जम्मू, नौ फरवरी (भाषा) जम्मू कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए सोमवार को कहा कि पिछले कई वर्षों से यहां बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से लगातार अधिक बनी हुई है।
जम्मू कश्मीर विधानसभा में विधायक मुबारक गुल के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में समग्र बेरोजगारी दर 6.7 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 3.5 प्रतिशत से काफी अधिक है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के पीएलएफएस का हवाला देते हुए श्रम एवं रोजगार विभाग के प्रभारी मंत्री उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू कश्मीर में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों में बेरोजगारी दर पिछले छह वर्षों से राष्ट्रीय औसत से अधिक बनी हुई है।
उन्होंने बताया कि 2024-25 में केंद्र शासित प्रदेश में बेरोजगारी दर 6.7 प्रतिशत रही, जबकि पूरे देश में यह औसत 3.5 प्रतिशत थी और 2023-24 में यह दर 6.1 प्रतिशत थी, जबकि भारत में यह 3.2 प्रतिशत थी। वहीं, 2022-23 में यह 4.4 प्रतिशत थी, जबकि राष्ट्रीय औसत बेरोजगारी दर 3.2 प्रतिशत थी।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि 2021-22 में जम्मू कश्मीर में अनुमानित बेरोजगारी दर 5.2 प्रतिशत रही जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 4.1 प्रतिशत थी। वहीं, 2020-21 में केंद्र शासित प्रदेश में बेरोजगारी दर 5.9 प्रतिशत थी, जबकि भारत में यह 4.2 प्रतिशत दर्ज की गई थी और 2019-20 में जम्मू कश्मीर में बेरोजगारी दर 6.7 प्रतिशत थी, जो राष्ट्रीय औसत 4.8 प्रतिशत से काफी अधिक है।
चौधरी ने बताया कि पिछले साल जनवरी में मिशन युवा के तहत जम्मू कश्मीर में किए गए एक आधारभूत सर्वेक्षण के अनुसार, कुल 64.8 लाख व्यक्तियों में से 18-50 आयु वर्ग के 4.73 लाख व्यक्तियों ने सूचना दी थी कि वे ‘‘काम नहीं कर रहे हैं लेकिन वह काम करने के इच्छुक हैं’’।
उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण में शामिल युवाओं में 70,428 स्नातकोत्तर, 98,466 स्नातक उत्तीर्ण छात्र थे।
चौधरी ने कहा कि बेरोजगारी और खासकर युवाओं की इस समस्या से निपटना नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेका) के नेतृत्व वाली सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है।
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यासिर रंजन
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