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Friday, 10 April, 2026
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कानून निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़नी चाहिए: बिरला

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पणजी, 10 अप्रैल (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को कहा कि महिलाएं व्यापार, शिक्षा और विज्ञान समेत सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं तथा नीति एवं कानून निर्माण में उनकी भागीदारी भी उसी अनुरूप बढ़नी चाहिए।

बिरला ने यहां राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए), भारत क्षेत्र, पश्चिम जोन-सात के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि पंचायतों से लेकर राज्य विधानसभाओं और संसद तक, महिलाओं के प्रतिनिधित्व को मजबूत किया जाना चाहिए और कानून बनाने में उनकी भूमिका को बढ़ाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘महिलाएं व्यापार, शिक्षा और विज्ञान समेत सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और नीति निर्माण एवं कानून निर्माण में उनकी भागीदारी तदनुसार बढ़नी चाहिए।’’

बिरला की ये टिप्पणियां संसद के विशेष सत्र से कुछ दिन पहले आईं, जिसमें ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के नाम से जाना जाता है) में संशोधन किया जाएगा ताकि इसे 2029 के आम चुनावों से लागू किया जा सके।

संसद का बजट सत्र बढ़ा दिया गया है और 16 से 18 अप्रैल तक तीन दिवसीय विशेष बैठक बुलाया गया है।

बिरला ने कहा कि भारत एक नए युग में प्रवेश कर रहा है, और अब समय आ गया है कि विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया जाए।

उन्होंने कहा, ‘‘देश की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत के संविधान में समय-समय पर संशोधन किए गए हैं।’’

इससे पहले बिरला ने गोवा विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश की सेवा के लिए बड़ी संख्या में महिलाओं का आगे आना उत्साहजनक है और महिला आरक्षण कानून विधायिकाओं में उनके प्रतिनिधित्व को मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा कि कई युवा राजनीति से दूर रहने का दावा करते हैं, लेकिन राजनीति सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने और जीवन को बेहतर बनाने का एक मजबूत माध्यम बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि आईपीएस और आईएएस जैसी सेवाओं के प्रशिक्षु अधिकारियों में काफी संख्या में महिलाओं को संसद का दौरा करते देखना उत्साहजनक है।

उन्होंने कहा, ‘‘विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को और मजबूत करने के लिए, नयी संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया।’’

बिरला ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है और लोकतंत्र में युवाओं की अधिक भागीदारी से शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।

उन्होंने कहा, ‘‘नीति निर्माण में युवाओं की बढ़ती भागीदारी से 2047 तक एक विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में मदद मिलेगी।’’

बिरला ने कहा कि चुनाव में वोट डालना ही काफी नहीं है, शासन में जवाबदेही सुनिश्चित करना भी युवाओं की एक प्रमुख जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत के युवाओं की प्रतिभा, ऊर्जा, विचार और नवाचार वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि विश्वभर में युवा भारतीय विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘युवा राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत हैं – देश की आशाएं और आकांक्षाएं उनके कंधों पर टिकी हैं।’’

बिरला ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर गोवा मुक्ति आंदोलन तक, युवा भारतीयों ने लगातार अपने द्वारा निर्धारित हर लक्ष्य को प्राप्त करने का दृढ़ संकल्प प्रदर्शित किया है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा, ‘‘बड़े सपने देखो, महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करो और दृढ़ संकल्प तथा अटूट प्रयास से इन्हें हासिल करो।’’

उन्होंने कहा कि भारत की विविधता को समृद्ध और मजबूत बनाने में गोवा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सीपीए के सत्र को संबोधित करते हुए बिरला ने कहा कि गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा जैसे तटीय राज्यों ने यह प्रदर्शित किया है कि चुनौतियों को अवसरों में कैसे बदला जा सकता है, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलती है।

उन्होंने कहा, ‘‘पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करते हुए, इन राज्यों ने पर्यटन और व्यापार को सफलतापूर्वक बढ़ावा दिया है।’’

भाषा

देवेंद्र माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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