नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रविवार को कहा कि जून 2010 में तत्कालीन पर्यावरण मंत्री के रूप में उन्होंने उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर कच्छ के घास के मैदानों में गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) की संख्या बढ़ाने के लिए संरक्षण प्रयास करने का आह्वान किया था।
रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘गुजरात में गोडावण की सुरक्षा की पहल का पूरा श्रेय हमेशा की तरह प्रधानमंत्री को दिया जा रहा है। यह प्रचारित किया जा रहा है कि उनके मन में यह विचार 2011 में आया था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘महज ऐतिहासिक रुचि के विषय के तौर पर बताना चाहता हूं कि नौ जून 2010 को तत्कालीन केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कच्छ के घास के मैदानों में गोडावण की संख्या बढ़ाने के लिए संरक्षण प्रयास किए जाने का आह्वान किया था। इससे जुड़े पेशेवर लोग यह पृष्ठभूमि जानते हैं।’’
मई 2009 से जुलाई 2011 के बीच रमेश पर्यावरण मंत्री थे।
उन्होंने कहा कि मार्च 1961 में भारत के महानतम पक्षी विज्ञानी सलीम अली ने इच्छा जताई थी कि गोडावण को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया जाए क्योंकि यह विलुप्ति के कगार पर था लेकिन दिसंबर 1963 में मैसूर के जयचामराजेंद्र वाडियार की अध्यक्षता वाले भारतीय वन्यजीव बोर्ड ने ऐतिहासिक, पौराणिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कारणों से मोर को राष्ट्रीय पक्षी चुना था।
रमेश ने 2010 में मोदी को लिखे अपने पत्र में कहा था, ‘‘आप जानते हैं कि गोडावण अत्यधिक संकटग्रस्त प्रजाति है और गुजरात में कच्छ के घास के मैदान इस प्रजाति के पुनरुद्धार की संभावना वाले आखिरी बचे क्षेत्रों में से एक हैं।’’
उन्होंने कहा था कि पक्षी विज्ञानी गोडावण के संरक्षण को शेरों और बाघों के संरक्षण के बराबर ही महत्वपूर्ण मानते हैं।
रमेश ने मोदी को लिखे अपने पत्र में कहा था, ‘‘मैं आपसे यह अनुरोध करने के लिए पत्र लिख रहा हूं कि आप तत्काल हस्तक्षेप करें और राजस्व गौचर भूमि को कृषि में परिवर्तित होने से रोकें तथा यह सुनिश्चित करें कि जिला अधिकारी नलिया (पक्षियों की एक प्रजाति) संरक्षण पहलों का समर्थन करें। यदि हम हस्तक्षेप नहीं करते हैं तो गुजरात में गोडावण के विलुप्त होने की संभावना बहुत अधिक है।’’
रमेश के ‘एक्स’ पर यह पोस्ट साझा करने से एक दिन पहले, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को बताया था कि गुजरात के कच्छ में एक दशक बाद गोडावण (जीआईबी) का चूजा जन्मा है। यह उपलब्धि ‘जंपस्टार्ट अप्रोच’ नामक नयी संरक्षण पद्धति के जरिये हासिल की गई है।
भाषा सिम्मी सुरभि
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