Saturday, 21 May, 2022
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किस फल के साथ क्या सब्जी न खाएं जैसे वायरल मनगढ़ंत नुस्खों पर आंख मूंदकर न करें भरोसा

सोशल मीडिया पर भोजन मिश्रण को लेकर वायरल आम फहम नुस्खों का पालन बहुत-से लोग करने लगे हैं, लेकिन हम पक्के प्रमाण क्यों नहीं जानना चाहते?

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ऐसी हिदायतें तो आपने सुनी ही होंगी कि ‘खाली पेट में दूध पीयो’, ‘कई फल एक साथ न खाओ’, ‘मांस और आलू साथ में न खाओ’ वगैरह. ये आम फहम नुस्खे आजकल सोशल मीडिया पर वायरल हैं और बहुत-से लोग उनका पालन भी कर रहे हैं. ये दावे चाहे जितने ही संदिग्ध हों या इन नुस्खों को लेकर कोई पक्के सबूत भले न हों, हममें से ज्यादातर लोग वजह जानने को तैयार ही नहीं होते. आखिरकार ये कुछ नामचीन लोगों, परिवारजनों, नामी ब्रांडों और स्थापित प्रतिष्ठान की ओर से जो कहे जाते हैं. लेकिन उनके पीछे विज्ञान कहां है?

आइए पहले जानें कि भोजन मिश्रण है क्या. एक तो यह कोई नई अवधारणा नहीं है. इसकी जड़ें आयुर्वेद में हैं और प्राचीन समय से ही इसे आजमाया जाता है. इस सिद्धांत के मुताबिक कुछ खास भोजन सामग्रियों को नहीं मिलाना चाहिए और कुछ खास खाद्य पदार्थों को दिन के खास समय में नहीं खाना चाहिए. मसलन, कुछ खास प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को उच्च कार्बोहाइड्रेट वाले पदार्थों के मिश्रण से टॉक्सीन बन सकता है और आखिरकार गंभीर बीमारी की वजह बन सकता है. जो लोग भोजन मिश्रण सिद्धांत पर अमल करते हैं, वे पीएच सिद्धांत को भी मानते हैं. वे पाचन के लिए विभिन्न पीएच स्तर की दरकार वाले भोजन मिश्रणों से परहेज करते हैं.

भोजन मिश्रण के लिए हमें पहले खाद्य पदार्थों को विभिन्न वर्गों में बांटने की जरूरत है, यानी कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, मीठे फल, अम्लीय फल, तरबूज और सब्जियां. हम उन्हें उनके पीएच स्तर को ध्यान में रखकर भी वर्गीकृत कर सकते हैं. यह भी याद रखना जरूरी है कि भोजन मिश्रण अनाप-शनाप नहीं हो सकते. इस तरीके पर ठीक से अमल करने के लिए यह अहम है कि हर वर्ग के खाद्य पदार्थ को भोजन में करीने से शामिल किया जाए. भोजन मिश्रण के कुछ सबसे आम फहम नियम हैं. जैसे, फल खाली पेट में खाओ, स्टार्च और मांस साथ लेने से बचो, विभिन्न तरह के प्रोटीन के मिश्रण से बचो, दूध खाली पेट में ही पीयो, वगैरह.


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पाचन क्रिया बॉयोकेमिस्ट्री के सिद्धांत पर आधारित

भोजन मिश्रण सिद्धांत प्राचीन चिकित्सा ग्रंथों से आया है. इन सटीक दिखने वाले सिद्धांतों में ‘क्यों’ और ‘कैसे’ जैसे सवाल के जवाब नहीं मिलते. पाचन क्रिया की आण्विक विधि पेचीदी है और कई तरह के पोषक तत्वों से एक साथ निपट सकती है. भोजन मिश्रण सिद्धांत पेट में भोजन के सडऩ से आगाह करता है, जो असंभवसा है क्योंकि पेट का अम्लीय वातावरण किसी भी नुक्सानदेह विषाणु के लिए खतरनाक है, जो अपने वजूद के लिए भोजन को सड़ाता है. इसके अलावा पाचन क्रिया उदर तक ही सीमित नहीं रहती. उदर भोजन में एन्जाइम और अम्ल मिलाकर उसे पाचन के लिए तैयार करता है. पाचन के लिए सबसे जरूरी तत्व छोटी आंत से निकलता है. अपाच्य भोजन बड़ी आंत से मल के रूप में निकल जाता है.

