Sunday, 3 July, 2022
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नल से जल योजना के लिए केंद्रीय फंड की कोई कमी नहीं, 2024 तक 100% कवरेज का भरोसा: विनी महाजन

पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव का कहना है कि जैसे-जैसे प्रत्येक घर में नल के पानी के कनेक्शन की केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना गति पकड़ रही है, वैसे - वैसे राज्यों द्वारा धन के उपयोग में भी बढ़ोत्तरी हो रही और उन्हें केंद्रीय बजट में 45,000 करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन होने की उम्मीद है.

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नई दिल्ली: दिप्रिंट को दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में पेयजल और स्वच्छता विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ़ ड्रिंकिंग वाटर एंड सैनिटेशन-डीडीडब्ल्यूएस) की सचिव विनी महाजन ने बताया कि केंद्र सरकार के इस आश्वासन के साथ कि उसकी एक प्रमुख योजना मानी जाने वाली ‘हर घर नल से जल’ योजना के लिए धन की कोई कमी नहीं होगी, जल शक्ति मंत्रालय सभी राज्यों को 2024 के अंत तक हर ग्रामीण परिवार को एक सुचारू रूप से काम करने वाले नल का कनेक्शन प्रदान करने हेतु अपने-अपने बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने के लिए प्रेरित कर रहा है.

पंजाब की पूर्व मुख्य सचिव महाजन को एक महीने पहले (दिसंबर 2021) ही पेयजल योजना का संचालन कर रहे विभाग, डीडीडब्ल्यूएस में सचिव नियुक्त किया गया था.

महाजन ने कहा, ‘केंद्र सरकार ने हमें बताया है कि ‘नल से जल’ जैसी उच्च प्राथमिकता वाली योजना के लिए धन की कोई कमी नहीं है. हम वित्तीय वर्ष 2022-23 के केंद्रीय बजट में इस योजना के लिए लगभग 45,000-50,000 करोड़ रुपये के आवंटन की उम्मीद कर रहे हैं. 2021-22 के वित्तीय वर्ष में भी इसी तरह का आवंटन किया गया था, जिसका लगभग पूरा उपयोग हो चुका है.’

बजटीय आवंटन के अलावा, 15वें वित्त आयोग ने ग्राम पंचायतों को 2021-22 से 2025-26 तक गांवों में नल के पानी का कनेक्शन और स्वच्छता सुविधाएं प्रदान करने के लिए 1.42 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त अनुदान दिया है.

2019 से शुरू की गई और पांच वर्षों के भीतर लागू की जाने वाली ‘नल से जल’ योजना के लिए निर्धारित 3.6 लाख करोड़ रुपये में से 50 प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा देय होगा, जबकि शेष 50 प्रतिशत खर्च राज्य वहन करेंगे. केंद्र शासित प्रदेशों के लिए, केंद्र सरकार 100 प्रतिशत धन मुहैया कराएगी.

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महाजन ने कहा, ‘जैसे-जैसे यह योजना गति पकड़ रही है, इसके बजट का उपयोग करने के प्रति राज्यों की भूख भी बढ़ रही है. राज्य अब उन ग्रामीण परिवारों की जरूरतों को महसूस कर रहे हैं जिनके घरों में अभी भी नल का पानी उपलब्ध नहीं है. इसके अलावा, यह योजना ग्रामीण आबादी के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती है.’


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‘पानी के लिए पैसे खर्चने को तैयार हैं ग्रामीण परिवार’

इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण भारत के सभी घरों में व्यक्तिगत तौर पर दिए गए नल के कनेक्शन के माध्यम से पीने योग्य पेयजल उपलब्ध कराना है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2019 में कुल 19.22 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से केवल 3.23 करोड़ (17 प्रतिशत) के पास ही पानी के नल के कनेक्शन थे. मंत्रालय का लक्ष्य शेष 16 करोड़ (83 प्रतिशत) परिवारों को 2024 तक यह कनेक्शन उपलब्ध कराना है.

मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि अगस्त 2019 में ‘नल से जल’ योजना के शुभारंभ के बाद से लगभग 8.8 करोड़ परिवारों को सुचारू रूप से काम कर रहे नल का कनेक्शन प्रदान किए गए हैं, एक ओर जहां हरियाणा, गोवा और तेलंगाना जैसे राज्यों तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, पुडुचेरी, दमन और दीव और दादरा और नगर हवेली जैसे केंद्र शासित प्रदेशों ने 100 प्रतिशत घरों में नल के पानी के कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है, वहीं देशभर के कुल 96 जिलों में इस योजना के तहत शत प्रतिशत नल-जल कनेक्शन लगा दिए गए हैं.

