नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) विपक्षी नेताओं ने सोमवार को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर के बीच गठबंधन की आलोचना की और कहा कि ऐसे कदमों से वोट बंट सकते हैं तथा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले “धर्मनिरपेक्ष दल” कमजोर हो सकते हैं।
एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ गठबंधन किया है। 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना चार मई को होगी।
तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने कहा कि इससे “मुस्लिम समाज अलग-थलग पड़ सकता है।”
उन्होंने कहा, “ओवैसी की पार्टी वास्तव में भाजपा की मदद कर रही है। लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। उनके पास ताकत नहीं है और उन्हें वोट नहीं मिलेंगे।”
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने आरोप लगाया कि “कुछ लोगों ने धर्मनिरपेक्ष ताकतों को कमजोर करने का ठेका ले रखा है।”
कांग्रेस के एक अन्य सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने कहा कि गठबंधन करना राजनीतिक फैसला है, लेकिन ध्यान सांप्रदायिक ताकतों को हराने पर होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “कौन किससे गठबंधन करता है, यह उनका मामला है। लेकिन हमारा लक्ष्य सांप्रदायिक ताकतों को हराना है और इसके लिए कांग्रेस लगातार काम करती रहेगी।”
शिवसेना (उबाठा) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि एआईएमआईएम अक्सर भाजपा की मदद करती है।
उन्होंने कहा, “जब भी भाजपा मुश्किल में होती है, वह एआईएमआईएम को बुलाती है, जो उसके ‘स्पीड डायल’ पर रहती है। पार्टी उसे चुनाव में उतरने और जीत दिलाने के लिए आमंत्रित करती है।”
झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी ने एआईएमआईएम को भाजपा की “बी-टीम” बताया और आरोप लगाया कि वह चुनाव में सिर्फ विपक्ष के वोट बांटने के लिए उतरती है, जिससे भाजपा को फायदा होता है।
उन्होंने कहा, “यह हर जगह हो रहा है। आपने देखा होगा कि जहां भी एआईएमआईएम ने उम्मीदवार उतारे, वहां इसका फायदा भाजपा को मिला। यही वजह है कि कई राज्यों में उनके अपने समुदाय के लोग भी उन्हें समर्थन नहीं देते और उस पार्टी को वोट देते हैं जो जीत सकती है और भाजपा को हरा सकती है।”
माझी ने कहा, “बंगाल में लोगों ने ममता बनर्जी को चुना और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी उनका समर्थन किया क्योंकि वह जीत सकती थीं और भाजपा को हरा सकती थीं। लेकिन इस तरह एआईएमआईएम वोट काटती है, जिससे भाजपा को काफी फायदा होता है। इसलिए हम एआईएमआईएम को भाजपा की ‘बी-टीम’ मानते हैं।”
भाषा जोहेब नेत्रपाल
नेत्रपाल
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