नयी दिल्ली, 24 अक्टूबर (भाषा) रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि भारतीय नौसेना का समुद्र के अंदर काम करने की क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक अहम उपलब्धि हासिल हुई है, जिसके तहत स्वदेशी ‘एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन’ (एआईपी) प्रणाली के दूसरे चरण की शुरुआत की गई है।
मंत्रालय ने कहा कि एआईपी प्रणाली, डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की वायुमंडलीय ऑक्सीजन पर निर्भरता को कम करके पानी के भीतर उनके बने रहने की क्षमता को बढ़ाती है।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि अगले चरण में, एआईपी ऊर्जा मॉड्यूल को बिजली उत्पादन के लिए सक्रिय किया जाएगा और नौसेना के प्रोटोकॉल के अनुसार इसका गहन परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद, 2027 की शुरुआत में इसे ‘मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड’ को सौंप दिया जाएगा, ताकि इसे कलवरी-श्रेणी की पनडुब्बी में लगाया जा सके।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उद्घाटन समारोह शनिवार को गुजरात के हजीरा में लार्सन एंड टुब्रो के ‘एएम नाइक हेवी इंजीनियरिंग कॉम्प्लेक्स’ में आयोजित किया गया।
इसमें कहा गया है कि, ‘‘भारतीय नौसेना की पानी के भीतर काम करने की क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। इसके तहत, डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) की ‘नेवल मैटेरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी’ द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित एआईपी प्रणाली के ऊर्जा मॉड्यूल के लिए दूसरे चरण के कार्य की शुरुआत की गई है।’’
भारतीय नौसेना के ‘चीफ ऑफ मैटेरियल’, वाइस एडमिरल बी. शिवकुमार और डीआरडीओ के महानिदेशक (नौसैनिक प्रणालियां और सामग्री), आर. बालमुरलीकृष्णन भी हजीरा में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
भाषा सुभाष पवनेश
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