scorecardresearch
Wednesday, 11 February, 2026
होमदेशअनुवाद से तुलु साहित्य को नयी पहचान मिलेगी: प्रो. विवेक राय

अनुवाद से तुलु साहित्य को नयी पहचान मिलेगी: प्रो. विवेक राय

Text Size:

मंगलुरु (कर्नाटक), 14 जनवरी (भाषा) प्रख्यात शिक्षाविद प्रोफेसर बी.ए. विवेक राय ने बुधवार को कहा कि प्रमुख तुलु लेखकों की कृतियों का अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में अनुवाद किए जाने से तुलु साहित्य की अंतर्वस्तु और उसकी सांस्कृतिक समृद्धि को तुलु भूमि की भौगोलिक सीमाओं से बाहर ले जाने में मदद मिलेगी।

वह यहां प्रख्यात नाटककार अमृता सोमेश्वर के तुलु नाटक गोंडोलु और उनके अन्य नाटकों के अंग्रेजी संस्करण के विमोचन अवसर पर बोल रहे थे। इन नाटकों का प्रकाशन कर्नाटक तुलु साहित्य अकादमी द्वारा किया गया है।

प्रोफेसर राय ने कहा कि पश्चिमी देशों में एक ही साहित्यिक कृति के कई अनुवाद देखने को मिलते हैं और अक्सर एक ही पुस्तक के 10 से 12 अलग-अलग अनुवाद उपलब्ध होते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में भी अनुवाद को एक गंभीर अकादमिक और पेशेवर क्षेत्र के रूप में पहचान दिए जाने की आवश्यकता है।

राय ने इस बात पर बल दिया कि दिवंगत वरिष्ठ लेखकों की विरासत को संरक्षित रखने के लिए उनकी रचनाओं का अनुवाद अत्यंत आवश्यक है।

भाषा सं राजेंद्र खारी

खारी

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments