Friday, 27 May, 2022
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सेंट्रल विस्टा—1,200 करोड़ की लागत वाले एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव में नया PMO बनाने की हो रही तैयारी

केंद्रीय लोक निर्माण विभाग जल्द ही इस एन्क्लेव के निर्माण के लिए निविदा जारी करेगा, जहां कैबिनेट सेक्रेटरिएट और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सेक्रेटरिएट भी बनाया जाना है.

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नई दिल्ली: केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) जल्द ही राजधानी में एक नए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के लिए वित्तीय निविदा जारी करेगा. नया पीएमओ लगभग 1,200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले एक एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव—जिसमें कई सरकारी दफ्तरों को समायोजित किया जाएगा—का हिस्सा होगा.

लाल और पीले रंग के धौलपुर बलुआ पत्थरों—जिनका इस्तेमाल नए संसद भवन में भी किया गया है—से निर्मित होने वाला नया पीएमओ उस जगह बनाया जाएगा जहां अभी साउथ ब्लॉक के पास विभिन्न हटमेंट और बैरकों में रक्षा मंत्रालय के दफ्तर स्थित थे. रक्षा मंत्रालय के ये दफ्तर पहले ही अफ्रीका एवेन्यू और कस्तूरबा गांधी मार्ग पर स्थित दो नए ऑफिस कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट किए जा चुके हैं.

पीएमओ हाई-सिक्योरिटी एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव का हिस्सा होगा, जिसमें कैबिनेट सचिवालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) के कार्यालय और पीएम आवास से जुड़े कार्यालय भी स्थापित किए जाएंगे.

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना को डिजाइन करने की निविदा हासिल करने वाली गुजरात की कंपनी एचपीसी डिजाइन, प्लानिंग एंड मैनेजमेंट लिमिटेड के एक प्रवक्ता ने दिप्रिंट को बताया, ‘विदेशी मेहमानों की मेजबानी के लिए बनने वाली इमारत इंडिया हाउस भी एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव का ही हिस्सा होगी.’

सरकारी सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री के लिए एक नया आवास बनाने की भी तैयारी है, लेकिन इसके डिजाइन को अंतिम रूप दिया जाना अभी बाकी है. सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन निर्माण शाखा सीपीडब्ल्यूडी जल्द ही एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव के लिए वित्तीय निविदाएं जारी करेगी. सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना आवास मंत्रालय के तहत ही चल रही है.

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आवास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘पूर्व-योग्यता प्रक्रिया का पहला चरण पहले से ही जारी है. चूंकि ये एक हाई-सिक्योरिटी प्रोजेक्ट है, इसलिए हम दो चरणों वाली निविदा प्रक्रिया अपना रहे हैं. पिछले साल नवंबर में टेक्निकल बिड जारी की गई थी. केवल बोली योग्य पाए गए बोलीदाताओं को ही वित्तीय निविदा में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाएगी.’

एक बार टेंडर हो जाने और काम शुरू हो जाने के बाद एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव प्रोजेक्ट को पूरा करने में 24 महीने का समय लगेगा. मौजूदा पीएमओ साउथ ब्लॉक में स्थित है, जिसे अंततः एक म्यूजियम में तब्दील कर दिया जाएगा.


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कैसा होगा नया पीएमओ और एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव

प्रोजेक्ट आर्किटेक्ट्स के मुताबिक, एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव में कई इमारतें होंगी, जो कि त्रिकोणीय भूखंडों में दो तरफ से खुली होंगी. इसमें तमाम दफ्तर एक ही जगह पर होंगे जिसमें पीएमओ, कैबिनेट सचिवालय और एनएससीएस के ऑफिस शामिल हैं.

एचसीपी प्रवक्ता ने कहा, ‘इससे तमाम महत्वपूर्ण गतिविधियां एक ही कॉम्प्लेक्स में चल सकेंगी. अभी ये दफ्तर अलग-अलग जगहों पर स्थित हैं जिससे कर्मचारियों के बीच समन्वय में दिक्कत आती है और इनकी आवाजाही की वजह से शहर की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती है.’

प्रधानमंत्री कार्यालय अंदर के आंगन परिसर में आयताकार बिल्डिंग में बनाया जाएगा. राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय एक बगीचे में एक सीध में बनाया जाएगा.

एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव में शामिल सभी भवनों में करीब 1,700 कर्मचारियों के बैठने की जगह होगी, जिसे हर तरह से आवश्यक सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाएगा. प्रवक्ता के अनुसार नई इमारत में नवीनतम बुनियादी ढांचा होगा और ये हर तरह की प्रौद्योगिकी से लैस होगी.

प्रत्येक भवन यानी प्रधानमंत्री कार्यालय, एनएससीएस, कैबिनेट सचिवालय और इंडिया हाउस में उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कॉफ्रेंस रूम बनाए जाएंगे. सभी भवनों में वर्कप्लेस के लिए ओपन फ्लोर लेआउट होगा.

एचसीपी प्रवक्ता ने बताया कि एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव एक ग्रीन कॉम्प्लेक्स होगा, जिसकी इमारत इस तरह से डिजाइन की जाएगी जो कि एनर्जी एफिशिएंट हो. प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन पर्याप्त ढंग से मिले, इसके लिए इमारत के अंदर कई आंगन बने होंगे.

प्रवक्ता ने बताया, ‘बाहरी दीवारें मोटी होंगी और गर्मी का असर कम करने खुली जगहों पर दो लेयर (कांच और स्क्रीन) का इस्तेमाल किया जाएगा. छतों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाएगा. सीवेज शोधन योजनाओं से मिलने वाले पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए किया जाएगा. इमारतों में ऊर्जा बचाने में सक्षम एयर कंडीशनिंग सिस्टम और केंद्रीकृत कचरा निपटान प्रणाली का उपयोग किया जाएगा.’

ऑफिस कॉम्प्लेक्स, उपराष्ट्रपति भवन पर भी चल रहा काम

फिलहाल सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत राजपथ पर नई संसद और सेंट्रल विस्टा एवेन्यू बनाने का काम चल रहा है. सीपीडब्ल्यूडी ने तीन ऑफिस कॉम्प्लेक्स के निर्माण के लिए निविदाएं भी जारी की हैं, जो कि नए कॉमन सेंट्रल सेक्रेटिएट का हिस्सा होंगे, जिनका निर्माण उसी स्थान पर होगा जहां पहले इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र होता था. नए उप राष्ट्रपति भवन के लिए भी टेंडर जारी हो चुका है.

दिल्ली के पावर कॉरिडोर की सूरत पूरी तरह बदल देने की नरेंद्र मोदी सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में एक सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट—जिसे काफी आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा है—में शास्त्री भवन, निर्माण भवन, उद्योग भवन, कृषि भवन और वायु भवन समेत तमाम सरकारी कार्यालयों को समायोजित करने के लिए 10 नए बिल्डिंग ब्लॉक भी शामिल होंगे.


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