scorecardresearch
Tuesday, 28 April, 2026
होमदेशसबके लिए न्याय का आंबेडकर का सपना अब साकार हो रहा है : रीजीजू

सबके लिए न्याय का आंबेडकर का सपना अब साकार हो रहा है : रीजीजू

Text Size:

गुवाहाटी, 14 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रीजीजू ने शुक्रवार को कहा कि बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर का सभी के लिए न्याय का सपना मौजूदा समय में साकार हो रहा है क्योंकि सरकार दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित कर रही है।

उन्होंने कहा कि जब बुनियादी सुविधाएं सबसे दूर के गांवों तक पहुंचती हैं, तो यह न्याय की नींव बन जाती है और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ठीक यही कर रही है।

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र सहित देश के कोने-कोने में बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना ‘‘पहले संभव नहीं माना जाता था।’’ गुवाहाटी उच्च न्यायालय के प्लेटिनम जयंती समारोह के समापन कार्यक्रम में रीजीजू ने कहा, ‘‘हम आज अपने संविधान के निर्माता बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दे रहे हैं।’’

उन्होंने ‘न्याय: आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक’ का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘जब आंबेडकर ने संविधान का मसौदा तैयार किया तो उनका जोर न्याय पर था और यह प्रस्तावना का भी हिस्सा बन गया।’’ केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘मेरा कहना है कि बाबा साहेब ने सबके लिए न्याय का जो सपना देखा था, वह अब देश में साकार हो रहा है।’’

रीजीजू ने कहा कि सरकार एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से ‘‘अंतिम गंतव्य तक पहुंचने’ पर जोर दे रही है, जिसमें न्यायिक प्रणाली भी शामिल है। उन्होंने अदालतों के बुनियादी ढांचे में सुधार और इसके कामकाज के डिजिटलीकरण में निवेश का हवाला दिया।

रीजीजू ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रथागत कानूनों पर छह पुस्तकों के लिए गुवाहाटी उच्च न्यायालय की भी सराहना की, जो इस महीने की शुरुआत में जारी की गई थी। मंत्री ने यह भी कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों को क्षेत्र के विकास के लिए मिलकर काम करना होगा।

क्षेत्र के साझा इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘पूर्वोत्तर में सभी एक साथ हैं। प्रशासनिक सुविधा के लिए राज्यों का गठन किया गया था। हमें विकास के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लेना होगा।’’

भाषा आशीष अविनाश

अविनाश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments