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Monday, 12 January, 2026
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चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराई गई महिला को एसएलपी दाखिल करने के लिए न्यायालय से कानूनी सहायता मिली

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मंडी/शिमला, 10 दिसंबर (भाषा) हिमाचल प्रदेश में चेक बाउंस मामले में तीन अदालतों द्वारा दोषी ठहराई गई निम्न आय वर्ग से संबंध रखने वाली एक बीमार महिला को आखिरकार राहत मिल गई क्योंकि विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करने के लिए निशुल्क कानूनी सहायता के वास्ते उसका आवेदन स्वीकार कर लिया गया है।

राज्य में मंडी जिले के सुंदर नगर निवासी सिद्धू राम की बेटी कुसुम शर्मा को चेक बाउंस मामले में सुंदरनगर के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोषी ठहराया था और 31 दिसंबर, 2021 को नौ महीने के कारावास और 2,25,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।

शर्मा की यह दलील कि कमला देवी ने उनके घर से एक खाली चेक लिया, उसका दुरुपयोग किया और आवेदक के खिलाफ परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत झूठा मामला दर्ज कराया, स्वीकार नहीं की गई।

उन्होंने हालांकि नोटिस का जवाब दिया था, मामले का विरोध किया था और चेक पर लिखी हुई बातों की फोरेंसिक जांच कराई थी, फिर भी मामला उनके खिलाफ तय किया गया।

शर्मा ने सुंदरनगर के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के आदेश के खिलाफ सुंदरनगर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के समक्ष अपील दायर की, लेकिन 28 जुलाई, 2022 को अपील खारिज कर दी गई और सजा को बरकरार रखा गया।

बाद में, शर्मा ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के आदेशों को उच्च न्यायालय में चुनौती दी, जिसने सात अगस्त को सजा की पुष्टि भी कर दी।

उन्होंने भारत के उच्चतम न्यायालय की विधि सेवा समिति से निवेदन किया कि वह एक बीमार और गरीब तलाकशुदा महिला हैं, जिनके पास आय का कोई स्रोत नहीं है। उन्होंने विधि सेवा प्राधिकरण अधिनियम के प्रावधानों के तहत निशुल्क कानूनी सहायता मांगी ताकि वह हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दे सके।

शर्मा का मुकदमा निशुल्क लड़ रहे वकील महेश शर्मा ने बुधवार को कहा कि दुर्भाग्य से महिला के खिलाफ फैसला सुनाया गया और उसे तीन अदालतों ने दोषी ठहराया है, लेकिन अब उसका मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है।

उन्होंने कहा, ‘‘आवेदक उच्चतम न्यायालय में मुकदमा लड़ने की स्थिति में नहीं थी और आत्मसमर्पण करने को तैयार थी, लेकिन मैंने उन्हें उच्चतम न्यायालय की निशुल्क कानूनी सहायता समिति के माध्यम से मामला दायर करने की सलाह दी और समिति को दो बार आवेदन भेजा, लेकिन किसी ने भी आवेदन पर ध्यान नहीं दिया।’’

उन्होंने कहा कि आखिरकार एक आवेदन तैयार किया गया और राष्ट्रीय विधि सेवा समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सूर्यकांत को भेजा गया। उन्होंने कहा कि इसके बाद न्याय सचिव ने आवेदक से संपर्क किया और उनसे दस्तावेजों की प्रतियां भेजने को कहा तथा उन्हें सूचित किया कि उनके मामले में एक वकील नियुक्त किया गया है।

भाषा

देवेंद्र नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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