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Tuesday, 3 March, 2026
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‘चिकन नेक’ के साथ भूमिगत रेल लिंक पूर्वोत्तर के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करेगा : हिमंत

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गुवाहाटी, तीन फरवरी (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम बंगाल के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘चिकन नेक’ गलियारे के साथ प्रस्तावित भूमिगत रेल लिंक पूर्वोत्तर को जोड़ने वाला एक सुरक्षित परिवहन मार्ग सुनिश्चित करेगा।

उन्होंने कहा कि 1971 के बाद इस संकरी पट्टी की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाना चाहिए था।

शर्मा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “यह बहुत महत्वपूर्ण है। दशकों से ‘चिकन नेक’ का इस्तेमाल हमारी सीमाओं के भीतर और बाहर दोनों जगह राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा डराने-धमकाने की रणनीति के रूप में किया जाता रहा है।”

उन्होंने बताया, “प्रस्तावित भूमिगत रेल लिंक एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सफलता है, जो पूर्वोत्तर और देश के शेष भाग के बीच एक सुरक्षित व पुख्ता परिवहन गलियारा तैयार करेगी।”

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा था कि 40 किलोमीटर लंबे रणनीतिक गलियारे के साथ भूमिगत रेलवे ट्रैक बिछाने और मौजूदा ट्रैक को चार लेन का बनाने की योजना पर काम जारी है।

यह रणनीतिक गलियारा, जिसे अपनी आकृति के कारण ‘चिकन नेक’ कहा जाता है, पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी क्षेत्र में स्थित एक भू-खंड है, जिसकी चौड़ाई 20 किलोमीटर से अधिक है। यह भू-खंड नेपाल और बांग्लादेश के बीच संकुचित है, जबकि भूटान और चीन इससे कुछ सौ किलोमीटर दूर है।

शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वैष्णव को इस फैसले के लिए धन्यवाद देते हुए कहा, “हम इस दीर्घकालिक रणनीतिक कमजोरी को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहे हैं। यह एक ऐसी कमजोरी है जिसे, पीछे मुड़कर देखा जाए तो, बहुत पहले ही सुलझा लिया जाना चाहिए था, शायद 1971 के युद्ध के बाद ही। ”

शर्मा ने इससे पहले कहा था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी 1971 के युद्ध के बाद ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर का विस्तार करने का अनुरोध कर सकती थीं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि अगर भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने विभाजन के दौरान चटगांव बंदरगाह को पंजाब के एक हिस्से के बदले पाकिस्तान को नहीं दिया होता, तो पूर्वोत्तर ‘चिकन नेक’ पर निर्भर नहीं होता।

पूर्वोत्तर सीमा रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित भूमिगत लाइनें पश्चिम बंगाल के तिनमाइल हाट और रंगापानी रेलवे स्टेशन के बीच होंगी।

उन्होंने बताया कि इनमें से एक लाइन पश्चिम बंगाल के बागडोगरा की ओर जाएगी, जो देश की वायु रक्षा प्रणाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भाषा जितेंद्र दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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