पणजी, 19 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय रक्षा सचिव अजय कुमार ने मंगलवार को कहा कि समुद्री प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक कदम के तौर पर, भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के बेड़े में तीन और प्रदूषण नियंत्रण पोत (पीसीवी) शामिल किये जाएंगे।
गोवा में जारी आठवें राष्ट्रीय प्रदूषण प्रतिक्रिया अभ्यास के मौके पर पत्रकारों से अलग से बातचीत में कुमार ने कहा कि भारत मित्र देशों को उनकी क्षमताएं उन्नत करने में मदद के लिए भी तैयार है।
उन्होंने कहा कि इस अभ्यास में लगभग 19 मित्र देश भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार समुद्र में प्रदूषण के खतरों का सामना करने के लिए आईसीजी की क्षमताओं को लगातार उन्नत करने का प्रयास कर रही है।
कुमार ने कहा, ‘‘आज, भारतीय तटरक्षक बल इस क्षेत्र में उच्चतम स्तर के तेल रिसाव से निपटने में सक्षम है, जो 700 टन और उससे अधिक है। दुनिया के कुछ ही देशों में यह क्षमता है।’’ उन्होंने कहा कि वर्तमान में, आईसीजी के पास प्रदूषण से निपटने के लिए दो समर्पित जहाज हैं, और इसकी क्षमता बढ़ाने के वास्ते इसके बेड़े में तीन और जोड़े जाएंगे।’’
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हिंद महासागर दुनिया के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है और इस क्षेत्र में इसी मार्ग से ज्यादातर व्यापार होता है। उन्होंने कहा कि समुद्र में फेंके जा रहे प्लास्टिक कचरे के मुद्दे से भी देश जूझ रहे हैं।
कुमार ने कहा, ‘‘हमें इससे (प्लास्टिक प्रदूषण से) सामूहिक रूप से लड़ने की जरूरत है। यह एक देश द्वारा नहीं किया जा सकता है। क्षेत्र के सभी तटीय देशों को प्रयास करने की आवश्यकता है।’’
उन्होंने समुद्र तट से प्लास्टिक कचरे को साफ करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘पुनीत सागर मिशन’ की सराहना की।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्लास्टिक कचरा समुद्र में न जाए। हर साल 1500 करोड़ टन प्लास्टिक विभिन्न देशों से हिंद महासागर में बहाया जाता है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो हमारा समुद्री जीवन, पर्यावरण, पारिस्थितिकी और स्वास्थ्य प्रभावित होगा।’’
प्रदूषण से निपटने संबंधी प्रतिक्रिया पर पाकिस्तान और चीन से सहयोग के बारे में पूछे जाने पर, कुमार ने कहा, ‘‘यह एक पर्यावरणीय मुद्दा है और सभी देशों को इसमें योगदान देना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि हिंद महासागर में प्रदूषण को कम करने के लिए कई संधियों पर हस्ताक्षर किए गए हैं और मित्र राष्ट्रों को सामूहिक रूप से यह सुनिश्चित करना होगा कि इनका पालन किया जाए।
भाषा
देवेंद्र सुरेश
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