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Friday, 20 February, 2026
होममत-विमतPM बनते ही तारिक रहमान का संदेश: व्यापारियों, भ्रष्टाचार और अपनी पार्टी को दी 3 बड़ी चेतावनी

PM बनते ही तारिक रहमान का संदेश: व्यापारियों, भ्रष्टाचार और अपनी पार्टी को दी 3 बड़ी चेतावनी

अपने चुनाव से पहले के वादे—‘मेरे पास एक योजना है’—को दोहराते हुए तारिक रहमान ने कहा कि उन्होंने सभी को शामिल करने वाली रणनीतियों पर काम शुरू कर दिया है और उन्हें उम्मीद है कि लोग इस सफर में उनका साथ देंगे.

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17 साल के आत्म-निर्वासन के बाद, जब तारिक रहमान 25 दिसंबर को बांग्लादेश पहुंचे, तो यह कई लोगों के लिए बांग्लादेश की चुनावी राजनीति में एक बड़ा बदलाव था. उन्होंने 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले ढाका शहर के बीचों-बीच एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया. रहमान ने उम्मीद की बात की और विश्वास बनाए रखने, व्यवस्था लाने और देश में शांति सुनिश्चित करने का वादा किया, लेकिन जिसने कई लोगों का ध्यान खींचा, वह था बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के अध्यक्ष का यह वादा—“मेरे पास अपने देश के लोगों के लिए एक योजना है”—जो उन्होंने भद्रलोक अंदाज़ में कहा.

लेकिन एक ऐसे देश में, जहां शेख हसीना के खिलाफ भावनाएं थीं, कई लोगों को उम्मीद थी कि फैसला बंटा हुआ होगा और जमात-ए-इस्लामी, नेशनल सिटिजंस पार्टी के साथ गठबंधन में, धार्मिक भावनाओं और जुलाई आंदोलन की भावना से फायदा उठा सकती थी, लेकिन इन अनुमानों के विपरीत, अंतिम फैसला बीएनपी के पक्ष में गया. पार्टी को चुनाव में ऐतिहासिक और बड़ी जीत मिली.

प्रधानमंत्री के रूप में रमज़ान की पूर्व संध्या पर देश को दिए अपने पहले संबोधन में तीन बातें थीं—चेतावनी, सभी को साथ लेकर चलने की बात और नए बांग्लादेश के विकास की उम्मीद.


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चेतावनियां

करीब 10 मिनट के अपने संबोधन में, शांत दिख रहे तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री कार्यालय से बोलते हुए कहा कि समाज में किसी भी अपराधी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और कानून-व्यवस्था में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि “किसी भी पार्टी या राजनीतिक दबाव या ताकत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कानून का राज ही देश चलाने का अंतिम आधार होगा.”

संविधान को ही एकमात्र नियम बताते हुए, प्रधानमंत्री रहमान की पहली चेतावनी व्यापारियों और कारोबारियों के लिए थी. उन्होंने उनसे कहा कि वे पवित्र महीने की गरिमा बनाए रखें और कीमत बढ़ाकर “उपभोक्ताओं का शोषण न करें”—यह एक ऐसा मुद्दा है जो सीधे लोगों को प्रभावित करता है.

दूसरी चेतावनी भ्रष्टाचार और हर क्षेत्र में चल रहे सिंडिकेट के खिलाफ थी—यह उसी जुलाई आंदोलन की भावना से जुड़ा है, जिसने अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार को हटा दिया था. उन्होंने कहा, “बीएनपी सरकार हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी के सभी सिंडिकेट को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है.”

रहमान ने नए चुने गए बीएनपी सांसदों को भी चेतावनी दी कि वे टैक्स-फ्री यात्रा सेवा और सरकार द्वारा दिए गए आवासीय प्लॉट का फायदा न लें—यह वही वादा था जो उन्होंने चुनाव के दौरान लोगों से किया था. उन्होंने कहा कि चुने गए सदस्यों में पार्टी अनुशासन सरकार और पार्टी के कामकाज के लिए ज़रूरी होगा.

पिछले दशकों में भ्रष्टाचार, सत्ता के गलत इस्तेमाल और भाई-भतीजावाद के आरोपों ने बांग्लादेश को कमज़ोर किया है, जिसमें खुद रहमान पर भी आरोप लगे थे. हालांकि, 2007 में उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को राजनीतिक माना गया था, लेकिन नए प्रधानमंत्री के सामने अब बड़ी चुनौती है.