यह योजना एक अनूठे मॉडल पर आधारित है, जहां ग्रामीणों की सदस्यता वाली ‘पानी समितियां’ यह तय करेंगी कि वे अपने द्वारा उपभोग किए जाने वाले पानी के लिए कितना भुगतान करेंगे. पर वे जो भी टैरिफ (भुगतान दर) तय करते हैं वह गांव के सभी लोगों के लिए एक समान नहीं होगा. महाजन ने कहा कि जिनके बड़े घर हैं वे अधिक भुगतान करेंगे, जबकि गरीब परिवार वाले घर या ऐसे घर जहां कोई कमाने वाला सदस्य नहीं है, को इससे छूट दी जाएगी.

डीडीडब्ल्यूएस सचिव ने आगे कहा कि अधिक-से-अधिक जिलों में 100 प्रतिशत पानी के नल के कनेक्शन मिलने की शुरआत के साथ, कई गांवों में जल शुल्क एकत्र करने वाले काम के रूप में अगला चरण भी शुरू हो गया है.

उन्होंने आगे कहा, ‘अच्छी बात यह है कि जैसे-जैसे अधिक से अधिक घर पानी के नल के कनेक्शन से जुड़ रहे हैं और उन्हें नियमित रूप से पानी मिल रहा है, वैसे-वैसे इनमें भुगतान करने की इच्छा भो हो रही है. यह काम अभी भी प्रगति पर है.’

पानी की गुणवत्ता के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट

महाजन ने कहा कि मुख्य चुनौती इतनी बड़ी योजना को समयबद्ध तरीके से अंजाम देना है. उन्होंने कहा, ‘लेकिन अच्छी बात यह है कि उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ जैसे राज्य, जो निम्न स्तर वाले आधार से शुरू हुए थे, वे भी अब सफलता हासिल कर रहे हैं. सभी राज्य अपने दृष्टिकोण के साथ बहुत सकारात्मक हैं.’

हालांकि कोविड -19 महामारी से इसका काम कुछ हद तक प्रभावित हुआ है, मगर महाजन ने कहा कि वह 2024 के अंत तक हर ग्रामीण घर में सुचारु रूप से काम कर रहे पानी के नल का कनेक्शन उपलब्ध कराने के लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रति आशान्वित हैं.

डीडीडब्ल्यूएस सचिव ने कहा, ‘हम अब एक दिन में लगभग 60,000 नए पानी के नल के कनेक्शन प्रदान कर रहे हैं. हमारा लक्ष्य इसे बढ़ाकर एक दिन में 1 लाख नए कनेक्शन तक करना है.’

महाजन ने आगे बताया कि नए पानी के नल का कनेक्शन प्रदान करने के साथ-साथ, विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता की जांच करने के लिए और यह पता लगाने के लिए कि क्या पानी का प्रवाह नियमित है अथवा क्या यह सही दबाव के साथ है, एक थर्ड पार्टी ऑडिट (तृतीय पक्ष द्वारा लेखा परिक्षण) भी किया जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘थर्ड पार्टी ऑडिट समय-समय पर समवर्ती (साथ-साथ चलने वाले) रूप से शुरू होगा. इससे हमें किसी भी कमी या खामी को दूर करने में मदद मिलेगी.’

घरों में आपूर्ति किए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता की निगरानी के लिए, जल शक्ति मंत्रालय ने व्यापक दिशानिर्देश बनाए हैं जो अगले वर्ष राज्यों, जिलों और ब्लॉकों के स्तर पर सरकार से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की स्थापना को अनिवार्य बनाते हैं.

ऐसी सभी प्रयोगशालाओं को नेशनल एक्रीडिएशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेट्रीज द्वारा मान्यता प्राप्त होना चाहिए और उन्हें जनता को यह सुनिश्चित करने के लिए अपने पानी के नमूनों का परीक्षण करवाने की अनुमति भी देनी होगी कि क्या वे निर्धारित गुणवत्ता का अनुपालन करते हैं.

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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