नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय के एक अधिकरण ने इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) पर लगाए गए प्रतिबंध को पांच साल बढ़ाने की पुष्टि की है। आईआरएफ की स्थापना ज़ाकिर नाइक ने की है जो फरार है और उसपर भारत और विदेश के मुस्लिम युवाओं को आतंकी कृत्य करने के लिए उकसाने का आरोप है।
केंद्र सरकार ने 17 नवंबर 2016 को गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून 1967 के तहत पहली बार आईआरएफ को प्रतिबंधित किया था। सरकार ने 15 नवंबर 2021 को प्रतिबंध को पांच साल के लिए बढ़ा दिया था।
एक अधिसूचना में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस बात पर फैसला करने के लिए 13 दिसंबर 2021 को एक अधिकरण गठित क था कि आईआरएफ को गैर कानूनी संगठन घोषित करने के लिए पर्याप्त कारण हैं या नहीं। इस अधिकरण में दिल्ली उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल शामिल थे।
मंत्रालय ने कहा कि इस अधिकरण ने नौ मार्च 2022 को एक आदेश पारित करके आईआरएफ को गैर कानूनी संगठन घोषित किए जाने की पुष्टि की।
अधिकरण के पीठासीन अधिकारी न्यायमूर्ति पटेल ने कहा कि वह केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की ओर से दी गई दलीलों से ‘पूर्ण सहमति’ हैं और यह दिखाने के लिए सामग्री है कि आईआरएफ गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त था।
अधिकरण ने कहा कि आईआरएफ उन गतिविधियों में शामिल है जो न केवल युवाओं को भारत की संप्रभुता, एकता, अखंडता और सुरक्षा को खतरे में डालने के इरादे से गैरकानूनी गतिविधियों को करने के लिए उकसाती है, बल्कि देश के खिलाफ असंतोष पैदा कराती है और इस निष्कर्ष पर पहुंचने की वजह है कि संगठन को गैर कानूनी घोषित किया जाए।
उसने कहा कि सबूतों के अवलोकन करने से पता चलता है कि ‘डॉ जाकिर नाइक के कार्य और आचरण भारत के राष्ट्रीय हित के प्रतिकूल हैं। यह आदेश 30 मार्च को गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है।
अधिकरण ने आईआरएफ की इस दलील को खारिज कर दिया कि 2016 में प्रतिबंध लगने के बाद, उसने ऐसी कोई गतिविधि नहीं की जो देश के राष्ट्रीय हित के लिए हानिकारक हो और कहा कि ‘ऐसा प्रतीत होता है कि आईआरएफ और उसके पदाधिकारियों ने गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त रहना जारी रखा है जो राष्ट्रहित के लिए हानिकारक हैं।’
उसने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि न केवल डॉ नाइक सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं बल्कि विभिन्न खाड़ी देशों में अपनी गतिविधियों का प्रचार-प्रसार भी करते रहते हैं।
प्रतिबंध की मियाद बढ़ाते हुए मंत्रालय ने कहा था कि अगर आईआरएफ की गतिविधियों पर लगाम नहीं कसी गई और उसे तत्काल नियंत्रित नहीं किया गया तो उसे अपनी विनाशक गतिविधियों को जारी रखने का मौके मिलेगा और वह अपने लोगों को फिर से जमा कर सकता है जो अब भी फरार हैं।
उसने कहा था कि केंद्र सरकार की राय है कि आईआरएफ की गतिविधियों के संबंध में, यह जरूरी है कि उसे फौरन गैर कानूनी संगठन घोषित किया जाए।
मुंबई में जन्मे नाइक ने एक जुलाई 2016 को ढाका के एक कैफे में हुए विस्फोट के मद्देनजर भारत छोड़ दिया था। उसपर अपने ‘पीस टीवी’ और सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए अलग-अलग समुदायों में नफरत फैलाने का आरोप है। वह फिलहाल मलेशिया में रह रहा है।
ढाका में हुए विस्फोट में, 20 लोगों की मौत हुई थी जिनमें 17 विदेशी थे। बांग्लादेश के एक हमलावर ने कहा था कि वह नाइक के भाषणों से प्रेरित है। नाइक ने किसी भी घटना में किरदार होने से इनकार किया है।
गृह मंत्रालय ने कहा था कि नाइक के बयान और भाषण आपत्तिजनक और विनाशकारी होते हैं और इनके जरिए वह धार्मिक समूहों में नफरत फैलाता है और देश-विदेश में एक खास धर्म के युवाओं को आतंकी कृत्य करने के लिए उकसाता है।
मंत्रालय ने कहा कि नाइक की गतिविधियां देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को नुकसान पहुंचाएंगी और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ेगी।
भारत मलेशिया से नाइक को प्रत्यर्पित करने की मांग कर रहा है लेकिन इसमें कोई कामयाबी नहीं मिली है। उसे मलेशिया में स्थायी निवास हासिल है जो उसे बचाता है।
भाषा नोमान नरेश
नरेश
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