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Friday, 1 May, 2026
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कोविड संबंधी मौतों के आकलन के लिए डब्ल्यूएचओ की पद्धति अवैज्ञानिक : सरकार

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नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) सरकार ने मंगलवार को संसद में कहा कि कोविड-19 के कारण हुई मौतों का अनुमान लगाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अपनाई गई गणितीय मॉडलिंग कवायद अवैज्ञानिक है।

इसके साथ ही सरकार ने कहा कि भारत ने इस पद्धति पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की रिपोर्ट के अनुसार 16 जुलाई, 2022 तक, देश में कोविड-19 के कारण कुल 5,25,660 लोगों की मौत हुई।

कांग्रेस सदस्य दिग्विजय सिंह ने सवाल किया था कि क्या यह सच है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत में कोविड-19 से मरने वाले लोगों की संख्या 47 लाख बताई है और उसके वैज्ञानिकों ने भारत में कोविड-19 से निपटने के तरीकों को अवैज्ञानिक माना है।

पवार ने कहा कि डब्ल्यूएचओ ने गणितीय मॉडलिंग अभ्यास के आधार पर भारत में एक जनवरी 2020 से 31 दिसंबर 2021 के बीच प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोविड-19 महामारी से जुडी लगभग 47 लाख अतिरिक्त मौत होने का अनुमान लगाया है। उन्होंने कहा कि यह मुख्य रूप से सभी वजहों से होने वाली मौतों का एक अनुमान है जिनमें कोविड के कारण होने वाली मौतें भी शामिल हैं।

पवार ने कहा कि भारत ने डब्ल्यूएचओ द्वारा अपनाए गए ‘सभी के लिए एक ही साइज उपयुक्त’ दृष्टिकोण पर भी आपत्ति जताई थी क्योंकि जो छोटे देशों के लिए सच हो सकता है, उसे भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश पर लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ से अवैज्ञानिक दृष्टिकोण भी स्पष्ट करने को कहा गया था जिसमें उनके अनुमान केवल 17 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के आंकड़ों पर आधारित थे।

उन्होंने कहा कि भारत ने डब्ल्यूएवओ के अवैज्ञानिक मॉडलिंग दृष्टिकोण की प्रक्रिया, कार्यप्रणाली और परिणाम पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है।

भाषा

अविनाश माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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