गुरुग्राम: पहलवान और कांग्रेस विधायक विनेश फोगाट मंगलवार सुबह बिना मुकाबला खेले हरियाणा लौट आईं. उत्तर प्रदेश के गोंडा में आयोजित भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) सीनियर ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट 2026 में उन्हें हिस्सा नहीं लेने दिया गया. फेडरेशन ने एंटी-डोपिंग मामले में जारी शो-कॉज नोटिस का हवाला देते हुए बैन जारी रखा.
विनेश सोमवार को मंगलवार को होने वाले अपने मुकाबलों से पहले दस्तावेज़ सत्यापन के लिए गोंडा पहुंची थीं. जब वह शाम 4 बजे WFI ट्रेनिंग सेंटर पहुंचीं, तो वहां ताला लगा था. इंतज़ार कर रहे पत्रकारों के सामने उन्होंने फोन से WFI अध्यक्ष संजय सिंह को कॉल करने की कोशिश की, लेकिन फोन व्यस्त था.
जब एक रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि समस्या क्या है, तो उन्होंने कहा, “इन बेशर्म लोगों को इससे क्या फर्क पड़ता है कि किसी को क्या परेशानी है.”
इसके बाद वह अयोध्या चली गईं और मंगलवार सुबह हरियाणा लौट आईं.
विनेश ने 27 अप्रैल को ही टूर्नामेंट के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन 9 मई को, यानी उनके मुकाबलों से तीन दिन पहले, WFI ने उन्हें 15 बिंदुओं वाला शो-कॉज नोटिस जारी कर दिया.इसमें कथित एंटी-डोपिंग उल्लंघन का आरोप लगाया गया और उन्हें टूर्नामेंट में भाग लेने से रोक दिया गया.
यह नोटिस अंतर्राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (आईटीए) की शिकायत के बाद जारी हुआ.
आईटीए ने कहा था कि 18 दिसंबर 2025 को जब डोप टेस्ट होना था, उस समय विनेश बेंगलुरु के बताए गए पते पर मौजूद नहीं थीं.
विनेश ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने 19 जनवरी तक आईटीए के नोटिस का जवाब दे दिया था. उन्होंने बताया कि वह हरियाणा के जुलाना से मौजूदा विधायक हैं और 18 दिसंबर को हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में शामिल होने के लिए बेंगलुरु से चंडीगढ़ जा रही थीं.
उन्होंने यह भी कहा कि वह हाल ही में मां बनी हैं और समय पर अपनी लोकेशन अपडेट नहीं कर सकीं.आईटीए ने 4 मई के अपने नोटिस में इसे पिछले 12 महीनों में विनेश की पहली “whereabouts failure” यानी तय स्थान पर मौजूद न रहने की घटना बताया.
अलग निशाना?
लेकिन यहीं से विवाद और गहरा हो जाता है. वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) के नियमों के तहत एक बार “whereabouts failure” होने पर किसी खिलाड़ी पर बैन नहीं लगता. किसी एथलीट को अधिकतम दो साल के निलंबन की सज़ा तभी दी जा सकती है, जब 12 महीने के भीतर उसके तीन whereabouts failure हों. पहली गलती सिर्फ एक चेतावनी मानी जाती है और रिकॉर्ड में दर्ज होती है.
11 मई को अपने एक्स अकाउंट पर आईटीए का एक ईमेल शेयर करते हुए विनेश ने लिखा, “मुझे आईटीए की तरफ से 1 जनवरी 2026 से खेलने की लिखित अनुमति दी गई थी. मुझे 28 अप्रैल 2026 को नंदिनी नगर, गोंडा में होने वाले 2026 सीनियर ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट के लिए रजिस्ट्रेशन करने की अनुमति भी दी गई थी. मैं आज गोंडा खेलने आई थी, लेकिन मुझे न तो अपना वेरिफिकेशन पूरा करने दिया गया और न ही यहां ट्रेनिंग हॉल इस्तेमाल करने दिया गया. मुझे कोई खास सुविधा नहीं चाहिए, मैं सिर्फ मेरिट के आधार पर खेलना चाहती हूं.”
इससे कुछ घंटे पहले, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक मीडिया बयान में विनेश ने कहा कि WFI ने उनके ब्रेक और वापसी की समयसीमा को गलत तरीके से समझा. फोगाट ने कहा कि उन्हें आईटीए जिसे अंतरराष्ट्रीय रेसलिंग महासंघ UWW ने नियुक्त किया है—की तरफ से आधिकारिक पुष्टि मिली थी कि वह 1 जनवरी 2026 से आधिकारिक ट्रेनिंग और प्रतियोगिता में वापसी के लिए योग्य हैं, न कि 26 जून 2026 से, जैसा WFI के नोटिस में कहा गया है.
