“संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा”
हनुमान चालीसा की यह चौपाई इस विश्वास को दर्शाती है कि मुश्किल समय में जो लोग भगवान हनुमान को याद करते हैं और उन्हें पुकारते हैं, उनका दर्द और उनकी परेशानियां दूर हो जाती हैं. यही हनुमान चालीसा कैप्टन स्मित मच्छर ने उस समय अपने मन में याद किया और उसका जाप किया, जब Flydubai के उस विमान के कॉकपिट के अंदर उन पर हमला किया गया, जिसे वह उड़ा रहे थे. यह हमला उसी व्यक्ति ने किया था, जिसे उनकी मदद और सुरक्षा के लिए उनके साथ होना था: को-पायलट.
कैप्टन स्मित की कहानी सिर्फ एक भारतीय पायलट की कहानी नहीं है. यह ऐसी कहानी है, जो इंसानियत की मिसाल बन गई है.
कुछ ऐसे मौके आते हैं, जब दुनिया को रुककर सोचना चाहिए—सिर्फ किसी व्यक्ति को सेलिब्रेट करने के लिए नहीं, बल्कि यह सोचने के लिए कि उस व्यक्ति के काम हमें अपने बारे में क्या सिखाते हैं. Flydubai की फ्लाइट FZ1073 से जुड़ी हाल की घटना ऐसा ही एक मौका है.
कॉकपिट में क्या हुआ
यह डरावनी और ऐसी घटना, जो पहले कभी नहीं हुई थी, उड़ान भरने के कुछ घंटे बाद हुई. खबर सामने आई कि एक अज्ञात को-पायलट ने कैप्टन स्मित पर कॉकपिट की कुल्हाड़ी से हमला किया. यह कुल्हाड़ी किसी आपात स्थिति में कॉकपिट के क्रू की सुरक्षा के लिए विमान में रखी जाती है, लेकिन कौन सोच सकता था कि खतरा खुद कॉकपिट के अंदर से आएगा? इससे 9/11 जैसी घटना को दोबारा अंजाम देने की कोशिश की आशंका पैदा हो गई.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित ने अपनी आपबीती बताई. उन्होंने कहा कि बुरी तरह घायल होने के बाद वह कॉकपिट के फर्श पर गिर गए थे, लेकिन 17 साल के उड़ान के अनुभव की वजह से उन्हें पता था कि विमान तेज़ी से नीचे जा रहा है.
गंभीर रूप से घायल होने और लगातार हमले के बावजूद उन्होंने किसी तरह अपनी ताकत जुटाई और कॉकपिट का दरवाजा खोलने के लिए “एक आखिरी कोशिश” की. वह यात्रियों को मरने के लिए कैसे छोड़ सकते थे? उन्हें पता था कि यात्रियों और खुद को बचाने के लिए उन्हें विमान का कंट्रोल दोबारा अपने हाथ में लेना होगा. वह इमरजेंसी सिग्नल भेजने में भी सफल रहे.
सबसे खास बात यह है कि उन्होंने मोदी को बताया कि वह बार-बार हनुमान चालीसा का पाठ करते रहे, क्योंकि जब भी वह दर्द या परेशानी में होते हैं, तो यही उनका सबसे भरोसेमंद मंत्र होता है.
“संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा”
दुनिया ने जो कहानी देखी
कुछ ही घंटों के अंदर पायलट की बहादुरी की खबर सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप ग्रुप और टीवी चैनलों पर तेज़ी से दिखाई जाने लगी. पश्चिमी मीडिया की कुछ हेडलाइंस थीं: “को-पायलट के पायलट पर चाकू से हमला करने के बाद यात्रियों ने दुबई-तेल अवीव फ्लाइट को क्रैश करने की कोशिश नाकाम की, इजरायल ने कहा”, “पायलट पर पायलट के चाकू से हमले के बाद इजरायल जा रही फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई” और “नेतन्याहू ने कहा- ‘नस्लीय सोच’ से प्रभावित Flydubai के को-पायलट ने कैप्टन पर चाकू से हमला किया, इजरायल जा रही फ्लाइट को क्रैश करने की कोशिश की”, जैसी कई अन्य हेडलाइंस थीं.
एक हेडलाइन थी: “हीरो पायलट, प्लंबर और डेंटिस्ट उन लोगों में शामिल, जिन्होंने इजरायल जा रही Flydubai फ्लाइट को बचाया.”
लेकिन इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया कि एक भारतीय कैप्टन ने हमले का सफलतापूर्वक सामना किया और ऐसी घटना को होने से रोकने में मदद की, जो 9/11 जैसी त्रासदी बन सकती थी.
अब, घटना के पांच दिन बाद भी कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं. यह पूछना जरूरी है कि अगर कैप्टन मच्छर नाकाम हो जाते तो क्या होता.
“सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना॥”
जब भगवान हनुमान साथ होते हैं, तो उनकी शरण में आने वाले व्यक्ति को सुख मिलता है. जब हनुमान पास होते हैं, तो डरने की जरूरत नहीं होती.
स्मित का मानना था कि भगवान हनुमान ने उनकी जान के साथ-साथ 1.3 अरब भारतीयों के राष्ट्रीय गौरव की भी रक्षा की. अगर कमांडर कॉकपिट का दरवाजा खोलने के लिए खुद को इतना संभाल नहीं पाते और विमान क्रैश हो जाता, तो पूरी कहानी बिल्कुल अलग होती.
शुरुआती कुछ मीडिया रिपोर्टों को देखें, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि ‘हिंदू आतंक’ या 9/11 जैसी घटना में एक “भारतीय पायलट” के शामिल होने जैसी कहानियां कितनी जल्दी सामने आ सकती थीं.
भारतीय नैरेटिव
कई दशकों से भारतीयों ने लगभग हर तरह के पेशे और क्षेत्र में चुपचाप अपनी क्षमता साबित की है. एविएशन से लेकर मेडिकल, इंजीनियरिंग से लेकर टेक्नोलॉजी, वित्त से लेकर शिक्षा, कारोबार से लेकर विज्ञान, हॉस्पिटैलिटी से लेकर डिप्लोमेसी तक, भारतीय दुनियाभर में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं.
वे विमान उड़ाते हैं, बुनियादी ढांचे को डिजाइन करते हैं, बड़ी ग्लोबल कंपनियां चलाते हैं, जटिल सर्जरी करते हैं, नई तकनीकें विकसित करते हैं, वैज्ञानिक रिसर्च करते हैं, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का प्रबंधन करते हैं और अलग-अलग महाद्वीपों में कारोबार खड़े करते हैं.
कैप्टन स्मित की कहानी दुनिया में भारतीयों की इस क्षमता की एक और मजबूत याद दिलाती है. उनका जवाब देना कोई संयोग नहीं था. यह ट्रेनिंग, पेशेवर अनुशासन, अनुभव, मुश्किल समय में खुद पर नियंत्रण और जिम्मेदारी की असाधारण भावना का नतीजा था.
बढ़ती भारत विरोधी भावना की पृष्ठभूमि
फिलहाल दुनिया के कई हिस्सों में ‘Indianophobia’ यानी भारत विरोधी भावना का एक दौर देखने को मिल रहा है. यह खास तौर पर अमेरिका में सामने आ रही है.
हाल ही में टेक्सास में ह्यूस्टन के पास चर्च के सदस्यों ने श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में 90 फीट ऊंची पंचलोहा अभय हनुमान की मूर्ति का विरोध किया और वहां आने वाले लोगों को वापस भेज दिया. वहीं, रिपब्लिकन उम्मीदवार अलेक्जेंडर डंकन ने इस मूर्ति की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका एक ईसाई देश है.
वॉशिंगटन डीसी स्थित Center for the Study of Organized Hate (CSOH) की एक रिपोर्ट में पाया गया कि एक्स पर दक्षिण एशियाई लोगों के खिलाफ हर महीने किए जाने वाले नफरत भरे पोस्ट जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच 240 प्रतिशत बढ़ गए. ये पोस्ट हर महीने 12,904 से बढ़कर 43,843 हो गए.
