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Thursday, 19 March, 2026
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बादशाह के फैंस का कहना है कि भारत हिप-हॉप को नहीं समझता. सच यह है कि स्त्री-विरोध उनके लिए आम बात है

यह कहना कि बादशाह स्त्री-विरोधी हैं, कोई बहुत नई या चौंकाने वाली बात नहीं है. स्त्री-विरोध उनके संगीत की एक रचनात्मक शर्त है—यह उनके संगीत का उतना ही बुनियादी हिस्सा है, जितना कि उसमें बजने वाली जोशीली 'बीट ड्रॉप.'

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बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय हिप-हॉप कलाकारों में से एक को पिछले हफ़्ते यह समझ में आया कि किसी सरकारी संस्था के साथ वैसी लापरवाही नहीं बरती जा सकती जैसी यूट्यूब पर किसी ‘डिस’ कमेंट के साथ बरती जाती है.

बादशाह अपने गाने ‘टटीरी’ को लेकर हरियाणा राज्य महिला आयोग के निशाने पर आ गए हैं. आयोग ने उनकी गिरफ़्तारी, पासपोर्ट ज़ब्त करने और उनके परफ़ॉर्मेंस के बहिष्कार तक की बात कही है. इस गाने में स्कूल यूनिफ़ॉर्म पहने लड़कियां बस की छत पर नाचती दिखाई गई हैं, जबकि गीत के बोल में उनकी तुलना घोड़ियों से की गई है. इसी को लेकर FIR दर्ज हुई और रैपर को औपचारिक समन भेजा गया.

यह मानना पड़ेगा कि बादशाह ने तुरंत अपनी गलती स्वीकार की और माफ़ी मांगी. उन्होंने गाना सभी प्लेटफ़ॉर्म से हटा लिया, एक बयान जारी किया, और ‘हरियाणा का बेटा’ बताते हुए माफ़ी मांगने वाला वीडियो भी पोस्ट किया. लेकिन जब आयोग के सामने पेश होने की तारीख़ आई, तो उन्होंने वहां न जाने का फ़ैसला किया.

आखिर इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी? यह म्यूज़िक वीडियो, जिसके कुछ हिस्से अब भी इंटरनेट पर मौजूद हैं, बादशाह के सबसे उकसाऊ वीडियो में से नहीं है. लेकिन इसके बोल किसी भी तरह की नरमी या वैकल्पिक व्याख्या की गुंजाइश नहीं छोड़ते. “आया बादशाह डोली चढ़ाने, इन सबको घोड़ी बनाने.” नाचती हुई स्कूली लड़कियों के बैकग्राउंड में बजती यह पंक्ति दर्शक को साफ़ बता देती है कि उसे इस दृश्य को किस नज़र से देखना है.

हिप-हॉप में महिलाओं के प्रति द्वेष

आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया ने अपनी प्रतिक्रिया देने में कोई संकोच नहीं किया. अपने नाटकीय अंदाज़ के लिए पहचानी जाने वाली भाटिया ने कहा कि बादशाह का यह कृत्य माफ़ी के योग्य नहीं है और राज्य की बेटियों का इस तरह अपमान किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता.

स्वाभाविक रूप से बादशाह के समर्थन में उतरने वालों की संख्या भी कम नहीं है. कमेंट सेक्शन में उनके समर्थक ऐसे सक्रिय हुए जैसे उन्होंने कभी यह सवाल ही न उठाया हो कि वे किस तरह का कंटेंट देख रहे हैं. उनके तर्क मुख्यतः दो दिशाओं में बंटे हुए हैं. पहला, कि ‘टटीरी’ दरअसल एक ‘डिस ट्रैक’ था, यानी बादशाह के पुरुष प्रतिद्वंद्वियों पर सीधा हमला. जिन पंक्तियों पर आपत्ति उठी, वे महिलाओं के लिए नहीं बल्कि हिप-हॉप की उस पुरानी परंपरा का हिस्सा थीं जिसमें कलाकार एक-दूसरे पर शब्दों से हमला कर अपनी श्रेष्ठता साबित करते हैं.

दूसरा तर्क यह दिया जा रहा है कि महिलाएं, या व्यापक रूप से कहें तो जो लोग इस पर आपत्ति जता रहे हैं, वे हिप-हॉप की भाषा और संस्कृति को समझते ही नहीं. गहराई से देखें तो ये दोनों तर्क एक ही बात कहते हैं.

