scorecardresearch
Thursday, 26 February, 2026
होमदेशमतदाता सूची पर्यवेक्षक मुरुगन और मोइत्रा में आरोप-प्रत्यारोप

मतदाता सूची पर्यवेक्षक मुरुगन और मोइत्रा में आरोप-प्रत्यारोप

Text Size:

कोलकाता, 26 फरवरी (भाषा) तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और मतदाता सूची पर्यवेक्षक सी एस मुरुगन के बीच मतदाता सूचियों के संशोधन में ‘माइक्रो-ऑब्जर्वर’ की भूमिका से जुड़े आरोपों को लेकर जुबानी जंग छिड़ गई।

यह विवाद 18 फरवरी को तब शुरू हुआ जब मोइत्रा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जा रहे हैं।

उन्होंने लिखा, ‘‘कृपया अपने मतदाता सूची पर्यवेक्षक, 2007 के आईएएस, टी बोर्ड के उपाध्यक्ष सी मुरुगन को नियंत्रित करें, जो उच्चतम न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करते हुए माइक्रो ऑब्जर्वर को गुप्त व्हॉट्सऐप ग्रुप पर गलत निर्देश दे रहे हैं।’’

तृणमूल सांसद ने एक फिल्म के किरदार की तस्वीर भी साझा की और कैप्शन लिखा ‘क्विक गन मुरुगन’।

मुरुगन के 26 फरवरी के ‘एक्स’ पर किए एक पोस्ट को मोइत्रा के पोस्ट का जवाब माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया।

उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल पर देर से किए एक जवाबी पोस्ट में कहा, ‘‘मेरे पास उतनी बंदूकें नहीं हैं जितनी तस्वीर में दिखाई गई हैं। हालांकि, मुझे तमिलनाडु में पुलिस सेवा में अपने साढ़े चार साल के प्रशिक्षण के दौरान अलग-अलग तरह की बंदूकें चलाने का प्रशिक्षण मिला था और मैंने उनका कानूनी और असरदार तरीके से इस्तेमाल किया था।’’

सोशल मीडिया पर मुरुगन के इस पोस्ट पर मोइत्रा की तरफ से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने दावा किया था कि मुरुगन व्हॉट्सऐप के जरिए ‘माइक्रो-ऑब्जर्वर’ को मतदाताओं के नाम हटाने के निर्देश दे रहे थे।

बनर्जी ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर ऐसे कथित संदेशों के स्क्रीनशॉट भी साझा किए थे।

बनर्जी ने आरोप लगाया था कि निर्वाचन आयोग के अधिकारी मतदाता सूचियों से लोगों के नाम हटाने में मदद के लिए माइक्रो-ऑब्जर्वर का इस्तेमाल उनकी तय भूमिका से परे जाकर कर रहे हैं, जो कथित तौर पर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन है।

उन्होंने कहा था, ‘‘इससे भी ज्यादा परेशान करने वाली प्रामाणिक खबरें हैं कि विशेष पर्यवेक्षक सी मुरुगन, जन्म प्रमाणपत्रों की स्वीकार्यता के बारे में निर्देश सीधे व्हॉट्सऐप ग्रुप में माइक्रो ऑब्जर्वर को दे रहे थे, ताकि हटाए गए नाम की संख्या बढ़ाई जा सके।’’

भाषा वैभव मनीषा

मनीषा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments