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Thursday, 25 April, 2024
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आपके बालों के झड़ने की वजह केवल जीन्स नहीं है, वायु प्रदूषण भी आपको गंजा बना रहा है

वायु प्रदूषण बालों के झड़ने का एक प्रमुख कारक बनकर उभरा है. हमारे माता-पिता को 50 या 60 की उम्र में जो परेशानी होती है, वह अब 20 से 30 की उम्र में भी हो सकती है.

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जब सुंदरता, रूप-रंग और सबसे खास शरीर के महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा की बात आती है तो मुलायम और लचीले से दिखने वाले बाल इतने साधारण भी नहीं होते. अपने कॉस्मेटिक वैल्यू यानि सुंदरता में बढ़ोत्तरी करने की क्वालिटी के अलावा, बाल अपने मालिक के डीएनए को संरक्षित करके आपराधिक मामलों को सुलझाने में भी मदद करते हैं. कम उम्र में किसी के बालों का झड़ जाना महज़ सौंदर्य संबंधी नुकसान नहीं है बल्कि उससे कहीं अधिक यह पहचान का भी नुकसान है.

पुरुषों के हार्मोन की वजह से होने वाला सिंड्रोम एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया, बालों के रोम छिद्रों यानि फॉलिकिल्स में बालों की ग्रोथ के लिए ज़िम्मेदार प्रोटीन को खत्म कर देता है, जिससे बाल झड़ने लगते हैं. कोविड-19 के बाद, एक त्वचा विशेषज्ञ के रूप में मेरा अनुभव यह है कि पुरुषों और महिलाओं दोनों में गंजेपन का पैटर्न बढ़ा है. पुरुषों में समय से पहले बाल झड़ने के विभिन्न कारणों को तलाशने और समझने की जरूरत है.

लंबे समय तक आनुवंशिक कारकों और हाल के दिनों में वायु प्रदूषण ने पुरुषों में गंजेपन को बढ़ावा दिया है. हमारे माता-पिता को जो परेशानियां 50 या 60 की उम्र में होती थीं, वह अब 20 से 30 की उम्र में भी हो सकती है. अपने 13 वर्षों की प्रेक्टिस में, मैंने 20 और 30 वर्ष के युवाओं को बालों के झड़ने और गंजेपन का अनुभव करते देखा है. पुरुष और महिला रोगियों में इसके कारण अलग-अलग होते हैं, जिनमें तनाव, कठोर पानी, पोषक तत्वों की कमी, हार्मोनल असंतुलन और रंग, भाप, gel, तेल, इत्र और शैम्पू जैसे बाल उत्पादों का अत्यधिक उपयोग शामिल हैं. हाल ही में, प्रदूषण बालों के झड़ने का एक प्रमुख कारक बनकर उभरा है, जिससे दुनिया भर के शहरों में लोग प्रभावित हो रहे हैं.

जब प्रदूषण पुरुषों की खोपड़ी पर जमा हो जाता है, तो यह विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में डैंड्रफ और सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस जैसी समस्याओं को जन्म देता है. सिर की त्वचा पर प्रदूषण की एक परत जम जाती है, जिससे जड़ों पर भार पड़ता है और बाल झड़ने लगते हैं.

पुरुषों में बालों के झड़ने का पैटर्न किशोरावस्था के अंत या बीस के दशक की शुरुआत में शुरू हो सकता है, और 50 वर्ष की आयु तक, 30 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत पुरुष मेल एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया (एमएए) का अनुभव कर सकते हैं. इसकी पहचान धीरे-धीरे सिर के बालों के झड़ने, “एम” आकार के बनने और अंततः खोपड़ी की ऊपरी परत के गंजे होने या पतले होने से होती है. इसलिए, प्रदूषित वातावरण में नियमित जांच और उचित विटामिन और खनिज महत्वपूर्ण हैं.

