कोलकाता, छह फरवरी (भाषा) आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं के एक मामले में पूर्व उपाधीक्षक अख्तर अली के खिलाफ एक विशेष सीबीआई अदालत ने शुक्रवार को गैर-जमानती वारंट जारी किया।
अली के वकील ने दावा किया कि वह अस्पताल में कथित भ्रष्टाचार मामले में ‘व्हिसलब्लोअर’ (भंडाफोड़ करने वाले) हैं, इसलिए कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। यह अस्पताल 2024 में एक स्नातकोत्तर प्रशिक्षु डॉक्टर से बलात्कार और उसकी हत्या के कारण सुर्खियों में रहा था।
अलीपुर अदालत में विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश ने अली के खिलाफ वारंट जारी करने का आदेश दिया। अली पर केंद्रीय एजेंसी ने संबंधित अवधि के दौरान निविदा प्रक्रिया में अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है।
अली अदालत में मौजूद नहीं थे। उनके वकील ने न्यायाधीश के सामने कहा कि वह बीमार हैं, जिसके कारण वह सुनवाई के दौरान अदालत में पेश नहीं हो पाए।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हाल में अली की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जो उस समय मेडिकल कॉलेज में उपाधीक्षक (गैर-चिकित्सा) थे।
अली ने तत्कालीन प्राचार्य संदीप घोष के कार्यकाल के दौरान आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया था और उनकी याचिका पर उच्च न्यायालय ने कथित भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच का आदेश दिया था।
सीबीआई ने अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं के सिलसिले में घोष और दो अन्य को गिरफ्तार किया था।
सीबीआई ने यह दावा करते हुए कि अली उस समय निविदा प्रक्रिया देख रहे थे, उन पर कुछ वेंडर को ठेके देने के लिए पैसे लेने का आरोप लगाया।
एजेंसी ने कहा कि याचिकाकर्ता मुख्य आरोपी संदीप घोष के समान ही हैसियत रखता है, जो लगभग डेढ़ साल से हिरासत में है।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने उच्च न्यायालय के सामने यह भी दावा किया कि अली ने सह-आरोपी से झगड़ा होने के बाद ही घोष के खिलाफ शिकायतें करना शुरू किया था।
भाषा वैभव दिलीप
दिलीप
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
