नैनीताल, 17 मार्च (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी को उनकी इच्छा के विरुद्ध निचले पद पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र और राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सरकारों से स्पष्ट करने को कहा कि अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की पहल केंद्र सरकार की ओर से हुई या राज्य सरकार ने स्वयं उनके नाम भेजे।
अदालत ने याचिकाकर्ताओं को राज्य सरकार के हलफनामे पर प्रत्युत्तर शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश भी दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
उत्तराखंड कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के दोनों अधिकारियों ने याचिका दायर कर केंद्रीय बलों में अपने वर्तमान रैंक से निचले पद पर प्रतिनियुक्ति को चुनौती दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के तहत 2005 बैच की अधिकारी नीरू गर्ग को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में और 2006 बैच के अरुण मोहन जोशी को सीमा सुरक्षा बल में उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) के पद पर तैनात किया गया है।
दोनों अधिकारी वर्तमान में उत्तराखंड पुलिस में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) के पद पर कार्यरत हैं। पुलिस अधिकारियों ने दलील दी है कि उन्होंने न तो केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन किया और न ही इसके लिए सहमति दी, फिर भी उन्हें निचले पद पर भेजा जा रहा है।
याचिका में कहा गया है कि अधिकारियों ने पहले केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए अनिच्छा जताई थी, जिसके बाद उन्हें पांच वर्ष के लिए इससे वंचित भी किया गया था। इसके बावजूद राज्य सरकार ने 16 फरवरी 2026 को उनके नाम केंद्र को भेज दिए, जिसके बाद प्रतिनियुक्ति के आदेश जारी हुए।
पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने कहा था कि अधिकारियों को इस मामले में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण का रुख करना चाहिए, जबकि याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि चूंकि प्रस्ताव राज्य सरकार की ओर से गया, इसलिए मामला उच्च न्यायालय के समक्ष विचारणीय है।
भाषा
सं, दीप्ति रवि कांत
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