सभी को साथ लेकर चलने का तरीका

गैर-पक्षपातपूर्ण तरीका अपनाने की बात करते हुए रहमान ने कहा, “जिन लोगों ने बीएनपी को वोट दिया, जिन्होंने वोट नहीं दिया या किसी को वोट नहीं दिया—आप सभी का इस सरकार पर बराबर अधिकार है, चाहे आपकी राजनीतिक पसंद, विचारधारा या धर्म कुछ भी हो. देश सभी बांग्लादेशियों का है और हर नागरिक के बराबर अधिकार हैं.”

प्रधानमंत्री रहमान का यह भरोसा एक सकारात्मक शुरुआत माना जाएगा. खासकर मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के 1.5 साल के दौरान हुई हिंसा और भीड़तंत्र की घटनाओं के बाद, खासकर हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ. हाल के चुनाव में अल्पसंख्यकों ने किसे वोट दिया, इसका साफ डेटा नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि बीएनपी को उनका समर्थन मिला—जो पहले आवामी लीग को मिलता था.

सभी को साथ लेकर चलने का मतलब भारत के साथ संबंध सुधारना भी हो सकता है. यूनुस सरकार के दौरान भारत ने कई बार हिंदू अल्पसंख्यकों पर हिंसा का मुद्दा उठाया था, लेकिन यूनुस सरकार इसे नकारती रही, जिससे दोनों देशों के संबंध बहुत खराब हो गए.

रहमान का यह भरोसा नरेंद्र मोदी के बधाई संदेश से भी मेल खाता है, जिसमें उन्होंने कहा था, “भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा.”

उम्मीदें

हालांकि, रहमान की चेतावनियों का मकसद एक व्यवस्थित बांग्लादेश बनाना था, लेकिन विकास की उम्मीदें राजधानी ढाका में ट्रैफिक जाम की समस्या को हल करने से शुरू हुईं. खास बात यह है कि ढाका दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहरों में चौथे नंबर पर है, जहां हर साल जनसंख्या 2.86 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, जिससे घरों और ट्रैफिक का संकट पैदा हो गया है. प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने रेलवे, बस और फ्लाईओवर सहित पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर बनाने का वादा किया.

उन्होंने बेहतर और जागरूक शहरी योजना की दिशा में पहले कदम के रूप में लोगों को आसान पब्लिक ट्रांसपोर्ट देने का वादा किया.

इसके अलावा, जब दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हासिल करने की दौड़ में है, तो रहमान देश में बेहतर शिक्षा ढांचा देने, विज्ञान और तकनीक की शिक्षा और इनोवेशन को बढ़ावा देने और युवाओं को वैज्ञानिक अवसर देने की योजना बना रहे हैं. ऐसे कदम बांग्लादेश से शिक्षा और नौकरी के लिए होने वाले बड़े पैमाने पर पलायन की समस्या को भी कम कर सकते हैं.

अपने चुनाव से पहले के वादे—“मेरे पास एक योजना है”—को दोहराते हुए रहमान ने कहा कि उन्होंने सभी को शामिल करने वाली रणनीतियों पर काम शुरू कर दिया है और उन्हें उम्मीद है कि लोग इस सफर में उनका साथ देंगे.

“अल्लाह हम सभी को सुरक्षित और स्वस्थ रखे”—इस संदेश के साथ रहमान का प्रधानमंत्री कार्यालय से देश के नाम पहला संबोधन खत्म हुआ, जिसमें बड़ी चुनावी जीत की जिम्मेदारी साफ दिखाई देती है.

चुनौतियां इंतज़ार में

बांग्लादेश जैसे राजनीतिक रूप से सक्रिय देश में, रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती संसद में मजबूत विपक्ष से निपटना होगी, जिसका नेतृत्व जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजंस पार्टी कर रहे हैं. ये पार्टियां सरकार पर जुलाई चार्टर जनमत संग्रह को लागू करने का दबाव बनाएंगी, जिसे चुनाव के दौरान मतदाताओं ने मंजूरी दी थी.

हालांकि, संसद में ज्यादा संख्या होने से रहमान को फायदा मिलेगा, लेकिन विचारधारा से प्रेरित विपक्ष सरकार को विकास और कानून-व्यवस्था से हटाकर दूसरे मुद्दों में उलझा सकता है.

इसके अलावा, रक्षा मंत्रालय अपने पास रखकर रहमान शायद सेना को “डी-यूनुसिफाई” करने की कोशिश कर रहे हैं. यह न सिर्फ सेना और सरकार के रिश्ते सुधारने के लिए ज़रूरी होगा, बल्कि भारत और म्यांमार के साथ सीमा से जुड़े बाहरी संबंधों पर सीधा नियंत्रण रखने के लिए भी अहम होगा. इससे यह भी संकेत मिलता है कि वह देश की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सोच-समझकर योजना बना रहे हैं.

ऋषि गुप्ता ग्लोबल अफेयर्स पर कॉमेंटेटर हैं. व्यक्त किए गए विचार निजी हैं.

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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