रिपोर्ट में पाया गया कि जिन पोस्ट को ट्रैक किया गया, उनमें से 45 प्रतिशत पोस्ट इमिग्रेशन और नौकरियों जैसे मुद्दों से जुड़े थे. सिख विरोधी नफरत 24 प्रतिशत और हिंदू विरोधी नफरत 12 प्रतिशत बढ़ी. इनमें “pajeet” जैसे अपमानजनक शब्द और साफ-सफाई और खाने को लेकर भारतीयों के खिलाफ रूढ़िवादी धारणाएं भी शामिल थीं.
आंकड़ों से यह भी पता चला कि अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल आम तौर पर वहां के लेबर मार्केट में योगदान देते हैं, न कि सिर्फ “अमेरिकियों की नौकरियां छीनते हैं”. रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय अप्रवासी अमेरिका की आबादी का करीब 1 प्रतिशत हैं, लेकिन उन्होंने वहां की 8 प्रतिशत टेक स्टार्टअप कंपनियां शुरू की हैं.
हर अप्रवासी द्वारा शुरू की गई यूनिकॉर्न कंपनी अमेरिका की पूरी अर्थव्यवस्था के लिए अनुमानित 859 नौकरियां पैदा करती है. इसलिए भारत विरोधी नफरत गलत और बेवजह है.
अगर विमान सऊदी अरब या तेल अवीव में क्रैश हो गया होता, तो कैप्टन मच्छर और हिंदू राष्ट्रवाद को बलि का बकरा बनाया जा सकता था.
को-पायलट कौन था?
यूएई के अटॉर्नी जनरल के एक आधिकारिक बयान में इस घटना को “आतंकवादी हमले” की कोशिश बताया गया. यह बयान घटना के तीन दिन बाद, तीन अक्टूबर को जारी किया गया था.
UAE के अधिकारियों ने अभी तक आधिकारिक तौर पर को-पायलट की पहचान की पुष्टि नहीं की है. हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से उसकी पहचान ओमान के नागरिक हम्माम अल-हमामी के तौर पर की गई है.
उसके अब डिलीट किए जा चुके सोशल मीडिया अकाउंट्स के बारे में रिपोर्ट्स में कहा गया है कि उनमें रूढ़िवादी और महिलाओं के खिलाफ सोच दिखाई देती थी. इनमें “नकाब पहनने वाली महिला” से शादी करने में उसकी दिलचस्पी भी शामिल थी. वहीं, रिपोर्ट्स में उसका संबंध सीरिया में कट्टरपंथ की ओर जाने से भी जोड़ा गया है.
शुरुआती रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया था कि वह ओमान का नागरिक हो सकता है, जो कट्टरपंथ की ओर चला गया था. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि पायलट ने हाल में किन-किन देशों की यात्रा की थी और अगर उसका कोई नेटवर्क था, तो उसमें कौन-कौन लोग शामिल थे.
क्या अपराध करने वाले की राष्ट्रीयता पर जोर देने के बजाय उस व्यक्ति को अपराधी के तौर पर देखने पर जोर नहीं होना चाहिए?
ओमान आम तौर पर शांतिप्रिय देश है और उसके भारत के साथ अच्छे संबंध हैं. वह अपने तटस्थ रवैये और तटस्थता और दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल न देने पर आधारित विदेश नीति के लिए जाना जाता है.
क्या यह नैरेटिव भारत के ओमान के साथ अच्छे संबंधों और दोनों देशों के बीच बने रणनीतिक रिश्ते को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है? ओमान भारत को दुक्म और सलालाह जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों तक पहुंच देता है.
बेशक, इज़रायल इस जांच में एक महत्वपूर्ण पक्ष है क्योंकि उसके नागरिकों की जान जा सकती थी, लेकिन भारत, ओमान और UAE भी इस मामले से जुड़े पक्ष हैं, क्योंकि अगर कैप्टन स्मित को बचाया नहीं गया होता तो तीनों देशों पर इसका असर बिल्कुल अलग हो सकता था.
इन सवालों के जवाब भारत को सक्रिय रूप से तलाशने चाहिए.
यह कहानी सीधे किसी हॉलीवुड-बॉलीवुड ड्रामा जैसी लगती है. रहस्य और भी गहरा हो गया है.
