लखनऊ, 11 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिये बुधवार को विधानमंडल में प्रस्तुत बजट को जन हितकारी बताते हुए कहा कि पिछले नौ वर्षों के उनके कार्यकाल में इस राज्य ने ‘पॉलिसी पैरालीसिस’ की स्थिति से उबरकर अपने प्रति दुनिया का नजरिया बदलते हुए खुद को असीमित क्षमताओं वाले राज्य के रूप में प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का बजट उन्हीं भावों का प्रतिनिधित्व करता है।
‘पॉलिसी पैरालीसिस’ से आशय सरकार या प्रशासन की उस स्थिति से है जब वह दबाव, असमंजस या अन्य राजनीतिक कारणों से आवश्यक नीतिगत फैसले लेने के प्रति उदासीन या असमर्थ हो।
मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिये नौ लाख 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट प्रस्तुत करने के बाद आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि पिछले नौ वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश के बजट के आकार में तीन गुने से अधिक की वृद्धि हुई है।
उन्होंने दावा करते हुए कहा, ”उत्तर प्रदेश ने पिछले नौ वर्षों के दौरान खुद के प्रति धारणा बदलने में सफलता प्राप्त की है। उत्तर प्रदेश ने ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ से उबरकर असीमित क्षमताओं वाले राज्य के रूप में खुद को प्रस्तुत किया है। आज का यह बजट उन्हीं भावों का प्रतिनिधित्व भी करता है।”
आदित्यनाथ ने कहा कि यह बजट ‘सुरक्षित नारी, सक्षम युवा, खुशहाल किसान और हर हाथ को काम, तकनीकी निवेश से समृद्ध होता उत्तर प्रदेश’ की थीम पर आधारित है। यह बजट नौ वर्ष के नवनिर्माण की एक नई गाथा को देशवासियों के सामने प्रस्तुत करता है।
उन्होंने कहा, ”इस बजट में 43 हजार 565 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि केवल नई योजनाओं के लिए प्रस्तावित की गई है। इसके अलावा, दो लाख करोड रुपये से अधिक की धनराशि पूंजीगत व्यय के लिए है। परिसंपत्तियों के नवनिर्माण, मूलभूत ढांचे के विकास और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में इसकी बहुत भूमिका होती है और यहीं से रोजगार का सृजन भी होता है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में अलग-अलग विभागों के लिए सभी बजट प्रावधानों में काफी वृद्धि की गई है।
आदित्यनाथ ने कहा कि यह उनकी सरकार का दसवां बजट है और पहली बार हुआ है जब किसी मुख्यमंत्री को दसवां बजट प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि इन नौ वर्षों में एक भी नया कर नहीं लगाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीसरी प्रमुख बात यह है कि उत्तर प्रदेश में जो भी कर चोरी या ‘लीकेज’ होती थी, उन सबको रोक कर कुशल वित्तीय प्रबंधन के माध्यम से उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य से भारत की अर्थव्यवस्था के एक ‘ब्रेकथ्रू’ के रूप में प्रस्तुत करते हुए राजस्व आधिक्य वाले राज्य के रूप में पेश करने में सफलता प्राप्त हुई है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश की ऋणग्रस्तता 30 प्रतिशत से भी अधिक थी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने अगले दो-तीन वर्षों के अंदर इसे घटाकर 27 प्रतिशत तक लाने में सफलता प्राप्त की थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड कालखंड में यह सीमा बढ़ी थी मगर अब इसे फिर से 27 प्रतिशत तक लाने में सफलता प्राप्त हुई है। इस वित्तीय वर्ष में यह लक्ष्य है कि इसे 23 प्रतिशत तक लाया जाए।
उन्होंने कहा कि बिना अतिरिक्त कर लगाए मूलभूत ढांचे समेत तमाम क्षेत्रों की जनकल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ते और विकास के नित्य नए सोपान स्थापित करते हुए उत्तर प्रदेश जिस दिशा में आगे बढ़ा है और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है, उसके बल पर उत्तर प्रदेश आज देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में बेरोजगारी की दर 17 से 19 प्रतिशत थी जिसे उनकी सरकार घटाकर 2.24 प्रतिशत तक लाने में सफल हुई है। युवाओं के रोजगार पर विशेष रूप से ध्यान देते हुए एमएसएमई स्टार्टअप, एक जिला-एक उत्पाद और स्थानीय उद्यमियों को विकसित करते हुए निवेश की वृद्धि योजना के साथ उत्तर प्रदेश को निवेश का गंतव्य बनाने के साथ-साथ रोजगार सृजन करने वाले राज्य के रूप में भी आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि उभरती हुई प्रौद्योगिकियों को लेकर भी बजट में बड़ी घोषणाएं की गयी हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता या अन्य क्षेत्रों में कार्य करने के लिए डाटा सेंटर क्लस्टर की स्थापना के लिए भी बजट में धनराशि की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने अच्छी कानून-व्यवस्था को उन्नति की गारंटी बताते हुए कहा कि हर व्यक्ति सुरक्षा की गारंटी चाहता है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज वही गारंटी दे रहा है। सुरक्षा, स्मार्ट पुलिसिंग और त्वरित न्याय व्यवस्था नागरिकों के साथ-साथ निवेशकों को भी सुरक्षित और भरोसेमंद वातावरण देने में बड़ी भूमिका का निर्वहन करती है। इससे प्रदेश में रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।
उन्होंने कहा कि अन्नदाता के रूप में किसान भारत जैसे कृषि प्रधान देश की अर्थव्यवस्था और उसके विकास की धुरी है। किसान केवल लाभार्थी नहीं हैं बल्कि यह विकास के भागीदार भी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को अन्नदाता से उद्यमी बनने की दिशा में क्या नए प्रयास हो सकते हैं और वे किस तरह विकास की यात्रा में सक्रिय साझेदार बनें, इसके वास्ते कृषि को आमदनी आधारित एवं मूल्यवर्द्धन मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने के लिए इस बजट में प्रावधान किया गया है।
भाषा सलीम
सिम्मी संतोष
संतोष
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