नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र-लोकतंत्र कोष (यूएनडीईएफ) में भारत के वित्तपोषण से अमेरिकी व्यवसायी जॉर्ज सोरोस के नेतृत्व वाले फाउंडेशन लाभान्वित होने और विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा हाल में सोरोस की आलोचना दो अलग-अलग मुद्दे हैं।
भारत और अमेरिका के संयुक्त प्रयासों के बाद 2005 में स्थापित यूएनडीईएफ, नागरिक समाज, मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों का समर्थन करने और उन्हें मजबूत करने के लिए दुनिया भर में परियोजनाओं को लागू करता है। यूएनडीईएफ को भारत, स्पेन, ब्रिटेन और अमेरिका सहित लगभग 45 सदस्य देशों से धन प्राप्त होता है।
मीडिया की हालिया खबरों के अनुसार, यूएनडीईएफ द्वारा वित्तपोषित बड़ी संख्या में परियोजनाओं को सोरोस ओपन सोसाइटी फाउंडेशन (ओएसएफ) से जुड़े संगठनों द्वारा क्रियान्वित किया गया।
जयशंकर की सोरोस की आलोचना की पृष्ठभूमि में, ऐसी राय भी सामने आई थी कि एक ओर भारत सोरोस और ओएसएफ के खिलाफ देश में कठोर रुख अख्तियार कर रहा है तो वहीं वह यूएनडीईएफ में वित्तपोषण से लाभान्वित होने वाले फाउंडेशन पर समान दृष्टिकोण नहीं अपना रहा।
संवाददाता सम्मेलन के दौरान इस बारे में पूछे जाने पर, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि ये पूरी तरह से दो अलग-अलग मुद्दे हैं और ये आपस में जुड़े हुए नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि भारत, संयुक्त राष्ट्र के एक जिम्मेदार सदस्य के रूप में, विभिन्न गतिविधियों में भाग लेता है और बढ़ावा देता है जिसमें यूएनडीईएफ सहित संयुक्त राष्ट्र के कई स्वैच्छिक कोष और कार्यक्रमों में योगदान शामिल है।
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