अगर ओमान एयर ने इस पायलट के कट्टरपंथी विचारों के कारण उसे चिन्हित कर “ड्यूटी से हटा” दिया था, तो वह Flydubai में नौकरी पाने में कैसे सफल रहा?
जब कोई एयरलाइन पायलट को नौकरी पर रखती है तो उसकी सुरक्षा जांच कैसे होती है? खासकर 9/11 के बाद HR से जुड़े क्या नियम हैं? क्या विमानन क्षेत्र में पायलट की नौकरी पाने के लिए कोई ऑनलाइन कोर्स ही पर्याप्त योग्यता हो सकता है? क्या यात्रियों की सूची की जांच की गई है? अगर हमलावर कैप्टन मच्छर को काबू करने में सफल हो जाता तो इतनी बड़ी घटना से किसे फायदा होता?
घटना के करीब पांच दिन बाद भी संबंधित लोग इन सवालों के जवाब तलाश रहे हैं.
द गार्डियन ने विमानन साइबर सुरक्षा सलाहकार कंपनी Cyviation के चेयरमैन और Ben Gurion Airport पर El Al के पूर्व सुरक्षा प्रमुख एरिक अराड के हवाले से कहा: “को-पायलट एक आतंकवादी है, जिसने या तो विमान को हाईजैक करने या आत्महत्या के लिए उसे गिराने की कोशिश की. सबसे खराब स्थिति यह है कि वह इजरायल में घुसने की कोशिश कर रहा था.”
आप भगवान हनुमान में विश्वास करते हों या नहीं, इसमें कोई शक नहीं कि इस विमान का बच जाना एक “चमत्कार” था — शायद एक प्लंबर, एक बहादुर कमांडर या एक डेंटिस्ट की वजह से.
शायद यह बात पता नहीं है कि अगर यह विमान सऊदी अरब, तेल अवीव या किसी और जगह दुर्घटनाग्रस्त हो जाता, तो मध्य पूर्व और बाकी दुनिया में और क्या-क्या हो सकता था. असली अपराधियों की सच्चाई हमेशा के लिए एक “ग्रीन स्क्रीन” के पीछे दफन हो सकती थी.
इसकी जांच ज़रूरी है. मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए यह जांच तुरंत होनी चाहिए.
जब कोई भारतीय किसी इज़रायली यात्री, किसी अरब यात्री, किसी अमेरिकी यात्री, किसी अफ्रीकी यात्री या किसी और व्यक्ति की जान बचाता है, तो भारत इस उपलब्धि को पूरी इंसानियत के साथ साझा करता है.
यही वह तरह का राष्ट्रीय गौरव है, जिसकी दुनिया को ज़रूरत है. ऐसा गौरव जो यह नहीं कहता: “उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह भारतीय था.” बल्कि यह कहता है: “वह भारतीय था और उसने दिखाया कि एक इंसान कितना अच्छा हो सकता है.”
यह अंतर महत्वपूर्ण है.
कैप्टन स्मित की कहानी हमें याद दिलाती है कि जब इंसानियत की परीक्षा होती है, तो जिन पहचान को लेकर हम अपना इतना समय बहस में बिताते हैं — धर्म, राष्ट्रीयता, नस्ल, भाषा और राजनीति—वे अचानक बेकार हो सकती हैं.
जो बचता है, वह है चरित्र, साहस और जिम्मेदारी.
इसलिए कैप्टन स्मित को सिर्फ एक भारतीय हीरो के रूप में नहीं, बल्कि इंसानियत के हीरो के रूप में भी सम्मान दिया जाना चाहिए.
भारत खुद को अनजाने में एक भू-राजनीतिक संघर्ष के केंद्र में पा रहा है. शायद यही वजह है कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सीट की मांग भी आगे बढ़ानी चाहिए, लेकिन यह किसी और दिन के लिए एक अलग कॉलम है.
मीनाक्षी लेखी बीजेपी लीडर, वकील और सोशल एक्टिविस्ट हैं. उनका एक्स हैंडल @M_Lekhi है. विचार व्यक्तिगत हैं.
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