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हमारे बाल एक ग्रोथ साइकिल का पालन करते हैं, जिसमें सक्रिय (Active), सुप्त (Dormant) और झड़ना (Shedding) का चरण शामिल होता है. जब विभिन्न तत्व मिलते हैं, तो वे नेचुरल ग्रोथ साइकिल को बाधित करते हैं और झड़ने लगते हैं. तो, यह केवल जीन्स के बारे में नहीं है; हमें अपनी जीवनशैली विकल्पों पर भी बारीकी से नजर डालने की जरूरत है. दिल्ली, मुंबई, झुंझुनू, बठिंडा आदि शहरों में बिगड़ती वायु गुणवत्ता बालों के झड़ने में महत्वपूर्ण योगदान देती है. एक हालिया रिपोर्ट दीवाली के दौरान अत्यधिक आतिशबाजी को PM2.5 के बढ़े हुए स्तर – 1,945 µg/m3 से जोड़ती है जो कि राष्ट्रीय सुरक्षा स्तर – 60 µg/m3 – से 33 गुना अधिक और WHO द्वारा अनुशंसित 15 µg/m3 की सुरक्षित सीमा से 132 गुना अधिक है. ऐसा माना जाता है कि ये प्रदूषण करने वाले पदार्थ हेयर शाफ्ट पर जमा होकर बीटा-कैटेनिन को कम करते हैं, जो बालों के विकास के लिए महत्वपूर्ण एक विशिष्ट प्रोटीन है.


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इसलिए, स्कैल्प की देखभाल को प्राथमिकता देना सर्वोपरि हो गया है. निम्नलिखित तरीकों को लागू करने से पुरुषों के गंजे होने के पैटर्न पर इसके प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है:

1) सप्ताह में कम से कम तीन बार हल्के शैंपू का उपयोग करके खोपड़ी की लगातार सफाई करने से जमा पोल्यूटैंट और अतिरिक्त तेल निकल जाएगा. शैंपू चुनते समय, ऐसे उत्पादों का चयन करें जिनमें प्राकृतिक तत्व शामिल हों और कठोर रसायनों से मुक्त हों. डैंड्रफ से पीड़ित लोगों को मैलासेज़िया की अत्यधिक वृद्धि को रोकने में मदद करने के लिए एंटी-फंगल कंपोनेंट वाले शैम्पू का उपयोग करना चाहिए.

2) अत्यधिक प्रदूषित वातावरण में टोपी, स्कार्फ या प्रोटेक्टिव हेडगियर पहनें.

3) पोषक तत्वों से भरपूर आहार जिसमें विटामिन (जैसे बायोटिन, विटामिन ई और विटामिन डी) शामिल हैं, प्रदूषकों के कारण होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव से निपटने में मदद कर सकता है और मजबूत, स्वस्थ बालों में योगदान कर सकता है.

4) एयर प्यूरीफायर लगाकर घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता में सुधार करें. यह न केवल श्वसन समस्याओं, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं के जोखिम को कम करता है, बल्कि बालों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है. कपूर का उपयोग करें, जो नवजात (nascent) ऑक्सीजन छोड़ता है, और इनडोर पौधों जैसे एरेका पाम, स्नेक प्लांट, मनी प्लांट, पीस लिली, एलोवेरा आदि रखें.

5) जब भी संभव हो, अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों से बचें और वायु गुणवत्ता सूचकांक और पूर्वानुमानों से अपडेट रहें और तदनुसार बाहरी गतिविधियों की योजना बनाएं.

इन तौर-तरीकों को निरंतर अपनाने से हेल्दी स्कैल्प और बालों के लिए बेहतर वातावरण स्थापित करने और बनाए रखने में मदद मिलेगी, जो संभावित रूप से पुरुष के गंजेपन के पैटर्न और बालों के झड़ने सहित पोल्यूटैंट्स के संपर्क से जुड़े जोखिमों को कम करती है.

(डॉ. दीपाली भारद्वाज एक त्वचा विशेषज्ञ, एंटी-एलर्जी विशेषज्ञ, लेज़र सर्जन और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षित सौंदर्यशास्त्री हैं. उनका एक्स हैंडस @dermatdoc है. व्यक्त किए गए विचार निजी हैं.)

(संपादनः शिव पाण्डेय)

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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