उन्होंने कहा कि सितंबर 2024 की whereabouts failure और दिसंबर 2025 में डोप टेस्ट मिस होने की घटना, National Anti-Doping Rules 2021 या WADA Code 2021 के तहत एंटी-डोपिंग नियमों का उल्लंघन नहीं है. उन्होंने कहा कि दोनों मामलों में उन्होंने संबंधित अधिकारियों के साथ तुरंत सहयोग किया था.
WFI के इस आरोप पर कि उन्होंने 2024 के चयन ट्रायल्स में NIS पटियाला में दो अलग-अलग वेट कैटेगरी में हिस्सा लेकर नियमों का उल्लंघन किया, विनेश ने कहा कि उस समय WFI चला रही एड-हॉक कमेटी उनकी भागीदारी से पूरी तरह अवगत थी और उसने कोई आपत्ति नहीं जताई थी. फोगाट ने कहा कि वह तय 14 दिनों की अवधि के भीतर सभी सबूतों के साथ विस्तृत जवाब दाखिल करेंगी और 2026 एशियन गेम्स व अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं.
WFI द्वारा सिर्फ इसी पहली और एकमात्र failure के आधार पर विनेश को प्रतियोगिता से बाहर करने के फैसले ने खेल जगत में कई सवाल खड़े कर दिए हैं. लोग पूछ रहे हैं कि क्या फेडरेशन घरेलू नियमों को चुनिंदा तरीके से लागू कर रहा है या फिर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई कर रहा है.
‘देखो, लेकिन हिस्सा मत लो’
WFI अध्यक्ष संजय सिंह ने मंगलवार को मीडिया से कहा कि विनेश फिलहाल किसी भी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकतीं और नोटिस के सभी 15 बिंदुओं पर संतोषजनक जवाब मिलने के बाद एक कमेटी उनके मामले पर फैसला करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि वह एक पहलवान के तौर पर आकर प्रतियोगिता देख सकती हैं, लेकिन भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
पूर्व ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक, जो 2023 में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान विनेश के साथ बैठी थीं, मंगलवार को विनेश फोगाट के समर्थन में सामने आईं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में मलिक ने कहा कि मीडिया उनसे लगातार प्रतिक्रिया मांग रहा था और वह पहले दुविधा में थीं, क्योंकि विनेश अब एक राजनीतिक पार्टी की विधायक हैं, जबकि वह खुद किसी राजनीतिक विचारधारा से जुड़ी नहीं हैं.
फिर उन्होंने बोलने का फैसला किया. “दुनिया के कई देशों में सरकारें नियमों में बदलाव करती हैं ताकि मां बनने के बाद महिला खिलाड़ी वापसी कर सकें, लेकिन हमारे देश में WFI विनेश फोगाट की वापसी रोकने के लिए हर कोशिश कर रहा है.”
मलिक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खेल मंत्री से हस्तक्षेप करने और विनेश को ट्रायल्स में हिस्सा लेने की अनुमति देने की अपील की.
गोंडा टूर्नामेंट विनेश के लिए एक खास निजी मायने भी रखता है. 3 मई को जारी एक वीडियो में उन्होंने खुद कहा था कि गोंडा पूर्व बीजेपी सांसद बृज भूषण शरण सिंह का गढ़ है, जिनके खिलाफ वह यौन उत्पीड़न मामले में शिकायत करने वाली छह महिलाओं में से एक हैं. यह मामला फिलहाल कोर्ट में चल रहा है. उन्होंने तब कहा था कि चल रही गवाही के बीच उनके गढ़ में जाकर खेलना मुश्किल होगा. हालांकि, 27 अप्रैल को रजिस्ट्रेशन कराने के बाद उन्होंने आखिरकार हिस्सा लेने का फैसला किया.
वीकेंड में विनेश और बृज भूषण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शायरी के जरिए एक-दूसरे पर तंज कसे. विनेश ने उथल-पुथल भरे हालात, अपने चरित्र पर उठते सवालों और फिर भी अपने हौसले के टूटने से इनकार की बात लिखी. जवाब में बृज भूषण ने एक शेर लिखा, जिसमें कहा गया कि शोहरत कुछ समय की होती है और जिस डाल पर इंसान बैठा होता है, वह कभी भी टूट सकती है.
विनेश ने 12 दिसंबर 2025 को प्रतिस्पर्धी कुश्ती में वापसी का ऐलान किया था और कहा था कि वह 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक में हिस्सा लेना चाहती हैं.
उन्होंने 8 अगस्त 2024 को खेल से संन्यास ले लिया था. उससे एक दिन पहले उन्हें पेरिस ओलंपिक फाइनल से सिर्फ 100 ग्राम ज्यादा वजन होने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया था. उसी दिन उन्होंने तीन मुकाबले जीते थे, जिनमें एक क्यूबा की पहलवान के खिलाफ सेमीफाइनल जीत भी शामिल थी.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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