बादशाह के समर्थक पूरी तरह गलत भी नहीं हैं. ‘टटीरी’ वास्तव में पुरुषों को लक्ष्य बनाकर लिखा गया था. लेकिन यहां यह पूछना ज़रूरी है कि बादशाह के असली विरोधी आखिर हैं कौन? यह वही कलाकार है जिसकी गानों की सूची में दिल्ली के कुछ सबसे लोकप्रिय पार्टी गीत शामिल हैं, जैसे ‘डीजे वाले बाबू’, ‘अभी तो पार्टी शुरू हुई है’ और ‘गर्मी’, जो श्रोताओं को बस मनोरंजन का वादा करते हैं.

तो यहां आख़िर कैसी जंग लड़ी जा रही है? किस क्षेत्र की रक्षा की जा रही है? किसी नाइटक्लब या डांस फ़्लोर की दुनिया में बादशाह ने अब तक जो सबसे उल्लेखनीय बात कही है, वह कुछ ऐसी पंक्ति है जैसे “बॉडी तेरी हॉटर दैन चिंचिला फ़र.” और फिर भी अपने कथित विरोधियों को जवाब देने के लिए उसने स्कूली लड़कियों की छवि का सहारा लिया. यह महिलाओं के प्रति द्वेष का बेहद भद्दा रूप है.

बादशाह का संगीत हमेशा से ऐसी दुनिया में रहा है जहां पुरुषों के बीच आकर्षण ही केंद्रीय भाव रहा है, यानी उसके गीतों का असली श्रोता वर्ग पुरुष ही रहा है. उसके गीतों में महिलाएं उसकी दुनिया की सक्रिय पात्र कम, और सजावटी उपस्थिति ज़्यादा लगती हैं. वे बस ऐसी आकृतियां बन जाती हैं जिनकी ओर इशारा करके पुरुष एक-दूसरे को नीचा दिखाते हैं. यह ऐसी दुनिया है जहां थिरकती हुई महिलाओं या स्कूली लड़कियों के समूह को किसी और की लड़ाई में हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है.

फिर भी महिलाओं को निशाना बनाने के मामले में बादशाह अकेला नहीं है. हिप-हॉप में महिलाओं के प्रति द्वेष पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है और लंबे समय से बहस होती रही है, लेकिन 2026 में भी यह सवाल पूरी तरह सुलझा नहीं है. इस संगीत शैली की शुरुआत अश्वेत अमेरिकी समुदायों में हुई थी. यह उन समुदायों द्वारा झेली गई बेदखली और संरचनात्मक हिंसा के ख़िलाफ़ सांस्कृतिक प्रतिक्रिया थी. लेकिन उस ग़ुस्से का एक बड़ा हिस्सा नीचे की ओर मोड़ा गया, यानी अश्वेत महिलाओं की तरफ़.

अमेरिकी प्रोफ़ेसर मोया बेली द्वारा गढ़ा गया शब्द ‘मिसोजिनॉयर’ इस प्रवृत्ति को बहुत सटीक ढंग से समझाता है. इसका अर्थ है अश्वेत महिलाओं के शरीर का एक साथ अत्यधिक यौन-वस्तुकरण और अपमान. आगे चलकर यही प्रवृत्ति इस संगीत शैली के भीतर एक व्यावसायिक फ़ॉर्मूला बन गई.

शेखी भरा स्त्री-विरोधी रवैया

अपने सबसे लोकप्रिय दौर में भी हिप-हॉप ने महिलाओं को अक्सर पुरुषों के बीच चल रही लड़ाई में इस्तेमाल होने वाले हथियार की तरह ही देखा है. इसका एक बड़ा उदाहरण 2024 में रैपर्स केंड्रिक लुहमार और ड्रेक के बीच हुई तीखी टकराहट है. एक के बाद एक आए ‘डिस ट्रैक’ के ज़रिए दोनों ने एक-दूसरे पर महिलाओं के साथ गलत बर्ताव के आरोप लगाए. लैमर पर घरेलू हिंसा के आरोप लगे, जबकि ड्रेक पर बच्चों के यौन शोषण के आरोप लगाए गए.

लेकिन इन गानों में उन महिलाओं का कहीं ज़िक्र नहीं था जो इन आरोपों के केंद्र में थीं. न उनके साथ हुए नुकसान की बात हुई, न उनके अधिकारों की. उनकी पीड़ा को केवल बारूद की तरह इस्तेमाल किया गया.

यह बात कि बादशाह के संगीत में महिलाओं के प्रति नफ़रत मौजूद है, अब कोई नई या चौंकाने वाली बात नहीं रह गई है. यह उनके संगीत की रचनात्मक संरचना का हिस्सा बन चुकी है. यह उनके गीतों में उतनी ही स्थायी मौजूदगी रखती है जितनी बीट ड्रॉप.

