नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) यमुना के पुनरुद्धार पर हाल में हुई एक बैठक में, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को पर्यावरणीय प्रवाह बढ़ाने, नालों से प्रदूषकों को हटाने और नदी में गिराये जाने वाले औद्योगिक अपशिष्टों पर अंकुश लगाने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए गए।
अधिकारियों के अनुसार, बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में यमुना नदी में गिरने वाले सभी नालों का ऑडिट करने के लिए एक तृतीय-पक्ष कंपनी को नियुक्त किया जाएगा।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, “बैठक में यमुना नदी के ऊपरी हिस्से में पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) बढ़ाने के लिए तीन परियोजनाओं समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई।”
इस योजना के तहत यमुना नदी के पर्यावरणीय प्रवाह को बढ़ाने के लिए ऊपरी गंगा नहर (उत्तर प्रदेश) से लगभग 800 क्यूसेक पानी को सीधे वजीराबाद बैराज की ओर मोड़ा जाएगा।
अधिकारी ने बताया कि एक अन्य परियोजना का उद्देश्य मुनक नहर (हरियाणा) से 100 क्यूसेक पानी सीधे नदी में डालना है।
पर्यावरणीय प्रवाह वह न्यूनतम प्रवाह है जो नदी के पारिस्थितिकीय संतुलन को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
अधिकारियों ने बताया कि एक अन्य परियोजना हथिनीकुंड बैराज से नदी में पानी की तीसरी धारा का निर्माण करने की है, जिससे नदी में गाद और कचरे के संचय को कम करने में मदद मिलेगी।
यमुना में प्रदूषण को कम करने के लिए, सरकार अवजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) से नदी में आने वाले अपशिष्ट जल की गुणवत्ता में सुधार करने का भी प्रयास कर रही है।
अधिकारी ने बताया, “यमुना पुनरुद्धार योजना के तहत जल शक्ति मंत्रालय तीनों राज्यों में स्थित एसटीपी से निकलने वाले पानी की वास्तविक गुणवत्ता को समझने के लिए एक तृतीय पक्षीय कंपनी को नियुक्त कर रहा है।’
दिल्ली सरकार ने पहले ही अवजल सुधार योजना (एसआईएस) शुरू कर दी है, जो राजधानी में अवजल संबंधी बुनियादी ढांचे को नया रूप देने के लिए एक व्यापक मास्टर प्लान है।
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नोमान प्रशांत
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