(इंट्रो में बदलाव के साथ)
नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) बात 1950 के दशक की है जब भांगड़ा नृत्य को लोकप्रिय बनाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले दीपक बंधु गणतंत्र दिवस की परेड में अपना प्रदर्शन करने दिल्ली आए थे और युवा इंदिरा गांधी को उनका नृत्य इतना पसंद आया वह इन बंधुओं के नाटक रिहर्सल देखने कई बार उनके पास जाती थीं और वहां काफी देर तक रुकती थी। इस बात का खुलासा एक नयी पुस्तक में आता था।
इंदिरा गांधी को इतनी देर तक रुककर दीपक बंधुओं का भांगड़ा देखती थीं कि उनके पिता एवं तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सुरक्षाकर्मियों को उनसे (इंदिरा) से वापस घर चलने के लिए कहना पड़ता था।
देश के विभाजन के बाद के दौर में, मनोहर, गुरबचन और अवतार दीपक को भांगड़ा को उसके मौजूदा स्वरूप में पेश करने का श्रेय दिया जाता है।
जेवन दीपक ने अपनी किताब ‘‘ ‘महरोक्स: द स्टोरी ऑफ द कम्बोज, सिख एंड शहीद्स’ में लिखा है, ‘भारत सरकार की सूचना एवं प्रसारण इकाई को भांगड़ा नृत्य एवं दीपक बंधुओं के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने उनके कार्यक्रमों को कवर करने के लिए एक विशेष टीम भेजी। सुनाम (पंजाब) में भांगड़ा कार्यक्रम को कवर करने के लिए ‘धरती दी झंकार’ नामक एक विशेष वृत्तचित्र को मंजूरी दी गई। भांगड़ा के दुनिया में उच्च स्तर पर जाने के साथ ही सुनाम एक बार फिर चर्चा में था।’’
किताब के अनुसार 1953 से 1955 के बीच, पटियाला के महाराजा ने दीपक बंधुओं को गणतंत्र दिवस परेड में पीईपीएसयू (पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्य संघ) का प्रतिनिधित्व करने और भारत के राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सामने कार्यक्रम पेश करने के लिए भेजा था। आने वाले कलाकार तालकटोरा गार्डन में ठहरते थे, क्योंकि नए आजाद देश में देश भर से आए कलाकारों को ठहराने के लिए पर्याप्त भवन नहीं थे।
इसमें कहा गया है, ‘इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू पंजाब के इन युवकों से प्रभावित थीं… वह उनके तंबू में भी आती थीं, जहां वे ठहरे होते थे और उन्हें भांगड़ा का अभ्यास करते देखतीं और उनसे बातचीत भी करतीं। कभी-कभी, पंडित जी के सुरक्षाकर्मियों को उन्हें (इंदिरा) प्रधानमंत्री आवास वापस जाने के लिए अनुरोध भी करना पड़ता।’’
लेखक के अनुसार इंदिरा गांधी की कलाकारों खासकर मनोहर दीपक के साथ दोस्ती हो गयी थी जो उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद भी बनी रही।
इसमें लिखा गया है, ‘‘दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर कार्यक्रम पेश करने के दौरान उन्हें राष्ट्रपति भवन में आयोजित जलपान कार्यक्रम में भी आमंत्रित किया गया था। राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और प्रधानमंत्री नेहरू ने दीपक बंधुओं को संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए रजत पदक और अन्य सम्मानों से नवाजा था।’’
पुस्तक में कम्बोज लोगों का व्यापक इतिहास है और लेखक के अनुसार कम्बोज एक प्रसिद्ध आर्य जनजाति है।
भाषा अविनाश माधव
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