उनके गानों की लंबी सूची ऐसे बोलों से भरी है जिनमें महिलाओं को उनके शरीर के आधार पर परखा जाता है. जैसे ‘Buzz’ में पंक्ति है, “जहां से होना चाहिए वहीं से है तू थिक (thick).” या ‘गेंदा फूल’ में, “Bum तेरा गोटे खाए.” इस्तेमाल कर छोड़ दी गई महिला की छवि भी मनोरंजन के रूप में पेश की जाती है, जैसे ‘सनक’ में लाइन आती है, “पहले गंदा किया फिर खुद ही धोने लगी.”

साल 2017 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुछ कॉलेजों ने भी इसी आधार पर बादशाह, यो यो हनी सिंह और दूसरे रैपर्स के अपने कॉलेज फेस्टिवल में परफ़ॉर्म करने पर रोक लगा दी थी.

महिलाओं के प्रति यह अकड़ भरा लिंग-भेद सिर्फ़ मंच पर नहीं, मंच के बाहर भी दिखाई देता है. पिछले साल जब उनसे दुआ लिपा के साथ काम करने को लेकर पूछा गया, तो उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि वे “उनके साथ बच्चे पैदा करना ज़्यादा पसंद करेंगे.” इस बयान पर आलोचना हुई तो उन्होंने अपनी बात और मज़बूती से दोहराई. उनका कहना था, “मुझे लगता है कि जिस औरत की आप सच में इज़्ज़त करते हैं, उसके लिए सबसे खूबसूरत तारीफ़ों में से एक यह है कि आप चाहें कि वह आपके बच्चों की मां बने.”

सवाल यह है कि जो आदमी पिछले पंद्रह साल से लगातार महिलाओं को उनके शरीर की उपयोगिता के आधार पर परिभाषित करता आया हो, क्या उसके इरादों को सहज रूप से सम्मानजनक माना जा सकता है.

साल 2023 के एक इंटरव्यू में बादशाह ने कहा था, “मैं ऐसा संगीत पसंद नहीं करता जो महिलाओं को सिर्फ़ एक वस्तु की तरह दिखाए. मेरे घर में भी महिलाएं हैं, मेरी मां हैं, बहनें हैं, और मेरा संगीत हमेशा ज़िम्मेदारी और सम्मान की भावना से बनता है.” जब उनसे कुछ विशेष गीतों के बोलों पर सवाल पूछा गया, तो उनका जवाब था कि मनोरंजन के लिए शब्दों की स्वतंत्रता ली जाती है, क्योंकि कला का अर्थ ही आज़ादी है. लेकिन कभी-कभी इस आज़ादी की क़ीमत भी चुकानी पड़ती है, और इस बार ‘हरियाणा के बेटे’ को भी उसका सामना करना पड़ रहा है.

यहीं पर फिर कोई कहेगा कि भारत हिप-हॉप को समझता ही नहीं है. लेकिन इसका जवाब यह है कि यही वह देश है जिसने एमसी कैश को जन्म दिया, जिसने कश्मीर पर रैप किया और उसके नतीजे भुगते. यही वह देश है जहां गिन्नी माही ने ‘चमार पॉप’ की शुरुआत की. यही वह देश है जहां Divine ने धारावी की कहानी दुनिया तक पहुंचाई. भारत इस जॉनर को समझता है. समस्या कहीं और है.

बॉलीवुड का हिप-हॉप जाति, वर्ग और राजनीतिक बेचैनी से लगभग पूरी तरह साफ़ कर दिया गया है. उसमें अगर कुछ बचता है, तो अक्सर शेखी बघारना और महिलाओं के प्रति अपमानजनक रवैया ही बचता है. बादशाह इस शैली का सबसे बिकाऊ चेहरा हैं, हालांकि अकेले नहीं हैं. यो यो हनी सिंह ने भी अपना करियर इसी ढांचे पर खड़ा किया. करण औजला को अपने गीतों के बोलों को लेकर पंजाब राज्य महिला आयोग के सामने पेश होना पड़ा था. पिछले साल गुरु रंधावा भी एक गीत में स्कूली लड़की के उल्लेख को लेकर विवादों में घिर गए थे.

अगर बादशाह इस विवाद से कमज़ोर पड़ते हैं, तो यह शैली बहुत जल्दी किसी और ऐसे पुरुष चेहरे को सामने ले आएगी जिसके पास कहने के लिए न कोई गहराई होगी, न कोई असली अनुभव, लेकिन महिलाओं पर टिप्पणी करने का वही पुराना आत्मविश्वास ज़रूर होगा.

करनजीत कौर पत्रकार हैं. वे TWO Design में पार्टनर हैं. उनका एक्स हैंडल @Kaju_Katri है. व्यक्त विचार निजी हैं.

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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