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Friday, 10 April, 2026
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मथुरा, आगरा में यमुना प्रदूषण: हरित अधिकरण ने उप्र के मुख्य सचिव को सुधारात्मक कार्य करने को कहा

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नयी दिल्ली, 12 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को मथुरा और आगरा में यमुना नदी के प्रदूषण से जुड़े विषयों में सुधारात्मक कार्य सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

अधिकरण मथुरा और आगरा में नदी के प्रदूषण पर दो अर्जियों पर सुनवाई कर रहा है। अर्जियों में आरोप लगाया गया है कि मथुरा में यमुना में अशोधित जलमल बहाया जा रहा है और आगरा में नदी को स्थानीय प्राधिकार तथा निजी कारोबारी या वाणिज्यिक प्रतिष्ठान प्रदूषित कर रहे हैं।

न्यायमूर्ति ए.के. गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह जिक्र किया कि अधिकरण के पूर्व के आदेशों के अनुपालन में, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अलग-अलग रिपोर्ट दाखिल कर मथुरा में यमुना नदी के प्रदूषित होने को स्वीकार किया है। साथ ही, यह भी स्वीकार किया है कि नदी में प्रतिदिन 13.1 करोड़ लीटर अशोधित जलमल छोड़ा जा रहा है तथा प्राधिकार आगरा में सुधारात्मक कार्य करने में नाकाम रहे हैं।

पीठ में न्यायिक सदस्य के तौर पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य के रूप में ए सेंथिल वेल तथा अफरोज अहमद शामिल हैं।

अधिकरण ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को आगरा में यमुना के जल को साफ रखने के लिए किये जा रहे कार्यों पर एक रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया।

अधिकरण ने विषय की अगली सुनवाई 23 अगस्त के लिए निर्धारित कर दी। भाषा सुभाष वैभव

वैभव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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