तिरुवनंतपुरम, 30 मार्च (भाषा) वैश्विक वन्यजीव व्यापार निगरानी नेटवर्क द्वारा किए गए एक नवीनतम अध्ययन के अनुसार 2011-2020 के बीच 18 भारतीय हवाई अड्डों के जरिये 70,000 से अधिक देशी और विदेशी जंगली जानवरों की तस्करी की गई थी।
जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास दोनों के संदर्भ में जंगली जानवरों और पौधों पर विश्व स्तर पर काम करने वाले एक प्रमुख गैर-सरकारी संगठन ‘ट्रैफिक’ द्वारा बुधवार को जारी किए गए अध्ययन में पाया गया कि अवैध वन्यजीव उत्पादों को भारत और इसकी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर ले जाने के लिए अवैध व्यापारकर्ता विमानन क्षेत्र की तरक्की का फायदा उठा रहे हैं।
अध्ययन के अनुसार 2011-2020 के बीच 18 भारतीय हवाई अड्डों के जरिये 70,000 से अधिक देशी और विदेशी जंगली जानवरों की तस्करी की गई थी। इन हवाई अड्डों पर 141 वन्यजीव जब्त किये जाने की घटनाएं हुई थीं।
संगठन ने कहा कि 46 प्रतिशत बरामद किये गये वन्यजीव में सरीसृप थे, जिसमें भारतीय स्टार कछुआ भी शामिल था। उसने कहा कि तस्कर स्पष्ट रूप से प्रजातियों की रक्षा के लिए इसके व्यापार को प्रतिबंधित करने वाले अंतरराष्ट्रीय नियमों की अवहेलना करते हैं।
अध्ययन में पाया गया है कि तमिलनाडु में चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने वन्यजीव जब्त किये जाने की घटनाओं की संख्या सबसे अधिक (कुल मामलों का 36.1 प्रतिशत) दर्ज क है, इसके बाद छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, मुंबई, महाराष्ट्र (14.8 प्रतिशत) और इंदिरा गांधी हवाई अड्डे, नई दिल्ली (11.3 प्रतिशत) का स्थान है।
भारत में, वन्यजीव, भारत के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के माध्यम से शिकार, व्यापार और अन्य प्रकार के शोषण से संरक्षित हैं।
‘ट्रैफिक’ के भारत कार्यालय के प्रमुख डॉ साकेत बडोला ने कहा, ‘‘ट्रैफिक का 2011-2020 के बीच भारतीय हवाई अड्डों पर वन्यजीवों की बरामदगी का अध्ययन अवैध वन्यजीव व्यापार के संचालन के लिए एयरलाइन क्षेत्र के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रवर्तन प्रयासों को मजबूत करने की आवश्यकता को बताता है।’’
बडोला ने कहा, ‘‘हम संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और हमारे भागीदारों को भारत में अपनी तरह की पहली परियोजना शुरू करने में उनके समर्थन के लिए धन्यवाद देते हैं, जो हवाई अड्डों पर वन्यजीवों की तस्करी का पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए प्रवर्तन अधिकारियों के साथ काम करने पर केंद्रित है।’’
भारत में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के प्रमुख अतुल बगई ने कहा कि हवाई अड्डों से अवैध वन्यजीव व्यापार एक प्रमुख संरक्षण खतरा है जो एयरलाइन क्षेत्र में वृद्धि से बढ़ा है।
भाषा
देवेंद्र नरेश
नरेश
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