गोपेश्वर, 18 जनवरी (भाषा) उत्तराखंड में इस वर्ष के लिए प्रस्तावित सुप्रसिद्ध नंदादेवी राजजात यात्रा अब 2027 में होगी। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
चमोली जिले के कर्णप्रयाग में रविवार को राजजात समिति की बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर ने बताया कि इस साल होने वाली नंदा राजजात यात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है और अब यह 2027 में होगी।
उन्होंने बताया कि समिति ने यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया।
हिमालय के ऊंची-ऊंची चोटियों और बुग्यालों से गुजरने वाली इस धार्मिक यात्रा को सबसे दुर्गम व लंबी पैदल देवयात्रा माना जाता है, जिसमें 22 से अधिक पड़ावों पर बसेरा करने के बाद यात्रा संपन्न होती है।
यात्रा 12 साल के अंतराल के बाद होती है, जो 2014 के बाद इस साल अगस्त-सितंबर में होनी थी।
डॉ. कुंवर ने बताया कि इस वर्ष यात्रा का मुहूर्त 19-20 सितंबर को पड़ रहा है और इस दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौसम काफी प्रतिकूल रहता है।
उन्होंने बताया, “इस दौरान ओलावृष्टि, बर्फवारी और बारिश की आशंका रहती है, ठंड का प्रकोप बढ़ जाता है तथा अब तक इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से संबंधित निर्माण कार्य भी नहीं हो पाए हैं। ऐसी परिस्थितियों में नंदा राजजात यात्रा को सुरक्षित कर पाना संभव नहीं लग रहा था, इसलिए उसे इस साल स्थगित कर दिया गया।”
अधिकारी ने बताया कि नंदादेवी राजजात यात्रा को अगले वर्ष आयोजित करने के लिए नौटी गांव में आगामी 23 जनवरी को बसंत पंचमी के दिन मनौती मांगी जाएगी और कार्यक्रम की विधिवत घोषणा की जाएगी।
डॉ. कुंवर ने बताया कि इसमें गढ़वाल के राजवंशी कांसुवा गांव के राजकुंवर श्री नंदादेवी मंदिर में नंदा राजजात की मनौती करेंगे और ज्योतिष गणना के अनुसार आगे के कार्यक्रम की घोषणा करेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि इस साल की यात्रा के लिए समिति ने अब तक कोई अधिकृत कार्यक्रम तय नहीं किया था और बसंत पंचमी को परंपरागत पूजा पाठ व आयोजन के बाद ही इसकी घोषणा होनी थी।
भाषा सं दीप्ति जितेंद्र
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