लोग अपनी निर्धारित सेक्स से स्पष्ट रूप से भटकते हैं, वे खतरनाक हैं और उनके सुरक्षित ठिकानों को नष्ट और खत्म किया जाना चाहिए.

श्रेणियों के बीच सभी उलझनों के बावजूद, यह बिल सभी ट्रांस लोगों के समुदायों के खिलाफ एक तोप है—उन नए ट्रांस लोगों के जन्म पर जो जाति और वंश आगे नहीं बढ़ाते. यह दावा करता है कि यह ‘सच्चे’ उत्पीड़ित ट्रांस आबादी की मदद करता है, लेकिन वास्तव में यह उनके जाति या समुदाय के समाप्त होने का फरमान है.

यह 1871 के क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट की साफ झलक है, जिसे ब्रिटिश शासकों ने लागू किया था, स्पष्ट लक्ष्य के साथ “नपुंसकों की संख्या कम करना” और “धीरे-धीरे उनका विलुप्त होना”. क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट ने नपुंसकों का रजिस्टर बनाया और ‘नपुंसक’ की परिभाषा मेडिकल जांच में स्थापित की. इस समानता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

जहां ट्रांस लोग आश्रय पाते हैं और नए जीवन का जन्म लेते हैं, वही सबसे पहले हमले की लाइन में हैं. बिल के तहत ट्रांस परिवारों या घरानों को अपराध बनाने का आरोप यह है कि ये हिंसक जगहें हैं, जहां जबरदस्ती होती है, और फिर भी बिल में उन ट्रांस लोगों के लिए कोई सुरक्षा नहीं है जो बिल्कुल अकेले हैं. उन्हें एक घराना होना चाहिए, रीतियों के लिए भीख मांगनी चाहिए, तभी उन्हें मान्यता मिलेगी.

बिल कोई आरक्षण, शिक्षा, मेडिकल सहायता या आवास नहीं देता. शोधकर्ता वैवब दास ने 2024 में लिखा कि NALSA फैसले के एक दशक से अधिक समय बाद भी, सामाजिक समानता की दिशा में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की डिलीवरी में कोई प्रगति नहीं हुई है. संशोधन बिल में लाभों का खोखला वादा केवल और अधिक ट्रांस लोगों को निगरानी रजिस्टर में डालने के लिए उठाया गया है.

जिसे वे परिवार कहते हैं, वह हिंसक हैं

स्पष्ट रूप से, परिवार की संस्था को छोड़ना अस्वीकार्य बना दिया जा रहा है. परिवार राज्य नियंत्रण की सबसे छोटी इकाई के रूप में काम करता है. यह इस बात में स्पष्ट है कि जब नेशनल काउंसिल फॉर ट्रांसपर्सन्स (NCPT) के सदस्यों को मंत्रालय ऑफ सोशल जस्टिस ने अचानक बातचीत के लिए बुलाया—बिल पहले ही संसद में पेश हो चुका था—तो सिविल सर्वेंट योगिता स्वरूप ने कैसे जवाब दिया.

जब NCTP सदस्य कल्कि सुब्रमण्यम ने यह चिंता उठाई कि कई ट्रांस लोग अपने परिवार से उत्पीड़न झेलते हैं और यहां तक कि मारे भी जाते हैं, तो स्वरूप ने कहा कि ट्रांस लोगों को अपने माता-पिता के साथ ही रहना चाहिए. स्वरूप ने कहा कि अधिकारी “कभी भी माता-पिता को सजा नहीं देंगे”, इस तरह घर की हिंसा को मिटा दिया और उसे वैधता भी दी.

दलित बहुजन आदिवासी ट्रांस क्वीर (DBATQ) पैंथर्स नेशनल नेटवर्क द्वारा जारी बयान इस सवाल को और बढ़ाता है. यह राज्य की जाति-परिवार से जुड़ाव की जरूरत को उन हाल की कानूनों के अनुरूप रखता है जो अंतरधर्म और अंतरजाति संबंधों को सजा देते हैं. संरचनात्मक असमानताओं का अतिरिक्त बोझ और परिवार-केंद्रित कानूनों की दोहरी मार, दलित और मुस्लिम ट्रांस और क्वीर जोड़ों को जीवित रहने और समुदाय बनाने के प्रयास में और असुरक्षित बना देती है.

ट्रांस लोग अपने बच्चों को खुद जन्म नहीं देते. लेकिन सबसे पितृसत्तात्मक परिवारों में, अत्याचारी पिता की लोहे की मुट्ठी के नीचे, नए विद्रोह हमेशा जन्म लेते हैं. हमेशा लोग होंगे जो उन नियमों को मानने से इंकार करते हैं, जो उन पर थोपे गए हैं, जो खुद की नयी कल्पना करते हैं, जो घर छोड़ जाते हैं. ट्रांसजेंडर हर जगह होंगे, जहां भी आपकी नज़र पड़े.

आदित्य विक्रम एक स्कॉलर, राइटर और ट्रांसलेटर हैं. वे अशोका यूनिवर्सिटी में क्रिटिकल थिंकिंग का कोर्स पढ़ाते हैं. उनका X हैंडल @AdityaVShri है. विचार निजी हैं.

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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