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पाचन तंत्र पाचन और उसके बाद कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा को सोखने के लिए है क्योंकि ज्यादातर खाद्य पदार्थों में ये तीनों पोषक तत्व होते हैं. पाचन में एन्जाइम खास खाद्य पदार्थ वर्गों के लिए उनकी बॉयोकेमिकल बनावट के मुताबिक होता है. तीनों आम पोषक तत्वों में अपने संबंधित एन्जाइम से जुडने के खास तत्व होते हैं, इसलिए उन्हें एन्जाइम की उपलब्धता का इंतजार नहीं करना पड़ता. इसके अलावा कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के लिए विशेष एन्जाइम का उत्सर्जन होता है, चाहे आप भले एक ही पोषक तत्व से संबंधित भोजन खाएं, इसलिए हमारा उदर गड़बड़ नहीं है तो हम एक ही वक्त में कई तरह के भोजन मिश्रण को पचा सकते हैं.

भोजन मिश्रण मददगार होता है या नुक्सानदेह

भोजन मिश्रण का सिद्धांत करीब 1,000 साल पुराना है, जब दुनिया को पोषक तत्वों या पाचन के बारे में बहुत कुछ नहीं पता था. निश्चित रूप से आधुनिक पोषण विज्ञान और बॉयोकेमिस्ट्री इन सिद्धांतों की तस्दीक नहीं कर पाता क्योंकि इनके बारे में कोई प्रयोगात्मक प्रमाण नहीं हैं. 2020 में एक अध्ययन में यह आकलन की कोशिश की गई कि भोजन मिश्रण का वजन कम करने में कोई लाभ मिलता है या नहीं. इसमें शिरकत करने वालों को दो वर्गों में बांटा गया. छह हफ्ते तक एक वर्ग को संतुलित आहार और दूसरे को भोजन मिश्रण वाला आहार दिया गया. दोनों ही वर्गों के लोगों का वजन  6 से 8 किलो तक कम पाया गया, लेकिन संतुलित आहार के मुकाबले मिश्रित आहार से कोई अतिरिक्त लाभ नहीं दिखा.

भोजन मिश्रण सिद्धांत का दावा है कि एक साथ ‘गलत’ खाद्य पदार्थों को खाने से पाचन तंत्र का पीएच वातावरण उलट पुलट हो जाता है क्योंकि वे अम्लीय या क्षारीय प्रकृति के होते हैं. हालांकि शरीर खुद पाचन तंत्र के अनुकूल पीएच कायम रखने में सक्षम है. उसे खाद्य पदार्थों के पीएच से कोई फर्क नहीं पड़ता.

आइए अब सीधी बात करें. ‘कई फलों का सेवन एक साथ न करें’ जैसी बात महज सनक है. भोजन मिश्रण सिद्धांत के मुताबिक, फल खाली पेट में ही खाएं क्योंकि बाकी कुछ के साथ खाने से पाचन क्रिया धीमी हो जाती है. अपच और दूसरी कई समस्याएं होती हैं. इन दावों को अब तक साबित नहीं किया जा सका है.

एक और दावे के मुताबिक, ‘अलग-अलग फल के पाचन की दर अलग-अलग होती है’. इसलिए उनको मिलाकर खाने से बचना चाहिए. हालांकि, सभी फलों में फ्रुक्टोज (कार्बोहाइड्रेट), प्रोटीन और वसा होती है. ये सभी पोषक तत्व पहले बताई विधि से पाचन के जरिए शरीर में पहुंचते हैं. भोजन मिश्रण सिद्धांतकार यह भी बताते हैं कि फल और सब्जियां एक साथ नहीं खानी चाहिए. हालांकि हमें गौर करना चाहिए कि दोनों खाद्य वर्गों में स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट होता है, जिसे हमारा पाचन तंत्र और खासकर पाचक एन्जाइम अलग नहीं कर सकते.


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भोजन मिश्रण का निष्कर्ष

कुछ भोजन मिश्रण को पक्के वैज्ञानिक सबूत हासिल हो गए हैं. मसलन, उचित मात्रा में आयरन सोखने के लिए विटामिन सी का सेवन वसा में घुलने वाले विटामिन के लिए वसायुक्त भोजन लेना. फिर कैलसियम और ऑक्सालेट वाले खाद्य पदार्थ साथ में न लें क्योंकि गुर्दे में पथरी की संभावना बढ़ सकती है. बावजूद इसके भोजन मिश्रण के ज्यादातर दावे मानव शरीर के नियम के मुताबिक नहीं हैं, इसलिए पक्के प्रमाण जब तक न मिलें, उनका पालन करने से बचना चाहिए.

सुभाश्री राय डॉक्टोरल स्कॉलर (केटोजेनिक डायट), मान्यता प्राप्त डायबिटीज प्रशिक्षक, चिकित्सकीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य पोषण विशेषज्ञ हैं. उनका ट्विटर एकाउंट @DrSubhasree . यहां व्यक्त विचार निजी हैं

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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