नई दिल्ली: महिला आरक्षण बिल को 2029 लोकसभा चुनाव से लागू करने की जोरदार पैरवी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि सांसद इस अहम मौके को हाथ से न जाने दें और यह भी कहा कि महिलाएं अपने अधिकारों के खिलाफ खड़े लोगों को नहीं भूली हैं.
संविधान संशोधन बिल पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए पीएम मोदी ने कहा कि किसी भी देश के जीवन में कुछ खास पल होते हैं और उस समय समाज की सोच और नेतृत्व की क्षमता उस पल को पकड़कर उसे देश की ताकत में बदल सकती है.
उन्होंने कहा, “आज सुबह इस अहम बिल पर चर्चा शुरू हुई. कई सदस्यों ने अलग-अलग मुद्दे उठाए हैं और हम उन पर सदन को विस्तार से जानकारी देंगे. लेकिन मैं उन बिंदुओं में नहीं जाना चाहता. किसी भी देश के जीवन में कुछ महत्वपूर्ण पल होते हैं. ऐसे समय में समाज की सोच और नेतृत्व की क्षमता उस पल को पकड़कर उसे देश की संपत्ति बना देती है और एक मजबूत विरासत तैयार करती है. भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में यह वैसा ही एक पल है.”
उन्होंने कहा, “जब 25-30 साल पहले यह विचार सामने आया था, तब ही इसे लागू कर देना चाहिए था. अब हम इसे एक परिपक्व स्तर पर लेकर आए हैं. समय-समय पर इसमें सुधार भी किए गए हैं और यही लोकतंत्र की खूबसूरती है. हमारा लोकतंत्र हजारों साल पुराना है और हम सभी को इस विकास यात्रा में नया आयाम जोड़ने का अवसर मिला है.”
प्रधानमंत्री ने सांसदों से अपील की कि वे इस बिल को पास कर देश को नई दिशा दें.
उन्होंने कहा, “हम सभी भाग्यशाली हैं कि हमें देश की आधी आबादी से जुड़े इस महत्वपूर्ण राष्ट्र निर्माण प्रक्रिया में हिस्सा लेने का मौका मिला है. हमें इस अवसर को गंवाना नहीं चाहिए. हम सब मिलकर देश को नई दिशा देंगे और शासन व्यवस्था में संवेदनशीलता लाने का सार्थक प्रयास करेंगे. इससे न सिर्फ राजनीति बदलेगी, बल्कि देश की दिशा और दशा भी तय होगी.”
उन्होंने कहा कि कई सदस्यों ने अपनी चिंताएं रखी हैं और यह बिल महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने और नई राजनीतिक संस्कृति बनाने के लिए है.
उन्होंने कहा, “हम देश को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं. इससे राजनीति में सकारात्मक बदलाव आएगा. मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि मैं ऐसे समय का हिस्सा हूं, जब देश की आधी आबादी को नीति निर्माण में शामिल किया जा रहा है.”
उन्होंने दोहराया, “महिलाएं अपने अधिकारों के खिलाफ खड़े लोगों को नहीं भूली हैं.”
उन्होंने कहा कि विकसित भारत का मतलब सिर्फ सड़क, रेल या इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है. “विकसित भारत का मतलब सबका साथ, सबका विकास है.”
इससे पहले लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 पेश किए गए और उन पर विचार के लिए लिया गया.
प्रधानमंत्री ने इन बिलों के लिए सर्वसम्मति से समर्थन मांगा. विपक्षी दलों ने परिसीमन विधेयक पर कड़ी आपत्ति जताई है.
