नैनीताल, 13 मार्च (भाषा) उत्तराखंड कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के दो वरिष्ठ अधिकारियों नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में अपने वर्तमान रैंक से निचले पद पर प्रतिनियुक्ति को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से इस मामले में जवाब तलब किया। याचिका के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक आदेश के तहत 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) के रूप में तैनात किया गया है जबकि 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुण मोहन जोशी को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में डीआईजी के पद पर नियुक्त किया गया है।
दोनों अधिकारी वर्तमान में उत्तराखंड पुलिस में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) के पद पर कार्यरत हैं।
याचिकाकर्ताओं ने यह कहते हुए प्रतिनियुक्ति को चुनौती दी कि उन्होंने कभी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन नहीं किया और न ही इसके लिए अपनी सहमति दी।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि डीआईजी जैसे निचले पद पर प्रतिनियुक्ति सेवा नियमों के भी विरुद्ध है।
याचिका में कहा गया कि अधिकारियों ने पहले ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए अनिच्छा व्यक्त की थी और इसकी वजह से उन्हें पांच वर्ष के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वंचित भी कर दिया गया था।
इसके बावजूद, राज्य सरकार ने 16 फरवरी 2026 को उनके नाम केंद्र सरकार को भेज दिए, जिसके बाद उनकी प्रतिनियुक्ति के आदेश जारी किए गए।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि अगर अधिकारियों को इस निर्णय पर आपत्ति है तो उन्हें केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) का रुख करना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने हालांकि दलील दी कि चूंकि प्रतिनियुक्ति का प्रस्ताव राज्य सरकार की ओर से भेजा गया था इसलिए इस मामले को उच्च न्यायालय के समक्ष लाना उचित है।
खंडपीठ ने दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार को इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
भाषा सं दीप्ति जितेंद्र
जितेंद्र
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
