गुवाहाटी, 26 नवंबर (भाषा) असम समझौते के कार्यान्वयन के संबंध में केंद्र, असम सरकार और ‘ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन’ (आसू) के बीच त्रिपक्षीय वार्ता अगले साल जनवरी तक होने की संभावना है। विधानसभा को यह सूचना बुधवार को दी गई।
असम गण परिषद (एजीपी) विधायक रामेंद्र नारायण कलिता के प्रश्न का उत्तर देते हुए असम समझौते के कार्यान्वयन मंत्री अतुल बोरा ने कहा कि आसू ने सरकार से असम समझौते के खंड 6 पर न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बिप्लब कुमार शर्मा समिति की रिपोर्ट के क्रियान्वयन के लिए त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित करने का अनुरोध किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने इस संबंध में पहल की है और केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क किया है, जिसके बाद जनवरी तक त्रिपक्षीय वार्ता होने की संभावना है।’’
मंत्री ने यह भी कहा कि असम समझौते पर न्यायमूर्ति शर्मा समिति की रिपोर्ट में 67 सिफारिशें की गई हैं।
समिति ने 25 फरवरी 2020 को असम समझौते के कार्यान्वयन पर अपनी रिपोर्ट तत्कालीन मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को सौंपी थी, ताकि इसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपा जा सके।
इसके लिए केंद्र द्वारा उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) का गठन किया गया था।
असम समझौते के खंड 6 के अनुसार, असमिया लोगों की संस्कृति, सामाजिक, भाषाई पहचान और विरासत की रक्षा, संरक्षण और संवर्धन के लिए, यथा उपयुक्त, संवैधानिक, विधायी और प्रशासनिक सुरक्षा उपाय प्रदान किए जाएंगे।
असम सरकार और आसू ने पिछले वर्ष सितंबर में पहली बार असम समझौते के खंड 6 पर न्यायमूर्ति शर्मा समिति की सिफारिशों के कार्यान्वयन पर चर्चा की थी।
असम समझौते पर 1985 में छह साल तक चले हिंसक विदेशी और विरोधी आंदोलन के बाद हस्ताक्षर किए गए थे। इसमें अन्य प्रावधानों के अलावा यह भी कहा गया था कि 25 मार्च 1971 को या उसके बाद असम आने वाले सभी विदेशियों के नाम चिन्हित किए जाएंगे, उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे और उन्हें निर्वासित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
बोरा ने आगे कहा कि 1971 से राज्य में कुल 1,35,901 लोगों की पहचान अवैध विदेशियों के रूप में की गई है, लेकिन उनमें से केवल 30,130 को ही अब तक निर्वासित किया गया है।
भाषा यासिर रंजन
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