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Sunday, 29 March, 2026
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न्यायालय राजद्रोह घटनाक्रम

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नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने देशभर में राजद्रोह के मामलों में सभी कार्यवाहियों पर तब तक के लिए रोक लगा दी है, जब तक कोई ‘उचित’ सरकारी मंच इसका पुन: परीक्षण नहीं कर लेता। इससे संबंधित घटनाक्रम इस प्रकार है:

1890: विशेष 17वें अधिनियम के जरिए भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के तहत राजद्रोह अपराध के तौर पर शामिल किया गया।

1897: स्वतंत्रता सैनानी बाल गंगाधर तिलक पर राजद्रोह के तहत मुकदमा चलाया गया।

20 जनवरी 1962: पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने केदारनाथ सिंह मामले में ऐतिहासिक फैसला दिया। राजद्रोह के प्रावधान की वैधता को बरकरार रखा। मगर इसके दुरुपयोग के दायरे को सीमित करने की कोशिश की। पीठ ने व्यवस्था दी कि जब तक उकसावे या हिंसा का आह्वान न हो, तबतक सरकार की आलोचना को राजद्रोह अपराध नहीं माना जा सकता।

15 जुलाई 2021: प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण की अगुवाई वाली पीठ ने इस प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किए।

27 अप्रैल 2022: शीर्ष अदालत ने अन्य याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया, सॉलिसिटर जनरल को जवाब दाखिल करने का समय दिया।

पांच मई 2022: उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर राजद्रोह कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी पीठ के पास भेजा जाता है तो वह कानूनी सवाल पर 10 मई को दलीलें सुनेगा।

सात मई, 2022: सॉलिसिटर जनरल ने राजद्रोह कानून और 1962 की संविधान पीठ के फैसले का बचाव किया, जिसमें इसकी वैधता को बरकरार रखा गया था। लिखित बयान में कहा गया है कि प्रावधान और फैसला लगभग छह दशकों में ‘समय की कसौटी’ पर खरा उतरा है।

नौ मई: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हलफनामा दायर किया, मुद्दे पर प्रधानमंत्री के नज़रिए का जिक्र किया। उसने उच्चतम न्यायालय से राजद्रोह के प्रावधान की वैधता का परीक्षण करने में समय नहीं लगाने का आग्रह किया। इसमें कहा गया है कि ‘सक्षम मंच’ इस मुद्दे पर फैसला करेगा।

10 मई: शीर्ष अदालत केंद्र के इस विचार से सहमत हुई कि एक उपयुक्त मंच राजद्रोह के प्रावधान पर पुनर्विचार करेगा, लेकिन भविष्य में नागरिकों के हितों की सुरक्षा और राजद्रोह के मौजूदा मामलों पर विचार पूछे।

11 मई 2022: तीन न्यायाधीशों की पीठ ने केंद्र को प्रावधान पर पुनर्विचार की अनुमति दी और राजद्रोह के मामलों में सभी कार्यवाहियों पर तब तक के लिए रोक लगा दी है, जब तक कोई ‘उचित’ सरकारी मंच इसका पुन: परीक्षण नहीं कर लेता और याचिकाओं पर आगे की सुनवाई के लिए जुलाई के तीसरे हफ्ते की तारीख तय की।

भाषा

नोमान नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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