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Friday, 20 March, 2026
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14.20 लाख रुपये के ‘डिजिटल अरेस्ट’ केस में कोटक महिंद्रा के दो कर्मचारी गिरफ्तार

पुलिस के मुताबिक आरोपी बैंक के अकाउंट ओपनिंग विभाग में ‘टीम लीड’ के तौर पर काम करते थे. पुलिस ने उस शेल फर्म के ‘डायरेक्टर’ को भी गिरफ्तार किया, जिसके खाते का इस्तेमाल कथित ठगी में हुआ.

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने 14.20 लाख रुपये के एक ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले का खुलासा करते हुए कोटक महिंद्रा बैंक के दो कर्मचारियों और शहर की एक शेल फर्म के कथित डायरेक्टर को गिरफ्तार किया है. इस मामले में एक व्यक्ति से कथित तौर पर 14.20 लाख रुपये की ठगी की गई थी.

पुलिस ने कहा कि कोटक महिंद्रा बैंक के अकाउंट ओपनिंग विभाग में टीम लीड के तौर पर काम करने वाले दो कर्मचारी—मोहम्मद कैफ (21) और मोनिश (21), जो दोनों उत्तर प्रदेश के शामली के रहने वाले हैं, दोनों ने फर्ज़ी खाते खुलवाने में मदद की. पुलिस के मुताबिक इन खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर पीड़ितों से 2.20 करोड़ रुपये की ठगी करने में किया गया.

पुलिस ने आंध्र प्रदेश के रंगारेड्डी के रहने वाले सशिंदर राम (29) को भी गिरफ्तार किया है.

दिप्रिंट ने इस मामले पर टिप्पणी के लिए कोटक महिंद्रा बैंक को ईमेल भेजा है. बैंक की तरफ से जवाब मिलने पर रिपोर्ट अपडेट की जाएगी.

पुलिस की कार्रवाई उस शिकायत के बाद शुरू हुई, जो 21 फरवरी को दिल्ली के पश्चिम विहार निवासी सत्यपाल गुप्ता ने दर्ज कराई थी. शिकायत में उन्होंने कहा कि उन्हें एक अज्ञात व्यक्ति का व्हाट्सऐप कॉल आया, जिसने खुद को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताया.

सत्यपाल ने अपनी शिकायत में कहा कि कॉल करने वाले ने उन्हें बताया कि उनके नाम से बैंक खाते मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हो रहे हैं और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

कॉलर ने उनसे कहा कि अगर वे गिरफ्तार नहीं होना चाहते हैं, तो पैसे दें.

एक अधिकारी ने बताया, “ठग द्वारा पैदा किए गए डर और दबाव में आकर शिकायतकर्ता ने कॉलर द्वारा दिए गए बैंक खाते में कुल 14.20 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए. बाद में जब उन्हें पता चला कि वे साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं, तो उन्होंने पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई.”

इस मामले में साइबर पुलिस स्टेशन में बीएनएस की धारा 308 (ऐसा काम जो इरादे या जानकारी के साथ किया गया हो, जिससे मौत हो सकती है, लेकिन मौत न हुई हो), 318(4) (बड़े स्तर पर धोखाधड़ी), 319 (किसी और बनकर धोखा देना) और 340 (जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को असली बताकर इस्तेमाल करना) के तहत केस दर्ज किया गया.

पुलिस ने एक टीम बनाई और जांच के दौरान लेयर-1 बेनिफिशियरी अकाउंट की जानकारी हासिल की. यह वह खाता होता है, जिसमें पीड़ित के पैसे भेजने के तुरंत बाद चोरी की रकम ट्रांसफर की जाती है.

पुलिस ने कहा, “यह खाता आईसीआईसीआई बैंक का एक करंट अकाउंट निकला, जो रेनुदार सर्विसेज एंड सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर था. इस खाते के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी की आगे की जांच के लिए पड़ताल की गई.”

पुलिस ने कहा कि यह एक फर्ज़ी शेल कंपनी थी, जिसे सिर्फ इसी मकसद के लिए बनाया गया था.

पुलिस के मुताबिक 9 मार्च को लेयर-1 बैंक खाते के धारक और इस फर्म के डायरेक्टर सशिंदर को कश्मीरी गेट स्थित अंतरराज्यीय बस अड्डे (ISBT) से पकड़ा गया.

पुलिस ने कहा कि पूछताछ के दौरान पता चला कि सशिंदर कथित तौर पर इस ठगी को अंजाम देने के लिए अपने बैंक खाते के इस्तेमाल की अनुमति देने में सक्रिय रूप से शामिल था.

पुलिस ने कहा कि आगे यह भी पता चला कि यह खाता खास तौर पर ऐसे गैरकानूनी लेनदेन को आसान बनाने के लिए खोला गया था. पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

डीसीपी (आउटर) विक्रम सिंह ने कहा, “पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपने साथियों की संलिप्तता के बारे में बताया, जिन्होंने उसे कमीशन देने का लालच देकर अपने बैंक खाते का इस्तेमाल फर्जी लेनदेन के लिए करने को कहा था.”

इसके बाद पुलिस ने तकनीकी निगरानी और फील्ड इंटेलिजेंस के आधार पर कार्रवाई की और मोहम्मद कैफ और मोनिश को क्रमशः उत्तर प्रदेश के कैराना और सहारनपुर से गिरफ्तार किया.

डीसीपी ने कहा, “यह दोनों कोटक महिंद्रा बैंक में बैंक खाते खोलने के काम में टीम लीडर के तौर पर लगे थे, और कथित तौर पर इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की गतिविधियों को आसान बनाने में किया गया.”

पुलिस ने तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं. पुलिस के मुताबिक इन डिवाइस की जांच में मामले से जुड़े आपत्तिजनक व्हाट्सऐप चैट मिले, जिससे साइबर ठगी नेटवर्क में उनकी भूमिका और पक्की हुई.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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