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Friday, 23 October, 2026
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उप्र सरकार गन्ने का दाम 600 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक करे,किसानों का बकाया भुगतान करे: टिकैत

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(फोटो के साथ)

लखनऊ, 23 अक्टूबर (भाषा) भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता राकेश टिकैत ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार से गन्ने का दाम 600 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक करने, किसानों के बकाया भुगतान का निपटारा करने और धान की लाभकारी दर पर खरीद सुनिश्चित करने की मांग की।

2020-21 के कृषि कानून विरोधी आंदोलन के प्रमुख चेहरे रहे भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता टिकैत ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले किसानों की मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन फिर से तेज करने का आह्वान भी किया।

यह घटनाक्रम राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) विधायक दल के नेता राजपाल सिंह बालियान द्वारा बढ़ती उत्पादन लागत को देखते हुए 2026-27 के पेराई सत्र के लिए गन्ना मूल्य वृद्धि की मांग को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन सौंपे जाने के एक दिन बाद सामने आया है।

यहां डालीबाग में गन्ना संस्थान में आयोजित किसान मजदूर पंचायत को संबोधित करते हुए टिकैत ने कहा कि किसानों को गन्ने के अधिक दाम और अन्य कृषि मुद्दों के लिए आंदोलन को फिर से सक्रिय करने की जरूरत है, क्योंकि सरकार पर निरंतर दबाव के बिना कीमतें अपने आप नहीं बढ़ेंगी।

उन्होंने सवाल किया, ‘‘चीनी के दाम भी बढ़े हैं, तो गन्ने के दाम क्यों नहीं बढ़ने चाहिए?’’

उन्होंने किसानों से प्रदर्शन कर अपनी मांगें लिखित में अधिकारियों को सौंपने का आग्रह किया।

धान की खरीद के मुद्दे पर, टिकैत ने आरोप लगाया कि किसानों को अपनी उपज उम्मीद से लगभग 1,000 रुपये प्रति क्विंटल कम दाम पर बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने तुरंत खरीद शुरू करने और समय पर भुगतान करने की मांग की।

उन्होंने चीनी मिलों पर बकाया गन्ना भुगतान के निपटारे की भी मांग की। उन्होंने बंद पड़ी मिलों को ऐसे नए मालिकों को सौंपने की मांग की जो उन्हें चला सकें और किसानों का भुगतान कर सकें।

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में टिकैत ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चीनी मिलें पिछले सत्र का बकाया तुरंत चुकाएं। उन्होंने 2013 की दरों और संबंधित भूमि अधिग्रहण ढांचे के आधार पर भूमि अधिग्रहण के मुआवजे की भी मांग की तथा कहा कि जिन क्षेत्रों में किसानों को आंदोलन के बावजूद अपर्याप्त मुआवजा मिला है, वहां दरों में संशोधन किया जाना चाहिए।

प्रदर्शनों पर प्रतिबंध को लेकर टिकैत ने कहा कि तय स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करना मुश्किल हो गया है ।उन्होंने दिल्ली में जंतर-मंतर सहित धरना स्थलों पर प्रतिबंधों का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि अब किसानों को बैठकें करने के लिए जगह सुनिश्चित करने के लिए भी विरोध करना पड़ेगा।

भाषा किशोर आनन्द

राजकुमार

राजकुमार

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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